चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
कानपुर से सामने आया बच्चा चोरी का मामला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पुलिस और स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया है। सरकारी अस्पताल से नवजात बच्चे को चोरी करने के प्रयास की जांच में बिजली विभाग के एक एसडीओ का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, बेटे की चाहत में कथित तौर पर बच्चा चोरी कराने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए एएनएम को पांच लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। पुलिस ने जांच के बाद बिजली विभाग के एसडीओ आर.के. वर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामला घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है और इसकी शुरुआत 10 मई 2026 की रात हुई थी। उस रात एक महिला कथित तौर पर खुद को नर्स बताकर जच्चा-बच्चा वार्ड में पहुंची और जांच करने के बहाने एक नवजात बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकलने लगी। हालांकि, बच्चे की मां की नजर उस महिला पर पड़ गई और उसके शोर मचाने के बाद परिजनों तथा अस्पताल के गार्ड ने महिला को पकड़ लिया।
घटना के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती तौर पर मामला केवल बच्चा चोरी के प्रयास का दिखाई दे रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित साजिश के पीछे अन्य लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी मिली। इसी जांच में हमीरपुर के मौदहा में तैनात बिजली विभाग के एसडीओ आर.के. वर्मा का नाम सामने आया।
नर्स बनकर अस्पताल में पहुंची महिला
जानकारी के मुताबिक, घाटमपुर थाना क्षेत्र के बम्हौरी गांव निवासी अवनीश किसान हैं। उनकी 22 वर्षीय पत्नी मंजू को प्रसव के लिए 10 मई को घाटमपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया था। उसी दिन शाम को मंजू ने एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और नवजात को अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में रखा गया था।
रात करीब 10 बजे एक महिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में पहुंची। बताया जाता है कि वह कुछ समय तक वार्ड में इधर-उधर घूमती रही और वहां मौजूद महिलाओं से बातचीत भी करती थी। महिला ने खुद को नर्स बताया और जांच के बहाने नवजात को अपनी गोद में उठा लिया।
मां को जब तक पूरी स्थिति समझ में आती, तब तक महिला बच्चे को लेकर वार्ड से बाहर निकलने लगी। इसी दौरान मंजू को शक हुआ और उसने शोर मचा दिया। उसकी आवाज सुनकर अस्पताल में मौजूद लोगों का ध्यान महिला की ओर गया।
मां के शोर से खुली बच्चा चोरी की कोशिश
बच्चे की मां ने तत्काल अपने पति अवनीश को फोन किया। उस समय अवनीश अस्पताल के बाहर मौजूद थे। महिला जैसे ही बच्चे को लेकर अस्पताल के गेट की ओर बढ़ी, अवनीश और सुरक्षा गार्ड ने उसे पकड़ लिया।
इसके बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती पूछताछ में महिला ने अपना नाम गीता देवी और पति का नाम विनोद कुमार बताया। उसने खुद को बांदा के बबेरू थाना क्षेत्र के अनुवान गांव की रहने वाली बताया।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि महिला पहली बार अस्पताल नहीं आई थी। बताया गया कि वह घटना से पहले करीब एक सप्ताह के दौरान पांच से छह बार अस्पताल आ चुकी थी। वह जच्चा-बच्चा वार्ड में जाती, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से बातचीत करती तथा वहां की गतिविधियों पर नजर रखती थी।
अस्पताल में लगातार आने-जाने से बना भरोसा
जांच के दौरान पुलिस को महिला की अस्पताल में लगातार मौजूदगी महत्वपूर्ण लगी। कथित तौर पर वह वार्ड में जाकर महिलाओं का हालचाल पूछती थी। खुद को नर्स बताने के कारण संभवतः वहां मौजूद लोगों को उसके आने-जाने पर तत्काल संदेह नहीं हुआ।
इसी परिचय का फायदा उठाकर उसने नवजात बच्चे को गोद में लेने की कोशिश की। यदि बच्चे की मां की नजर उस पर समय रहते नहीं पड़ती और वह शोर नहीं मचाती, तो महिला बच्चे को लेकर अस्पताल से बाहर निकल सकती थी।
पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। उस पर बच्चे के अपहरण और मानव तस्करी से संबंधित धाराओं में कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
लेकिन पुलिस ने महिला की गिरफ्तारी के बाद जांच बंद नहीं की। पुलिस यह पता लगाने में जुटी रही कि आखिर नवजात बच्चे को चोरी करने के पीछे महिला का उद्देश्य क्या था और क्या वह अकेले इस वारदात को अंजाम देने पहुंची थी।
पूछताछ में सामने आया एसडीओ का नाम
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मामले में बिजली विभाग के एसडीओ आर.के. वर्मा का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आर.के. वर्मा मूल रूप से कानपुर के घाटमपुर का रहने वाला है और वर्तमान में हमीरपुर जिले के मौदहा स्थित बिजली विभाग के सब स्टेशन में एसडीओ के पद पर तैनात है।
बताया गया कि वह करीब छह महीने से मौदहा में तैनात था। पुलिस के अनुसार, आर.के. वर्मा की दो बेटियां हैं और वह कथित तौर पर बेटे की चाहत रखता था। इसी चाहत के चलते उसने नवजात बच्चे को चोरी कराने की योजना बनाई।
जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि बच्चे की चोरी कराने के बदले एएनएम गीता देवी को पांच लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। पुलिस का दावा है कि इसी कथित सौदे के तहत बच्चा चोरी करने का प्रयास किया गया।
पांच लाख रुपये में तय हुआ था कथित सौदा
बच्चा चोरी के इस मामले में पांच लाख रुपये का कथित लालच जांच का सबसे अहम पहलू बनकर सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एसडीओ आर.के. वर्मा ने एएनएम को बच्चा चोरी करने के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही थी।
हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी। फिलहाल पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आर.के. वर्मा को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने बीते 9 अगस्त को आर.के. वर्मा को गिरफ्तार किया और इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद बच्चा चोरी का यह मामला महज अस्पताल से नवजात को उठाने की कोशिश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे कथित तौर पर बनाई गई साजिश की जांच का विषय बन गया।
पुलिस जांच में सामने आए कई सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक महिला लगातार कई बार जच्चा-बच्चा वार्ड तक कैसे पहुंचती रही और खुद को नर्स बताकर वहां मौजूद लोगों से बातचीत कैसे करती रही।
दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बच्चा चोरी की कथित योजना पहले से बनाई गई थी और अस्पताल में महिला की बार-बार मौजूदगी उसी योजना का हिस्सा थी। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है।
मामले में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी महिला और एसडीओ आर.के. वर्मा के बीच संपर्क कैसे हुआ था। पुलिस कथित आर्थिक लेनदेन, मोबाइल फोन संपर्क और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चा चोरी की पूरी योजना किस तरह तैयार हुई थी।
समय रहते पकड़ ली गई आरोपी महिला
इस पूरे घटनाक्रम में बच्चे की मां की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई। महिला ने जैसे ही देखा कि एक अनजान महिला उसके नवजात बच्चे को लेकर बाहर जा रही है, उसने बिना देर किए शोर मचा दिया।
परिजनों और गार्ड की तत्परता से महिला अस्पताल के गेट से बाहर नहीं निकल सकी। यदि वह उस समय पकड़ी नहीं जाती, तो नवजात बच्चे को अस्पताल से बाहर ले जाना संभव था और मामला कहीं अधिक गंभीर रूप ले सकता था।
घटना के बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया और उसकी पूछताछ के आधार पर कथित साजिश की परतें खुलती गईं। अब इस मामले में पुलिस की जांच का केंद्र केवल बच्चा चोरी का प्रयास नहीं, बल्कि इसके पीछे मौजूद कथित नेटवर्क और उसकी भूमिका को स्पष्ट करना है।
बेटे की चाहत ने पहुंचाया जेल तक
पुलिस के अनुसार, इस मामले में बेटे की चाहत ही कथित साजिश की मुख्य वजह बनकर सामने आई है। दो बेटियों के पिता बताए जा रहे एसडीओ पर आरोप है कि उसने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए नवजात बच्चे को चोरी कराने की कोशिश की और इसके लिए पांच लाख रुपये देने का लालच दिया।
एक ओर जहां परिवारों में संतान के जन्म को खुशी के अवसर के रूप में देखा जाता है, वहीं इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि संतान के प्रति अत्यधिक चाहत किस तरह किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध के आरोपों में फंसा सकती है। सरकारी पद पर तैनात अधिकारी का नाम इस तरह के मामले में सामने आने से घटना की गंभीरता और बढ़ गई है।
फिलहाल आर.के. वर्मा जेल में है और बच्चा चोरी के प्रयास में गिरफ्तार की गई एएनएम गीता देवी भी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रही है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और बच्चे को चोरी करने के बाद उसे कहां ले जाने की योजना थी।
घाटमपुर के सरकारी अस्पताल में 10 मई की रात हुई यह घटना एक बार फिर बताती है कि नवजात बच्चों वाले वार्ड में सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। इस मामले में बच्चे की मां की सतर्कता और परिजनों की तत्काल कार्रवाई से नवजात सुरक्षित बच गया, लेकिन जांच में सामने आए कथित पांच लाख रुपये के सौदे ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर और चौंकाने वाला बना दिया है।













