अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत के बाद प्रयागराज में उसके अंतिम संस्कार को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जहां उसके बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद भी जेल से पैरोल पर पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान में मौजूद रहे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को लेकर हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि करीब तीन साल से फरार चल रही शाइस्ता परवीन बुर्के में महिलाओं की भीड़ के बीच कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंची थीं और उन्होंने अपने छोटे बेटे अबान को अंतिम विदाई दी।
हालांकि, शाइस्ता परवीन के जनाजे या कब्रिस्तान में मौजूद होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस, प्रशासन अथवा किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोत की ओर से ऐसा कोई पुष्ट बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह सवाल फिलहाल दावा और चर्चा के स्तर पर ही है।
क्या बेटे के अंतिम संस्कार में पहुंची थीं शाइस्ता?
अबान अहमद की मौत के बाद शाइस्ता परवीन की संभावित मौजूदगी की चर्चा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के मुताबिक, वह कथित तौर पर बुर्का पहनकर महिलाओं के बीच कब्रिस्तान पहुंचीं और भीड़ में अपनी पहचान छिपाकर बेटे को अंतिम बार देखा।
लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए फिलहाल कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या ऐसा स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि शाइस्ता वहां मौजूद थीं।
शाइस्ता परवीन इससे पहले भी अपने पति अतीक अहमद, देवर अशरफ और बेटे असद के अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दी थीं। यही वजह है कि अबान के निधन के बाद उनके कथित रूप से कब्रिस्तान पहुंचने की खबर ने लोगों का ध्यान खींचा है।
मां और बेटे के रिश्ते की भावनात्मक संवेदनाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अबान की मौत ने शाइस्ता को लंबे समय से चली आ रही कथित फरारी के बावजूद अपने बेटे को अंतिम बार देखने के लिए मजबूर किया? हालांकि, इसका जवाब अभी केवल अटकलों तक सीमित है।
पैरोल पर पहुंचे उमर और अली
अबान अहमद के अंतिम संस्कार में उसके बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद भी शामिल हुए। दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं और उन्हें पैरोल के माध्यम से अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई।
बताया गया कि उमर अहमद लखनऊ जेल से और अली अहमद झांसी जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रयागराज पहुंचे। दोनों भाइयों ने अपने छोटे भाई के जनाजे को कंधा दिया और कब्र में मिट्टी डालकर अंतिम विदाई दी।
इस दौरान दोनों भावुक नजर आए। परिवार के करीबी लोगों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौजूदगी के बीच अबान को कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
कब्रिस्तान में उमड़ी भारी भीड़
अबान के जनाजे में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कब्रिस्तान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को संभालने में पुलिस को काफी परेशानी हुई।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कई लोगों ने अंदर जाने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा। जनाजे और अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी काफी बढ़ा दी गई थी।
इसी भारी भीड़ के बीच बुर्का पहने महिलाओं की मौजूदगी को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुईं। सोशल मीडिया पर इन्हीं तस्वीरों और वीडियो के आधार पर शाइस्ता परवीन के वहां होने का दावा किया जाने लगा। मगर केवल भीड़ में किसी बुर्कानशीं महिला की मौजूदगी के आधार पर उसकी पहचान शाइस्ता परवीन के रूप में करना उचित नहीं होगा।
कौन हैं शाइस्ता परवीन और क्यों हैं चर्चा में?
शाइस्ता परवीन अतीक अहमद की पत्नी हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह मूल रूप से प्रयागराज क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और वर्ष 1996 में उनकी शादी अतीक अहमद से हुई थी।
अतीक अहमद के राजनीतिक और आपराधिक प्रभाव के विस्तार के साथ शाइस्ता परवीन का नाम भी सार्वजनिक जीवन में चर्चा में आने लगा। बाद के वर्षों में उनका नाम अतीक से जुड़े मामलों और उसके कथित नेटवर्क के संदर्भ में सामने आता रहा।
24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल और उनके सुरक्षा कर्मियों की हत्या के बाद शाइस्ता परवीन का नाम भी मामले से जुड़ा। जांच एजेंसियों की ओर से उनके खिलाफ आरोप लगाए गए और पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद शाइस्ता परवीन पर इनाम घोषित किया गया। इसके बाद से वह पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इसी वजह से अबान के अंतिम संस्कार में उनकी कथित मौजूदगी को लेकर उठी चर्चा ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
असद के एनकाउंटर और अतीक-अशरफ की हत्या के बाद भी नहीं आईं सामने
शाइस्ता परवीन के फरार होने की चर्चा वर्ष 2023 में लगातार तेज हुई। 13 अप्रैल 2023 को उनके बेटे असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई। इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इन दोनों घटनाओं के बाद भी शाइस्ता सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आईं। यही कारण है कि अबान की मौत और उसके जनाजे के दौरान उनकी कथित मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यदि वह वास्तव में वहां पहुंची थीं तो यह पुलिस की लंबे समय से जारी तलाश के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। लेकिन यदि इस दावे की पुष्टि नहीं होती है तो इसे केवल सोशल मीडिया या अपुष्ट मीडिया दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
तीन साल से फरारी और अब नए सवाल
शाइस्ता परवीन की कथित फरारी को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की है। इसके बावजूद उनका पता नहीं चल सका है।
अबान अहमद की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शाइस्ता परवीन वास्तव में अपने बेटे को अंतिम बार देखने के लिए कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंची थीं? अगर वह पहुंची थीं तो इतनी भारी सुरक्षा और भीड़ के बीच पुलिस की नजर उनसे कैसे बची? क्या वह वास्तव में महिलाओं की भीड़ में बुर्के के पीछे अपनी पहचान छिपाकर वहां पहुंचीं या फिर सोशल मीडिया पर चल रही तस्वीरों और वीडियो से यह धारणा बनी?
इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शाइस्ता परवीन की अबान अहमद के जनाजे में मौजूदगी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जब तक पुलिस या किसी विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोत से इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे एक अपुष्ट दावा ही माना जाना चाहिए।
अबान की मौत ने अतीक अहमद के परिवार को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जेल से पैरोल पर आए उमर और अली ने छोटे भाई को अंतिम विदाई दी, वहीं दूसरी तरफ शाइस्ता परवीन की संभावित मौजूदगी को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में यदि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई जानकारी सामने आती है, तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि शाइस्ता वास्तव में अपने बेटे के अंतिम संस्कार में पहुंची थीं या नहीं।













