रिपोर्ट: कीरत यादव
जौनपुर। जनपद जौनपुर के देवकली बाजार से मटियारी, बेलाव बाजार और जफराबाद होते हुए दीवानी जिला मुख्यालय तक जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में है। बरसात के दिनों में यह सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाती है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है। सड़क की दुर्दशा से नाराज ग्रामीणों और व्यापारियों ने शुक्रवार को अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन करते हुए बीच सड़क पर धान की रोपाई की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब सड़क खेत जैसी बन गई है तो उसमें धान की खेती ही कर दी जाए। ग्रामीणों ने इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
धान की रोपाई कर जताया अनोखा विरोध
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में भरे पानी और कीचड़ के बीच धान की पौध लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि वर्षों से सड़क की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोगों को विरोध का यह अनोखा तरीका अपनाना पड़ा।
हजारों लोगों की जीवनरेखा है यह सड़क
देवकली बाजार से मटियारी, बेलाव बाजार और जफराबाद होते हुए दीवानी जिला मुख्यालय तक जाने वाला यह मार्ग क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन इसी रास्ते से लोग जिला मुख्यालय, न्यायालय, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों और बाजार तक पहुंचते हैं। लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण हर दिन लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हर दिन हादसों का खतरा, बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। विशेषकर दोपहिया वाहन चालक, बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर घायल हो जाते हैं। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से यह पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। ऐसे में दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों की बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से स्कूल और कॉलेज जाते हैं। खराब सड़क के कारण उन्हें समय पर शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
व्यापारियों का कारोबार भी हो रहा प्रभावित
क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि सड़क की बदहाली का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। खराब सड़क के कारण ग्राहक बाजार आने से कतराते हैं और माल की ढुलाई में भी दिक्कतें आती हैं। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों के वादों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लंबे समय से प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुके नेताओं, एक बार समाजवादी पार्टी के विधायक रहे जनप्रतिनिधियों तथा वर्तमान विधायक तूफानी सरोज और सांसद प्रिया सरोज से भी कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास और बेहतर सड़क का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही जनता की समस्याएं भुला दी जाती हैं।
बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन केवल औपचारिक कार्रवाई हुई। कहीं-कहीं गड्ढों में मिट्टी या ईंट डालकर खानापूर्ति कर दी गई, जो पहली बारिश में बह गई। लोगों का कहना है कि सड़क की स्थायी मरम्मत ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
ग्रामीणों की मांग— जल्द हो सड़क का पुनर्निर्माण
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि सड़क का तत्काल सर्वे कराकर गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही जलनिकासी की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि बरसात के दौरान सड़क पर पानी जमा न हो। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
जनता का सवाल— आखिर कब मिलेगी राहत?
ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। उनका सवाल है कि आखिर आम जनता कब तक टूटी सड़कों, कीचड़ और हादसों के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेगी। लोगों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य चाहिए। सड़क पर धान की रोपाई कर किया गया यह विरोध प्रदर्शन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की निगाहें प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।













