सरयू का बढ़ता जलस्तर बना चिंता का कारण, कटान से तटीय गांवों में बढ़ी बेचैनी

देवरिया के डुमरी गांव में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से हो रहे तेज कटान का निरीक्षण करते ग्रामीण, साथ में रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रिपोर्ट: इरफान अली लारी

देवरिया। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के बढ़ते प्रवाह ने विकास खंड लार के तटीय और दियरा क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी खतरे के निशान की ओर बढ़ने के साथ ही कई गांवों में बाढ़ और कटान की आशंका गहरा गई है। विशेष रूप से डुमरी गांव के पास हो रहे तेज कटान ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा सकती है और कई परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।

लगातार बारिश से बदले हालात, तटीय क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता

पिछले कई दिनों से क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण सरयू नदी का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है। इसका असर सबसे अधिक नदी किनारे बसे दियरा क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। चुरिया, नदौली, खेमादेई, महलमंझरिया और डुमरी जैसे गांवों में रहने वाले लोग संभावित बाढ़ की आशंका को लेकर सतर्क हो गए हैं।

ग्रामीणों ने घरों में आवश्यक सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है। पशुपालक भी अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि किसान अपनी खड़ी फसलों को लेकर चिंतित हैं। नदी का बढ़ता जलस्तर खेतों की ओर बढ़ने लगा है, जिससे कृषि कार्य भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।

डुमरी में तेज कटान ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

सबसे अधिक चिंता डुमरी गांव के आसपास हो रहे तेज नदी कटान को लेकर है। यहां नदी का बहाव तेजी से किनारों को काट रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि गांव के समीप ठोकर (स्पर) बनने के बाद नदी की धारा का रुख बदल गया है, जिससे कटान पहले की तुलना में अधिक तेज हो गया है।

See also  आम तोड़ने के दौरान पेड़ से गिरा मासूम, हाथ टूटा ; 108 एंबुलेंस की तत्परता से पहुंचा अस्पताल

किसानों का कहना है कि यदि तत्काल सुरक्षा कार्य नहीं कराया गया तो उनकी वर्षों की मेहनत से तैयार कृषि भूमि नदी में समा जाएगी। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि कई परिवारों की आजीविका भी प्रभावित होगी।

स्थानीय किसान रामप्रताप यादव, सुरेश गुप्ता, अजय सिंह और दिनेश तिवारी सहित अन्य किसानों ने प्रशासन से तत्काल कटान रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए जाएं तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि को बचाया जा सकता है।

पांच गांवों पर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा

जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण चुरिया, नदौली, खेमादेई, महलमंझरिया और डुमरी गांवों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और नदी का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर सकता है।

दियरा क्षेत्र के लोगों के लिए हर वर्ष मानसून चुनौती लेकर आता है। बाढ़ आने पर सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है, खेत जलमग्न हो जाते हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में इस बार भी लोग प्रशासन से समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी करने की मांग कर रहे हैं।

खेतों और पशुधन पर भी मंडरा रहा संकट

सरयू नदी के किनारे बड़ी संख्या में किसान खेती करते हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण खेतों में लगी फसलें प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं नदी किनारे मवेशी चराने वाले लोगों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है।

See also  पर्यावरण बचाने का संकल्प तभी होगा सफल, जब पौधरोपण के साथ होगा संरक्षण

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ की स्थिति बनी तो सबसे पहले पशुओं के चारे और सुरक्षित ठिकाने की समस्या उत्पन्न होगी। ऐसे में प्रशासन को पहले से ही पशु शिविर और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राजस्व विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग को तटीय क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों द्वारा नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण भी किया जा रहा है।

प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी आपात स्थिति से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा इंतजाम तेज करने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। नदी के कमजोर तटबंधों की मरम्मत, कटान प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षात्मक कार्य तथा बाढ़ चौकियों को सक्रिय करना बेहद आवश्यक है।

समाजसेवी शिवम सिंह, विजय यादव, देवानंद, मनोज, सतेन्द्र, रवि प्रकाश सिंह, अमरेश तिवारी और संजय सहित अनेक ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील स्थलों पर तत्काल बचाव कार्य शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि यदि पहले से तैयारी कर ली जाए तो संभावित बाढ़ और कटान से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय: समय रहते रोकथाम जरूरी

आपदा प्रबंधन से जुड़े जानकारों का मानना है कि नदी के बढ़ते जलस्तर के दौरान सबसे अधिक खतरा कटान प्रभावित क्षेत्रों में होता है। यदि समय रहते बोल्डर पिचिंग, तटबंधों की मजबूती और कमजोर स्थानों पर सुरक्षा कार्य करा दिए जाएं तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

See also  जीएम एकेडमी के छात्र ने NEET में शानदार सफलता से बढ़ाया विद्यालय का गौरव

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि प्रशासन को जलस्तर की नियमित मॉनिटरिंग के साथ गांवों में मुनादी, राहत सामग्री की उपलब्धता, नावों की व्यवस्था तथा आपदा राहत टीमों को अलर्ट मोड में रखना चाहिए।

लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह

बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने लोगों से नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करने की अपील की है। बच्चों को नदी के किनारे जाने से रोकने, मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की सलाह दी गई है।

फिलहाल सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो तटीय इलाकों में बाढ़ और कटान की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की तैयारियों और मौसम की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें