पर्यावरण बचाने का संकल्प तभी होगा सफल, जब पौधरोपण के साथ होगा संरक्षण
देवरिया के सलेमपुर में समाजसेवी एवं शिक्षाविद् आचार्य अजय शुक्ल ने किया पौधरोपण, युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का किया आह्वान
रिपोर्ट: इरफान अली लारी
देवरिया। बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और लगातार घटते हरित क्षेत्र के बीच पर्यावरण संरक्षण आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। ऐसे समय में समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े अभियान लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास करा रहे हैं। इसी क्रम में देवरिया जनपद के सलेमपुर क्षेत्र में समाजसेवी एवं शिक्षाविद् आचार्य अजय शुक्ल ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, शुद्ध हवा और सुरक्षित भविष्य देना है तो आज से ही पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे पर्यावरण की रक्षा संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
पौधरोपण के साथ संरक्षण पर दिया विशेष जोर
पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि अक्सर लोग केवल औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगा देते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उनकी देखभाल नहीं करते। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे शुरुआती दिनों में ही नष्ट हो जाते हैं। इसलिए पौधरोपण तभी सार्थक माना जाएगा, जब लगाए गए पौधों का नियमित संरक्षण और संवर्धन भी किया जाए।
उन्होंने कहा कि हर पौधा भविष्य का एक विशाल वृक्ष बन सकता है, जो वर्षों तक मानव समाज को ऑक्सीजन, छाया, फल, औषधीय गुण और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधे लगाने के साथ-साथ उन्हें जीवित रखने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। इन चुनौतियों का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधनों और जैव विविधता पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि अभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो सकती है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को इस दिशा में अपनी भूमिका निभानी होगी।
युवाओं को बनाया अभियान का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल एक सरकारी अभियान न समझें, बल्कि इसे सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाएं। युवा यदि इस दिशा में आगे आएंगे तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।
उन्होंने सुझाव दिया कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, पारिवारिक उत्सव, विद्यालयों के वार्षिकोत्सव तथा अन्य सामाजिक अवसरों पर पौधरोपण को अनिवार्य परंपरा बनाया जाना चाहिए। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और हर वर्ष हजारों नए पौधे लगाए जा सकेंगे।
वृक्ष मानव जीवन की सबसे बड़ी प्राकृतिक पूंजी
आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि वृक्ष केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध बनाने, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, ऑक्सीजन उपलब्ध कराने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वी पर हरियाली बनी रहेगी तो प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे।
उपस्थित लोगों ने लिया हरियाली बढ़ाने का संकल्प
पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने तथा आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण की रक्षा केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है। जब तक प्रत्येक नागरिक इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक हरित और स्वच्छ भारत का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकेगा।
कई लोगों ने निभाई सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर पौधरोपण अभियान में सुदान यादव, साहिल यादव, सन्नी शर्मा, अनिल राजभर, सत्यम गौंड, शिवम, सुधीर सहित अनेक स्थानीय लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को आगे बढ़ाने और अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलेगा।








