इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने शनिवार देर रात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भलुअनी का औचक निरीक्षण किया। लगभग रात 11 बजे हुए इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। विशेष रूप से प्रसव केंद्र, मरीजों के उपचार, दवा उपलब्धता, ड्यूटी व्यवस्था और स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल से कोई भी मरीज असंतुष्ट होकर वापस न लौटे और सभी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
प्रसव कक्ष का किया गहन निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सीधे प्रसव कक्ष पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसव संबंधी व्यवस्थाओं का विस्तार से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रसव पंजिका का अवलोकन करते हुए हाल में हुए प्रत्येक संस्थागत प्रसव की जानकारी ली। उन्होंने यह भी जाना कि अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को किस प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा प्रसव प्रक्रिया कितनी सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा रही है।
उन्होंने चिकित्सा कर्मियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रसव पूरी सावधानी, चिकित्सकीय मानकों और आवश्यक संसाधनों के साथ कराया जाए ताकि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें।
ड्यूटी पर मौजूद टीम को दिए विशेष निर्देश
निरीक्षण के दौरान एक गर्भवती महिला प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थी। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद एएनएम और स्टाफ नर्स से बातचीत कर मरीज की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि महिला को तत्काल आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और प्रसव की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाए।
उन्होंने कहा कि प्रसव सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक गर्भवती महिला को सम्मानजनक एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
अधिक संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर दिया जोर
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए लगातार जागरूक किया जाए। आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग की टीम को समन्वय के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने में संस्थागत प्रसव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का प्रभावी माध्यम है।
दवाओं और उपचार व्यवस्था की भी हुई समीक्षा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल में उपलब्ध दवाओं, उपचार व्यवस्था तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित रहे और मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की नौबत न आए।
उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि प्रत्येक मरीज के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। मरीजों की संतुष्टि को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण मानक बताते हुए उन्होंने सभी कर्मचारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सलाह दी।
समय पर ड्यूटी और जिम्मेदारी निभाने के निर्देश
जिलाधिकारी ने अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को निर्धारित समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहने तथा अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं ऐसा क्षेत्र है जहां समय की महत्ता सबसे अधिक होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही मरीजों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से पालन करें।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की उपस्थिति की ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की उपस्थिति के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी दिन में अपनी निर्धारित ड्यूटी पूरी कर चुके थे। निरीक्षण के समय ड्यूटी पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार पांडेय सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे, जिन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी जिलाधिकारी को दी।
स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
जिलाधिकारी ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचाना है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे।
रात्रिकालीन निरीक्षण से बढ़ेगी जवाबदेही
जिलाधिकारी का देर रात किया गया यह औचक निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अस्पतालों में किसी भी समय व्यवस्थाओं की जांच की जा सकती है। ऐसे निरीक्षणों से स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। देर रात किए गए इस निरीक्षण में मातृ स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, दवा उपलब्धता, ड्यूटी व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार जैसे मुद्दों पर दिए गए निर्देश भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

























