सीतापुर

मोहर्रम पर सीतापुर में गूंजा इंसानियत और भाईचारे का संदेश, कई क्षेत्रों में निकले ताजिया जुलूस

मानपुर, बेलगवां और आलमनगर में श्रद्धा, मातम और सौहार्द के बीच संपन्न हुए मोहर्रम के आयोजन

सीतापुर में मोहर्रम के अवसर पर मानपुर, बेलगवां और आलमनगर सहित कई क्षेत्रों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए अकीदतमंदों ने मातमी रस्में अदा कीं। इस दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता, गंगा-जमुनी तहजीब, लंगर वितरण, कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी और शांतिपूर्ण माहौल ने सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। पुलिस प्रशासन की निगरानी में सभी आयोजन सकुशल संपन्न हुए।

रिपोर्ट: रीतेश कुमार गुप्ता

सीतापुर जनपद में मोहर्रम की दसवीं तारीख पर शुक्रवार को श्रद्धा, आस्था और गम के माहौल में विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए। मानपुर क्षेत्र से लेकर एलिया विकास खंड के बेलगवां गांव तथा शहर के आलमनगर मोहल्ले तक अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए मातमी रस्में अदा कीं। पूरे दिन “या हुसैन” की सदाओं से वातावरण गूंजता रहा, जबकि शाम को ताजियों को पूरे सम्मान और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

मोहर्रम के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की ऐसी मिसाल भी सामने आई, जिसने लोगों के बीच एकता और भाईचारे का संदेश मजबूत किया।

मानपुर क्षेत्र में पारंपरिक अंदाज में निकला ताजिया जुलूस

मानपुर क्षेत्र के सरैया सानी चौराहे पर मोहर्रम की दसवीं तारीख को पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में सरैया सानी, पकरिया, कैमहरा, सिपाह सहित आसपास के कई गांवों के अकीदतमंद शामिल हुए। मातमी माहौल में लोग “या हुसैन” के नारों के साथ जुलूस में शामिल रहे और पूरे गांव में ताजियों का भ्रमण कराया गया। बाद में धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजियों को कर्बला स्थल पर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। मानपुर थाना पुलिस पूरे समय मुस्तैद रही। दारोगा कबीर खान के नेतृत्व में पुलिस बल ने जुलूस की निगरानी की। उनके साथ आरक्षी शुभम पाल, अभिषेक, विनीत तथा महिला आरक्षी निदा परवीन सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

पकरिया गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी तस्वीर

मोहर्रम के अवसर पर पकरिया गांव में सांप्रदायिक सौहार्द की प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। यहां हिंदू समुदाय के लोगों ने भी ताजिया जुलूस में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था की गई। कई लोगों ने बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सहायता करते हुए उन्हें सहारा दिया।

स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं। गांव में दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर यह संदेश दिया कि धार्मिक विविधता के बावजूद सामाजिक एकता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।

बेलगवां में कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी और दुआख्वानी का आयोजन

एलिया विकास खंड की ग्राम पंचायत बेलगवां में भी दसवीं मोहर्रम के अवसर पर श्रद्धापूर्वक ताजिया जुलूस निकाला गया। दिनभर इमाम चौकों और घरों में कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी तथा दुआख्वानी का आयोजन किया गया। लोगों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके जांनिसार साथियों के ईसाले सवाब के लिए विशेष दुआएं कीं।

शाम के समय गमगीन माहौल में ताजियों को कर्बला ले जाया गया, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस वर्ष गांव में नए कर्बला स्थल पर ताजियों को दफनाया गया। नया मार्ग होने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

कर्बला परिसर में एक छोटे मेले का भी आयोजन किया गया, जहां बच्चों ने झूले और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आनंद लिया। धार्मिक वातावरण के बीच मेले ने आयोजन में सामाजिक सहभागिता का भी रंग भर दिया।

आलमनगर में मजलिस के बाद निकला ताजिया जुलूस

सीतापुर शहर के आलमनगर स्थित मस्जिद से भी मोहर्रम का जुलूस पूरे धार्मिक अनुशासन के साथ निकाला गया। जुमे की नमाज के बाद आयोजित मजलिस में उलेमा ने कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सत्य, सब्र और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का अमर संदेश है।

उलेमा ने लोगों से अपील की कि वे कर्बला के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में न्याय, भाईचारा तथा मानवता की भावना को मजबूत करें। मजलिस के बाद ताजिया जुलूस निकाला गया और परंपरागत रीति से कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान अकीदतमंदों के बीच लंगर का भी वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

सीतापुर की गंगा-जमुनी तहजीब बनी मिसाल

मोहर्रम के अवसर पर पूरे सीतापुर जनपद में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में वर्षों से सभी धार्मिक पर्व आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना के साथ मनाए जाते हैं। चाहे हिंदू त्योहार हों या मुस्लिम पर्व, दोनों समुदाय एक-दूसरे के आयोजनों में सहयोग करते हैं। यही गंगा-जमुनी तहजीब सीतापुर की सबसे बड़ी पहचान है।

इस वर्ष भी मोहर्रम के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दिया। लोगों का मानना है कि देश के अन्य क्षेत्रों को भी इस परंपरा से प्रेरणा लेकर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।

मोहर्रम के सभी कार्यक्रम प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। धार्मिक आस्था, इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक समरसता का यह दृश्य पूरे जिले के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर सामने आया।

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