करें योग, रहें निरोग: जी.एम. एकेडमी सलेमपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश
प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी बोले— योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार
देवरिया के सलेमपुर स्थित जीएम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। योग प्रशिक्षक वेदप्रकाश के मार्गदर्शन में शिक्षकों और कर्मचारियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और अनुशासित जीवन का आधार है। कार्यक्रम में योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
रिपोर्ट: इरफान अली लारी
सलेमपुर (देवरिया)। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को सलेमपुर नगर पंचायत स्थित जी.एम. एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अनूठा वातावरण देखने को मिला। विद्यालय परिसर में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में शिक्षकों, शिक्षिकाओं और विद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच का संदेश भी दिया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि योग आज केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाली एक संपूर्ण जीवन पद्धति बन चुका है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
योग प्रशिक्षक के निर्देशन में हुआ सामूहिक योगाभ्यास
योग दिवस कार्यक्रम में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, खामपार से आए योग प्रशिक्षक वेदप्रकाश ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को विभिन्न योग मुद्राओं, शारीरिक व्यायामों और प्राणायाम की विधियों का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत सूक्ष्म व्यायामों से हुई, जिसमें शरीर को योग के लिए तैयार करने हेतु हाथ, कमर और घुटनों से संबंधित विभिन्न गतिविधियां कराई गईं। इसके बाद प्रतिभागियों ने खड़े होकर किए जाने वाले योगासनों का अभ्यास किया। प्रशिक्षक ने प्रत्येक आसन की विधि और उसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों की विस्तृत जानकारी भी दी।
योगाभ्यास के दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, अर्धचक्रासन, अर्धउष्ट्रासन और उत्तानासन जैसे आसनों का प्रदर्शन किया गया। वहीं बैठकर किए जाने वाले योगासनों में गोमुखासन, वक्रासन, पद्मासन, दंडासन, भद्रासन, वज्रासन और शशकासन का अभ्यास कराया गया।
प्राणायाम और ध्यान ने दिया मानसिक शांति का संदेश
योग कार्यक्रम में केवल शारीरिक आसनों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व दिया गया। प्रतिभागियों ने गहरी श्वास लेने की प्रक्रिया, कपालभाति, अग्निसार क्रिया, नाड़ी शोधन प्राणायाम, अनुलोम-विलोम तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सामूहिक रूप से ‘ॐ’ का उच्चारण किया गया, जिससे पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ। योग प्रशिक्षक ने बताया कि नियमित प्राणायाम और ध्यान व्यक्ति के मानसिक तनाव को कम करते हैं तथा मन को एकाग्र और शांत बनाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वैश्विक पहचान मिली योग को
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस के इतिहास और महत्व पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और प्रयासों के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की थी।
आज योग केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया के सैकड़ों देशों में स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए इसे अपनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी योग को स्वास्थ्य, संतुलन और समग्र कल्याण का प्रभावी माध्यम माना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती भागदौड़, तनाव और असंतुलित दिनचर्या के बीच योग एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।
योग जीवन जीने की कला है: मोहन द्विवेदी
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने योग दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासित और संतुलित बनाने की कला भी सिखाता है।
उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस, सत्यनिष्ठा, आत्म-संयम और सकारात्मक सोच का विकास होता है। योग व्यक्ति को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि उसे मानसिक रूप से भी दृढ़ बनाता है।
प्रधानाचार्य ने कहा कि यदि बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक अवस्था से ही योग की शिक्षा दी जाए तो वे भविष्य में बेहतर नागरिक बन सकते हैं। विद्यालयों में योग का नियमित अभ्यास विद्यार्थियों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति और शारीरिक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
योग प्रशिक्षक ने बताए योग के लाभ और आवश्यक सावधानियां
योग प्रशिक्षक वेदप्रकाश ने योग के अनेक लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, रक्त संचार बेहतर होता है और मानसिक तनाव कम होता है। इसके अलावा योग व्यक्ति को ऊर्जावान बनाए रखता है तथा जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।
उन्होंने योग करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की भी सलाह दी। उनके अनुसार योग करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। किसी भी आसन को जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि योग हमेशा खाली पेट या भोजन के कुछ समय बाद करना चाहिए। इसके लिए स्वच्छ और शांत वातावरण का चयन करना चाहिए। सुबह का समय योगाभ्यास के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि उस समय वातावरण अपेक्षाकृत शुद्ध और शांत होता है।
स्वस्थ समाज निर्माण में योग की अहम भूमिका
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और कर्मचारियों ने माना कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण अनेक स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि योग को आज दुनिया भर में स्वास्थ्य संरक्षण के सबसे प्रभावी तरीकों में गिना जा रहा है।
दैनिक जीवन में योग अपनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और इसके लाभों को समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। विद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने योग को स्वस्थ जीवन की कुंजी बताते हुए नियमित अभ्यास करने का संदेश दिया और इसी संकल्प के साथ अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान किया।
योग दिवस पर जी.एम. एकेडमी सलेमपुर का यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि इसने विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के लोगों को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया।







