20 अक्टूबर 2026 12:21 अपराह्न

ठेले पर खीरा-तरबूज बेचने से ‘योगी धर्मेश्वर’ बनने तक : संघर्ष, साधना और सेवा की प्रेरक कहानी

योगी धर्मेश्वर के जीवन संघर्ष, योग साधना और समाजसेवा को दर्शाती फीचर इमेज, जिसमें योग प्रशिक्षण, ध्यान, पौधरोपण और रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर शामिल है।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया/गोरखपुर। जीवन में सफलता पाने के लिए केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण की आवश्यकता होती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं कुशीनगर जनपद के ग्राम कुचिया मठ निवासी धर्मेंद्र प्रजापति, जिन्हें आज लोग सम्मानपूर्वक ‘योगी धर्मेश्वर’ के नाम से जानते हैं। कभी मेलों में गुब्बारे बेचने, अंडे का व्यवसाय करने और ठेले पर खीरा, ककड़ी तथा तरबूज बेचकर परिवार का सहयोग करने वाले धर्मेंद्र आज हजारों लोगों को योग और स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं।

उनका जीवन संघर्षों, चुनौतियों और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी है, जो यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति की मंजिल को नहीं रोक सकतीं, यदि उसके भीतर आगे बढ़ने का जुनून हो।

गंभीर बीमारियों ने बदल दी जीवन की दिशा

धर्मेंद्र प्रजापति एक सामान्य परिवार से आते हैं। जीवन के शुरुआती वर्षों में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और दो बार मृत्यु के मुहाने तक पहुंचने जैसी घटनाओं ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। इन्हीं परिस्थितियों के बीच योग उनके जीवन में एक नई आशा बनकर आया।

योग का अभ्यास शुरू करने के बाद उन्होंने अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन महसूस किया। इसी अनुभव ने उनके भीतर यह विश्वास पैदा किया कि यदि योग उनके जीवन को बदल सकता है, तो यह लाखों लोगों के जीवन में भी नई ऊर्जा भर सकता है। यहीं से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ।

हरिद्वार के शिविर से मिली नई प्रेरणा

धर्मेंद्र के बड़े भाई ने उन्हें हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ के विद्यार्थी संस्कार शिविर के बारे में जानकारी दी। पांच दिवसीय इस शिविर में उन्हें योग, अध्यात्म और जीवन मूल्यों का गहन अनुभव प्राप्त हुआ।

स्वामी रामदेव महाराज के मार्गदर्शन और योग साधना से मिली प्रेरणा ने उनके विचारों को नई दिशा दी। शिविर से लौटने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि वे अपने जीवन को योग और समाजसेवा के लिए समर्पित करेंगे। इसके बाद उन्होंने अपने गांव से ही योग जागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी।

उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, राजस्थान और हरियाणा तक पहुंचा योग संदेश

योगी धर्मेश्वर ने केवल अपने गांव या जिले तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 27 जनपदों के अलावा बिहार की राजधानी पटना, राजस्थान के श्रीगंगानगर और हरियाणा के गुरुग्राम सहित विभिन्न क्षेत्रों में निशुल्क योग एवं आयुर्वेद शिविर आयोजित किए।

इन शिविरों के माध्यम से उन्होंने हजारों लोगों को योग, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी विशेषता यह रही कि उन्होंने सेवा को कभी व्यवसाय नहीं बनाया, बल्कि जनकल्याण का माध्यम माना।

ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होती है सेवा की दिनचर्या

पिछले चार वर्षों से गोरखपुर में संचालित ‘ओम फिटनेस योग संस्थान’ के माध्यम से योगी धर्मेश्वर प्रतिदिन विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर योग कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।

उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित है। वे प्रतिदिन रात समाप्त होने से पहले ही जाग जाते हैं और लगभग ढाई बजे उठकर तीन बजे घर से निकल पड़ते हैं। सुबह चार बजे से योग प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू हो जाता है। मौसम की विपरीत परिस्थितियां भी उनकी सेवा भावना को प्रभावित नहीं कर पातीं।

दस हजार से अधिक योग कक्षाएं, सैकड़ों शिविर

योगी धर्मेश्वर की सेवा यात्रा का दायरा लगातार बढ़ता गया। अब तक वे सैकड़ों निशुल्क योग शिविर आयोजित कर चुके हैं। इसके अलावा 150 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में योग, स्वास्थ्य और जीवनशैली पर व्याख्यान दे चुके हैं।

पिछले आठ वर्षों में उन्होंने दस हजार से अधिक योग कक्षाओं का संचालन किया है। इतना ही नहीं, उनके मार्गदर्शन में अनेक युवा प्रशिक्षित होकर योग शिक्षक बने हैं और योग के क्षेत्र में रोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं।

‘योगी धर्मेश्वर’ की उपाधि से हुआ सम्मानित

योग और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 25 दिसंबर 2024 को उन्हें एक विशेष सम्मान मिला। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में पूज्य स्वामी अर्जुनानंद जी ने धर्मेंद्र प्रजापति को ‘योगी धर्मेश्वर’ की उपाधि प्रदान की।

इसके बाद से वे व्यापक रूप से इसी नाम से पहचाने जाने लगे। यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, तपस्या और सेवा कार्यों की सार्वजनिक मान्यता माना जाता है।

सेवा साथी फाउंडेशन के माध्यम से समाजसेवा

योगी धर्मेश्वर का मानना है कि मानव जीवन केवल भौतिक सुखों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलित मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

उनकी अधिकांश गतिविधियां निशुल्क हैं। समाज के सहयोग और दान से संचालित यह मिशन अब ‘सेवा साथी फाउंडेशन’ के रूप में विकसित हो चुका है। संस्था के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता, योग प्रशिक्षण और सामाजिक सहयोग के अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

योग के साथ पर्यावरण और रक्तदान अभियान

योगी धर्मेश्वर केवल योग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं। वे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अब तक वे लगभग दो हजार से अधिक पौधों का वितरण और रोपण करा चुके हैं।

इसके साथ ही समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन, गरीब और असहाय परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग तथा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता भी उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गोरखपुर को स्वास्थ्य और स्वच्छता का मॉडल शहर बनाने का सपना

योगी धर्मेश्वर का सबसे बड़ा सपना गोरखपुर को स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श शहर के रूप में विकसित करना है। उनका मानना है कि यदि लोग नियमित योग और आयुर्वेद को अपनाएं तो दवाइयों पर निर्भरता काफी हद तक कम की जा सकती है।

वे चाहते हैं कि आने वाले समय में गोरखपुर में रोगियों की संख्या कम और योग साधकों की संख्या अधिक दिखाई दे। उनका सपना यह भी है कि भविष्य में देश-विदेश से लोग गोरखपुर आकर योग विद्या का अध्ययन करें और यहां से सीखकर अपने क्षेत्रों में उसका प्रसार करें।

संघर्ष से सफलता तक का संदेश

एम.कॉम., बी.एड., एम.ए. (योग), एन.डी. और डी.एन.वाई.एस. जैसी शैक्षिक योग्यताओं से संपन्न योगी धर्मेश्वर आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें सफलता की सीढ़ी बना लिया।

उनका संदेश स्पष्ट है— “रोगी कम, भोगी कम और योगी अधिक हों। स्वस्थ, संस्कारित और समृद्ध समाज का निर्माण ही हमारा लक्ष्य है।”

आज गोरखपुर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित योग कक्षाओं के माध्यम से वे लोगों को न केवल स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं, बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। उनकी जीवन यात्रा यह बताती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो ठेले पर सामान बेचने वाला व्यक्ति भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें