‘बदतमीजी की भी एक सीमा होती है’, मंत्री ए.के. शर्मा पर भड़के सांसद राजीव राय, रेलवे कार्यक्रम में विवाद से गरमाई सियासत
मऊ जंक्शन के उद्घाटन समारोह में मंत्री की टिप्पणी पर नाराज हुए सांसद, महिलाओं के अपमान और अपराधियों की मौजूदगी के भी लगाए आरोप
जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट
मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में आयोजित रेलवे परियोजना के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा के बीच शुरू हुआ विवाद समारोह समाप्त होने के बाद भी चर्चा का विषय बना रहा। मंत्री की एक टिप्पणी पर नाराज हुए सांसद राजीव राय ने न केवल कार्यक्रम के दौरान आपत्ति दर्ज कराई, बल्कि बाद में मीडिया से बातचीत में भी मंत्री पर तीखा हमला बोला।
सांसद ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित कर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा की गई टिप्पणी न केवल उनके सम्मान के खिलाफ थी, बल्कि कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और आम नागरिकों की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाली थी।
क्या था पूरा मामला?
शुक्रवार को मऊ जंक्शन पर रेलवे से जुड़ी विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान कुछ समर्थक नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच मंत्री ए.के. शर्मा ने मंच से कहा कि अपनी ऊर्जा बचाकर रखिए, क्योंकि यदि कोई आपके प्लॉट या जमीन पर कब्जा कर ले तो यही ऊर्जा वहां काम आएगी। मंत्री की इस टिप्पणी को सुनते ही कार्यक्रम का माहौल बदल गया और घोसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजीव राय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
बताया जा रहा है कि सांसद तत्काल मंच पर खड़े हो गए और रेलवे अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों को इस तरह की टिप्पणी सुनाना अनुचित है।
‘हमें मंच पर बुलाकर किया गया अपमान’
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद राजीव राय ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में सम्मान देने के नाम पर बुलाया गया था, लेकिन वहां उनकी सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की गई। उन्होंने मंत्री की टिप्पणी को अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह बदतमीजी की पराकाष्ठा है।
राजीव राय ने कहा कि एक सांसद होने के नाते उन्होंने हमेशा लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया है और सभी का सम्मान किया है, लेकिन बदले में उन्हें अपमानजनक टिप्पणियां सुनने को मिलीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया तो राजनीतिक जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा।
महिलाओं के सम्मान का भी उठाया मुद्दा
सांसद ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं का भी अपमान किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे प्रमाण मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि समारोह के दौरान महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
राजीव राय ने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। यदि किसी मंच से ऐसी बातें कही जाती हैं जिससे महिलाओं की भावनाएं आहत होती हैं, तो संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
कार्यक्रम में अपराधियों की मौजूदगी का आरोप
विवाद को और गंभीर बनाते हुए सांसद ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर कुछ ऐसे लोग मौजूद थे जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में कुछ गुंडे और हिस्ट्रीशीटर किस्म के लोगों को शामिल किया गया था।
राजीव राय के अनुसार, इन लोगों की मौजूदगी पुलिस प्रशासन की जानकारी और सहयोग से संभव हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी कार्यक्रमों में ऐसे व्यक्तियों को क्यों प्रवेश दिया गया। सांसद ने कहा कि पुलिस प्रशासन को इस संबंध में जवाब देना चाहिए कि क्या विकास कार्यों के उद्घाटन समारोह अपराधियों की मौजूदगी में आयोजित किए जाएंगे।
प्रशासन पर भी उठाए सवाल
सांसद ने दावा किया कि कार्यक्रम से पहले जिला प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने उन्हें आश्वस्त किया था कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी।
राजीव राय ने यह भी बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एडीजी पीयूष मोर्डिया ने स्वयं उनसे बातचीत कर यह भरोसा दिया था कि कार्यक्रम में बाहरी और विवादास्पद तत्वों को प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर आपराधिक छवि वाले लोगों की मौजूदगी प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े करती है।
जमीन कब्जाने के आरोपों को किया खारिज
मंत्री की टिप्पणी को जमीन कब्जाने के आरोपों से जोड़ते हुए सांसद ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे ऐसे किसी भी आरोप का कोई आधार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी ने कब्जा किया है तो वह विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के लोग हैं।
राजीव राय ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। उन्होंने मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग स्वयं विवादों में घिरे रहते हैं, वे दूसरों पर उंगली उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
रेलवे उद्घाटन कार्यक्रम में हुआ यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे जनप्रतिनिधियों और महिलाओं के सम्मान से जोड़कर मुद्दा बना रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए इस तरह के विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल मऊ में रेलवे कार्यक्रम के दौरान हुई यह घटना प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का केंद्र बन गई है।







