खत्म हो गई थी जिस फसल की पहचान, अब वही बनेगी कमाई का जरिया!
फिर लौटेगा श्री अन्न का दौर, किसानों को मुफ्त बीज और बाजार दोनों देगा प्रशासन
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
बुंदेलखंड की सूखी धरती पर कभी ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी और काकुन जैसी फसलें किसानों की जिंदगी का सहारा हुआ करती थीं। यही मोटे अनाज यहां के खेतों की पहचान थे और ग्रामीण रसोई का अहम हिस्सा भी। लेकिन समय बदला, खेती के तौर-तरीके बदले और किसानों ने गेहूं व धान जैसी फसलों की ओर रुख कर लिया। धीरे-धीरे श्री अन्न की खेती खेतों से गायब होती चली गई।
अब वर्षों बाद वही फसलें फिर चर्चा में हैं, जिन्हें कभी पिछड़ेपन की खेती समझकर छोड़ दिया गया था। चित्रकूट प्रशासन और कृषि विभाग ने जिले में मोटे अनाज की खेती को दोबारा बढ़ावा देने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। किसानों को मुफ्त बीज दिए जाएंगे, खेती की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी और बाजार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में यही श्री अन्न किसानों की कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है।
बुंदेलखंड की पुरानी पहचान था श्री अन्न
चित्रकूट समेत पूरा बुंदेलखंड इलाका लंबे समय तक कम बारिश और जल संकट से जूझता रहा है। ऐसे हालात में यहां के किसान सदियों से उन फसलों की खेती करते थे जिन्हें कम पानी की जरूरत पड़ती थी। ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और कुटकी जैसी फसलें यहां की जलवायु के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती थीं।
इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि सूखे जैसी परिस्थितियों में भी इनका उत्पादन पूरी तरह प्रभावित नहीं होता था। कम लागत में किसान अच्छी पैदावार ले लेते थे और परिवार की जरूरतें भी पूरी हो जाती थीं। गांवों में मोटे अनाज से बनी रोटियां और अन्य पारंपरिक व्यंजन आम बात हुआ करते थे।
लेकिन सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और सरकारी नीतियों में गेहूं-धान को ज्यादा महत्व मिलने के कारण किसानों का रुझान धीरे-धीरे बदल गया। नतीजा यह हुआ कि खेतों से श्री अन्न लगभग गायब हो गया।
अब फिर बदलेगी खेती की तस्वीर
बदलती जलवायु और लगातार बढ़ते जल संकट ने अब सरकार और कृषि वैज्ञानिकों को फिर से मोटे अनाज की ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में कम पानी वाली खेती ही टिकाऊ कृषि का आधार बनेगी।
इसी सोच के तहत चित्रकूट प्रशासन ने जिले में श्री अन्न को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। कृषि विभाग का कहना है कि यह केवल पारंपरिक खेती को वापस लाने की पहल नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति भी है।
किसानों को मुफ्त मिलेंगे बीज
कृषि विभाग ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना लागू की है। इसके तहत ज्वार, बाजरा, कोदो, रागी, काकुन और कुटकी जैसी फसलों के बीज किसानों को मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए किसानों को उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग सीधे किसानों तक बीज पहुंचाएगा। साथ ही कृषि विशेषज्ञ किसानों को यह भी सिखाएंगे कि कम पानी और कम लागत में इन फसलों से बेहतर उत्पादन कैसे लिया जा सकता है।
विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे ताकि मोटे अनाज की खेती लाभकारी बन सके। विभाग का मानना है कि यदि किसान सही तरीके से खेती करें तो कम लागत में अच्छी कमाई संभव है।
कम पानी में ज्यादा फायदा
चित्रकूट जैसे इलाकों में पानी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए राहत का रास्ता बन सकती है। ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलें कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देती हैं। यही वजह है कि इन्हें जलवायु परिवर्तन के दौर की सबसे सुरक्षित खेती माना जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जहां गेहूं और धान की खेती में ज्यादा पानी और लागत लगती है, वहीं श्री अन्न की फसलें कम संसाधनों में भी किसानों को बेहतर मुनाफा दे सकती हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
सेहत और बाजार दोनों में बढ़ी मांग
बीते कुछ वर्षों में लोगों के खानपान में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब लोग स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और पौष्टिक भोजन की मांग तेजी से बढ़ रही है। मोटे अनाज को पोषण का खजाना माना जाता है। इनमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। डॉक्टर भी मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याओं से बचाव के लिए इन्हें भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं।
यही कारण है कि बाजार में अब श्री अन्न की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि किसानों को सही बाजार मिला तो मोटे अनाज की खेती उनके लिए बड़ा आर्थिक अवसर बन सकती है।
होटल और सरकारी कार्यक्रमों में परोसा जाएगा श्री अन्न
श्री अन्न को लोकप्रिय बनाने के लिए जिला प्रशासन ने स्थानीय होटल संचालकों और भोजनालयों से भी अपील की है कि वे अपने मेनू में मोटे अनाज से बने व्यंजन शामिल करें। इसके अलावा प्रशासन ने सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी श्री अन्न से बने खाद्य पदार्थ परोसने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर इन फसलों की मांग बढ़ाना है ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। प्रशासन को उम्मीद है कि जब लोगों की थाली में दोबारा बाजरा, रागी और कोदो जैसे अनाज लौटेंगे, तब किसान भी बड़े स्तर पर इनकी खेती के लिए प्रेरित होंगे।
किसानों के लिए नई उम्मीद
चित्रकूट में शुरू हुई यह पहल किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। लंबे समय से सूखा, महंगी खेती और कम मुनाफे की मार झेल रहे किसानों को अब कम लागत वाली खेती का विकल्प मिल रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि यह अभियान सफल रहा तो चित्रकूट एक बार फिर श्री अन्न की खेती के लिए जाना जाएगा। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि बुंदेलखंड की पारंपरिक कृषि संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी। जिस फसल को कभी लोग पिछड़ी खेती मानकर भूल चुके थे, अब वही फसल किसानों की कमाई और भविष्य की सबसे मजबूत उम्मीद बनती नजर आ रही है।






