जौनपुर

आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से भारी तबाही, 72 गांवों की बिली गुल ; मछलीशहर से जंघई तक पेड़ गिरे, सड़कें बंद; कई घरों के टीन शेड उड़े

राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट

जौनपुर में बुधवार की शाम मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदली कि पूरे जिले में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दिनभर भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को जहां शुरुआत में मौसम बदलने से राहत की उम्मीद जगी, वहीं कुछ ही देर में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया, दर्जनों गांव अंधेरे में डूब गए और ग्रामीण इलाकों में भारी नुकसान की खबरें सामने आने लगीं।

दोपहर तक जिले का अधिकतम तापमान करीब 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। गर्म हवाओं और चिलचिलाती धूप ने लोगों को बेहाल कर रखा था। लेकिन शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। कुछ क्षेत्रों में ओले भी गिरे, जिससे किसानों और ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई। मौसम में आए इस बदलाव के चलते तापमान तेजी से गिरकर करीब 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

मछलीशहर और भदोही बॉर्डर के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित

सबसे ज्यादा असर मछलीशहर तहसील और भदोही सीमा से जुड़े इलाकों में देखने को मिला। तेज बवंडर और आंधी ने कई गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया। मीरगंज, जरौना, गोधना, बंधवा बाजार और जंघई क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक चली तेज आंधी ने लोगों के घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया। कई मकानों की टीन शेड हवा में उड़ गईं, जबकि कमजोर निर्माण वाले घरों की दीवारों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।

ग्रामीणों के मुताबिक, अचानक उठी धूल भरी आंधी इतनी तेज थी कि लोगों को कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया। बाजारों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

प्रमुख सड़कों पर गिरे पेड़, यातायात पूरी तरह प्रभावित

आंधी के दौरान कई बड़े और पुराने पेड़ धराशायी हो गए। इसका सबसे ज्यादा असर मछलीशहर-वाराणसी हाईवे पर देखने को मिला, जहां कई स्थानों पर पेड़ गिरने से लंबा जाम लग गया। इसके अलावा मोलनापुर से जंघई मार्ग, गोधना-जरौना सड़क और बंधवा बाजार-भटहर मार्ग पर भी पेड़ गिरने के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचना देकर पेड़ हटाने की मांग की, लेकिन तेज बारिश और खराब मौसम के कारण राहत कार्य में भी परेशानी आई। कई वाहन चालक घंटों सड़क पर फंसे रहे। ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

सवैया गांव में पेड़ गिरने से बछड़ा घायल

तेज आंधी के दौरान कई गांवों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं सामने आईं। सवैया गांव में अशोक यादव के घर के पास खड़ा एक पुराना नीम का पेड़ अचानक गिर पड़ा। पेड़ के नीचे बंधा बछड़ा उसकी चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने किसी तरह पेड़ हटाकर घायल पशु को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उस समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

बिजली व्यवस्था ध्वस्त, 72 गांव अंधेरे में डूबे

आंधी और बारिश का सबसे ज्यादा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा। तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ों की डालियां हाईटेंशन और एलटी लाइनों पर गिर गईं। इससे कई बिजली के खंभे टूट गए और तार क्षतिग्रस्त हो गए।

सुजानगंज बाईपास क्षेत्र में बिजली के पोल उखड़ जाने से आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। जंघई और गोपालापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 72 से अधिक गांवों में रातभर अंधेरा छाया रहा। बिजली कटने के कारण लोगों को पेयजल संकट और मोबाइल नेटवर्क जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा।

ग्रामीण इलाकों में इनवर्टर और बैटरियां जवाब देने लगीं, जबकि छोटे कारोबारियों का काम भी प्रभावित हुआ। गर्मी और उमस के बीच बिजली गुल होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

बिजली विभाग ने सुरक्षा के लिहाज से काटी सप्लाई

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार आंधी के कारण व्यापक नुकसान हुआ है। विभागीय कर्मचारियों को कई स्थानों पर तार टूटने और पोल गिरने की जानकारी मिली है। सुरक्षा कारणों से प्रभावित क्षेत्रों की बिजली सप्लाई तत्काल बंद कर दी गई ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।

बिजली निगम के एसडीओ आदित्य मारकंडे ने बताया कि तूफान की वजह से विद्युत व्यवस्था को भारी क्षति पहुंची है। विभाग की टीमें लगातार नुकसान का आकलन करने और मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त खंभों और तारों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन हालात गंभीर हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य होने में समय लग सकता है और अगले 48 घंटों तक कई गांवों में बिजली बहाल होने की संभावना कम है।

किसानों और ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। हालांकि कई क्षेत्रों में फसल कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन सब्जियों और बागवानी से जुड़े किसानों को नुकसान की आशंका सताने लगी है। तेज हवाओं के कारण कई खेतों में केले और अन्य कमजोर पौधे गिर गए।

ग्रामीणों का कहना है कि मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने लोगों को डरा दिया है। पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही थी, लेकिन अचानक आई आंधी ने हालात बिगाड़ दिए। कई परिवार रातभर जागकर अपने घरों और सामान की सुरक्षा में लगे रहे।

प्रशासन अलर्ट, राहत कार्य जारी

मौसम खराब होने के बाद प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क से पेड़ हटाने का काम शुरू किया गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और बिजली के टूटे तारों से दूर रहने की अपील की है।

जिले में मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अगले कुछ घंटों में फिर मौसम बिगड़ता है तो राहत और बचाव कार्य और तेज किए जाएंगे।

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