चित्रकूट

इंटर रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप से मचा हड़कंप, एक साथ 150 छात्र कैसे हो गये फेल ❓उठ रहे हैं सवाल

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में छात्रों के असफल होने से नाराज छात्र-छात्राओं ने परिणाम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हें सुनियोजित तरीके से कम अंक देकर फेल किया गया है। यही वजह है कि अब मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन तक पहुंच गया है।

करीब डेढ़ सौ छात्रों के एक साथ फेल होने से न सिर्फ विद्यालय प्रशासन बल्कि अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल है। छात्र लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनकी परीक्षा अच्छी हुई थी और उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन परिणाम चौंकाने वाला आया।

परिणाम आते ही छात्रों में बढ़ा आक्रोश

इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम सामने आते ही छात्रों के बीच बेचैनी फैल गई। कई छात्र ऐसे थे जिन्हें अपने विषयों में अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन रिजल्ट में वे फेल घोषित कर दिए गए। सबसे अधिक हैरानी विज्ञान वर्ग के छात्रों को हुई, क्योंकि फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ जैसे विषयों में बड़ी संख्या में छात्रों को बेहद कम अंक मिले।

छात्रों का आरोप है कि कई विद्यार्थियों को तीनों विषयों में लगभग समान अंक दिए गए हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षमता और प्रदर्शन वाले छात्रों को एक जैसा अंक मिलना सामान्य नहीं माना जा सकता। इसी कारण छात्रों को पूरे मूल्यांकन प्रक्रिया पर संदेह होने लगा।

रिजल्ट के बाद नाराज छात्र-छात्राएं एकजुट होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने कहा कि यह केवल परीक्षा परिणाम का मामला नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और करियर का सवाल है।

पुराने विवाद से जोड़ रहे छात्र

इस पूरे विवाद को छात्र कुछ महीने पहले हुई एक दुखद घटना से जोड़कर देख रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जिस विद्यालय में उनका परीक्षा केंद्र बनाया गया था, वहां पहले दो छात्रों के बीच विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि साइकिल खड़ी करने को लेकर शुरू हुए इस विवाद में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।

अब छात्रों का आरोप है कि उसी घटना की वजह से परीक्षा मूल्यांकन में पक्षपात किया गया। छात्रों का दावा है कि उन्हें जानबूझकर कम अंक दिए गए ताकि बड़ी संख्या में छात्र असफल हो जाएं। हालांकि इस आरोप की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन छात्रों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है।

छात्रों का कहना है कि यदि निष्पक्ष तरीके से कॉपियों की जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। कई छात्र पुनर्मूल्यांकन और स्क्रूटनी की मांग कर रहे हैं।

विज्ञान वर्ग के परिणाम ने बढ़ाई चिंता

विद्यालय प्रशासन भी इस बार के परिणाम को लेकर असहज दिखाई दे रहा है। विद्यालय के प्रधानाचार्य राम कुमार ने स्वीकार किया कि इस बार इंटरमीडिएट के लगभग 50 प्रतिशत छात्र असफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक छात्र विज्ञान वर्ग में फेल हुए हैं, जो चिंता की बात है।

प्रधानाचार्य ने बताया कि कई छात्रों के अंक सामान्य पैटर्न से अलग दिखाई दे रहे हैं। खासकर विज्ञान विषयों में बड़ी संख्या में कम अंक आने से सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग और क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र भेजा है।

उन्होंने कहा कि यदि कहीं मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय न हो।

जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे छात्र

रिजल्ट से निराश छात्र-छात्राओं ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। बड़ी संख्या में छात्र जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वहां अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई।

छात्रों ने कहा कि उन्होंने पूरे वर्ष मेहनत की थी और परीक्षा भी अच्छे तरीके से दी थी। इसके बावजूद इतने कम अंक मिलना समझ से परे है। छात्रों ने मांग की कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और यदि मूल्यांकन में गलती पाई जाए तो उन्हें न्याय मिले।

कुछ अभिभावकों ने भी छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि अचानक इतने छात्रों का फेल होना सामान्य घटना नहीं हो सकती। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो बच्चों का पूरा साल बर्बाद हो सकता है।

शिक्षा विभाग ने दिया जांच का आश्वासन

विद्यालय प्रशासन के अनुसार, पूरे मामले की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक यानी DIOS को दे दी गई है। शिक्षा विभाग ने भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है।

अब छात्रों और अभिभावकों की उम्मीद शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। छात्र चाहते हैं कि उनकी कॉपियों की निष्पक्ष स्क्रूटनी कराई जाए और यदि कहीं गड़बड़ी हुई हो तो उसे सुधारा जाए।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्रों के अंक असामान्य दिखाई दें तो मामले की तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है। इससे न केवल छात्रों का भरोसा कायम रहता है बल्कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता भी बनी रहती है।

भविष्य को लेकर बढ़ी बेचैनी

एक साथ इतने छात्रों के असफल होने से विद्यालय में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। कई छात्र मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है।

कुछ छात्रों ने कहा कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इस परिणाम ने उनके आत्मविश्वास को झटका पहुंचाया है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है।

अभिभावकों का भी कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि छात्रों की शिकायत सही है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि मूल्यांकन सही हुआ है तो छात्रों को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

निष्पक्ष जांच से ही दूर होगा विवाद

फिलहाल पूरा मामला शिक्षा विभाग की जांच पर टिका हुआ है। छात्रों की मांग है कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल हो।

यह विवाद केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के लिए जरूरी हो गया है कि वह पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करे।

अब सभी की निगाहें आने वाली जांच रिपोर्ट और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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