विनेश फोगाट बनाम WFI : गोंडा टूर्नामेंट से रोके जाने पर फिर भड़की सियासत, बोलीं- “मुझे कुश्ती से हटाने की साज़िश चल रही”
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
भारतीय महिला कुश्ती की चर्चित पहलवान Vinesh Phogat और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के बीच विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट के दौरान बड़ा विवाद देखने को मिला, जब विनेश फोगाट को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने महासंघ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है ताकि वे कुश्ती से संन्यास लेने के लिए मजबूर हो जाएं।
गोंडा पहुंचीं विनेश फोगाट ने साफ कहा कि वह अभी कुश्ती छोड़ने वाली नहीं हैं और हर हाल में अपने खेल करियर को जारी रखेंगी। दूसरी ओर भारतीय कुश्ती महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विनेश कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देतीं और अनुशासन समिति कोई फैसला नहीं लेती, तब तक उन्हें किसी घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गोंडा पहुंचते ही बढ़ा विवाद
सोमवार को विनेश फोगाट गोंडा स्थित नंदिनी नगर पहुंचीं, जहां नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति मांगी। हालांकि महासंघ के अधिकारियों ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विनेश ने कहा कि उन्हें पहले कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है, लेकिन उन्हें जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त समय तक नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा कि नोटिस में 14 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है, लेकिन उससे पहले ही उन्हें दोषी मानते हुए प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। विनेश ने सवाल उठाया कि जब जांच पूरी ही नहीं हुई तो उन्हें पहले से दोषी कैसे माना जा सकता है।
“मुझे खेलने नहीं देना चाहते”
विनेश फोगाट ने WFI पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महासंघ उन्हें कुश्ती से बाहर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश हो रही है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि महासंघ चाहता है कि वह हार मान लें और संन्यास लेकर घर बैठ जाएं। लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल मेरिट के आधार पर खेलने का अवसर चाहिए, कोई विशेष सुविधा नहीं।
विनेश ने यह भी दावा किया कि उनके पास अपने पक्ष में सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें देखने तक से इनकार कर दिया।
WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने क्या कहा?
भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष Sanjay Singh ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विनेश फोगाट उनसे मिलने आई थीं और उन्होंने प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति मांगी थी। लेकिन महासंघ पहले ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है।
संजय सिंह ने कहा कि जब तक विनेश नोटिस का जवाब नहीं देतीं और अनुशासन समिति उस पर निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका निलंबन प्रभावी रहेगा। इसलिए उन्हें किसी घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विनेश ने मौखिक रूप से दावा किया कि वाडा के अनुसार सब कुछ सही है, लेकिन उन्होंने कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।
अयोध्या से गोंडा तक, “संन्यास नहीं लूंगी”
गोंडा जाने से पहले विनेश फोगाट अयोध्या पहुंचीं थीं। वहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि वह संन्यास लेने वाली नहीं हैं और गोंडा में होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने आई हैं।
उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से उनके भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। खासतौर पर पेरिस ओलंपिक के बाद उनके खेल करियर को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे।
विवाद की जड़ क्या है?
दरअसल पूरा विवाद एंटी-डोपिंग नियमों और “रिटायरमेंट से वापसी” से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर खड़ा हुआ है। भारतीय कुश्ती महासंघ का कहना है कि पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद विनेश फोगाट ने इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) को आधिकारिक रूप से अपने संन्यास की सूचना दी थी। इसके बाद अब जब वह दोबारा प्रतिस्पर्धा में लौटना चाहती हैं, तो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत उन्हें छह महीने की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी करनी होगी।
महासंघ का कहना है कि यह अवधि 26 जून 2026 तक पूरी नहीं होगी। इसलिए तब तक उन्हें घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
ITA और WADA का हवाला देकर विनेश ने किया पलटवार
विनेश फोगाट ने महासंघ के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) की ओर से लिखित अनुमति मिल चुकी है कि वह 1 जनवरी 2026 से प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा ले सकती हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि उन्हें गोंडा टूर्नामेंट के लिए रजिस्ट्रेशन की भी अनुमति दी गई थी। लेकिन जब वह प्रतियोगिता स्थल पहुंचीं तो उनका वेरिफिकेशन पूरा नहीं होने दिया गया और ट्रेनिंग हॉल का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने वास्तव में किसी नियम का उल्लंघन किया होता तो नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) या वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) उनके खिलाफ कार्रवाई करती।
“वेयरएबाउट मिस हुआ था, लेकिन क्लीन चिट मिल चुकी”
विनेश ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद और विधानसभा सत्र के दौरान उनका एक “वेयरएबाउट अपडेट” मिस हो गया था। यह एक तकनीकी चूक थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने वाडा से माफी भी मांगी थी और बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। उनके मुताबिक वाडा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह 1 जनवरी 2026 से दोबारा प्रतियोगिताओं में भाग ले सकती हैं।
WFI का 15 पन्नों का नोटिस
भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस करीब 15 पन्नों का बताया जा रहा है। इसमें विनेश फोगाट पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
महासंघ का कहना है कि पेरिस ओलंपिक के दौरान उनके आचरण से भारतीय कुश्ती की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। साथ ही उन पर WFI संविधान, यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के नियमों और एंटी-डोपिंग प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। महासंघ ने साफ किया है कि जब तक अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक विनेश किसी घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकतीं।
बृजभूषण विवाद के बाद नया राजनीतिक मोड़
इस पूरे विवाद का राजनीतिक और भावनात्मक पक्ष भी काफी चर्चा में है। विनेश फोगाट वही पहलवान हैं जिन्होंने पूर्व WFI अध्यक्ष Brij Bhushan Sharan Singh के खिलाफ चले आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
दिलचस्प बात यह है कि जिस गोंडा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की वह मांग कर रही हैं, उसका आयोजन उसी क्षेत्र में हो रहा है जो बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ खेल विवाद नहीं बल्कि राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है।
पेरिस ओलंपिक से शुरू हुई मुश्किलें
विनेश फोगाट के करियर में सबसे बड़ा झटका पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान लगा था, जब उन्हें महिलाओं की 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा के स्वर्ण पदक मुकाबले से ठीक पहले अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उस घटना के बाद से ही उनका खेल करियर लगातार विवादों और चुनौतियों से घिरा रहा। अब गोंडा विवाद ने एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
खेल बनाम राजनीति की नई बहस
इस पूरे मामले ने भारतीय खेल जगत में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नियमों का पालन सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू हो रहा है? क्या एक खिलाड़ी को जवाब देने का अवसर दिए बिना प्रतियोगिता से बाहर करना उचित है? और क्या खेल संस्थाओं में व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेद खिलाड़ियों के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं?
विनेश फोगाट लगातार यह दावा कर रही हैं कि उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है, जबकि महासंघ नियमों और अनुशासन का हवाला दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक बढ़ सकता है।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजर विनेश फोगाट के जवाब और WFI की अनुशासन समिति के फैसले पर टिकी हुई है। यदि विनेश तय समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण देती हैं तो संभव है कि मामले की समीक्षा की जाए। लेकिन फिलहाल महासंघ का रुख बेहद सख्त दिखाई दे रहा है। वहीं विनेश फोगाट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह लड़ाई जारी रखेंगी और कुश्ती से पीछे हटने वाली नहीं हैं। ऐसे में यह विवाद भारतीय कुश्ती के भविष्य और खेल प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।







