हरदोई

सोना नहीं खरीदने की अपील पर भाजपा विधायक का तंज! बोले- फिर एक साल तक शादियां भी रोक दीजिए

प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर हरदोई के भाजपा विधायक श्याम प्रकाश की टिप्पणी से मचा सियासी घमासान

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट

लखनऊ/हरदोई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से एक साल तक सोने के गहनों की खरीदारी से बचने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। हरदोई जिले की गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छेड़ दी। विधायक ने हिंदू विवाह परंपरा और मंगलसूत्र का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि लोग सोना खरीदना बंद कर दें, तो फिर शादियां कैसे होंगी।

विधायक का यह बयान सामने आते ही विपक्ष को भाजपा पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। हालांकि विवाद बढ़ता देख विधायक ने बाद में अपनी पोस्ट डिलीट कर दी, लेकिन तब तक उसके स्क्रीनशॉट वायरल हो चुके थे।

पीएम मोदी की अपील पर विधायक ने उठाए सवाल

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोने के गहनों की खरीदारी से बचें। प्रधानमंत्री ने इसे देशहित और आर्थिक संतुलन से जोड़ते हुए कहा था कि लोगों को कुछ समय के लिए त्याग की भावना दिखानी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि घर में कोई बड़ा कार्यक्रम भी हो, तब भी लोग सोने की खरीदारी से दूरी बनाए रखें।

प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा कि कोई भक्त यह बता दे कि बिना मंगलसूत्र और सोने के गहनों के हिंदू विवाह कैसे होंगे। विधायक ने अपने बेटे की आगामी शादी का जिक्र करते हुए कहा कि दिसंबर में बेटे की शादी तय है और ऐसी स्थिति में बिना सोने के गहनों के रिश्ता टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि, अगर वास्तव में एक साल तक सोना नहीं खरीदना है, तो फिर एक साल तक शादियां भी बंद कर देनी चाहिए। विधायक की इस टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

श्याम प्रकाश का फेसबुक पोस्ट कुछ ही घंटों में तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा। कुछ लोगों ने विधायक की बात को आम परिवारों की चिंता से जोड़कर देखा, जबकि कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की अपील पर सीधा तंज बताया।

राजनीतिक विरोधियों ने भी इस बयान को हाथोंहाथ लिया और भाजपा के भीतर असहमति का उदाहरण बताते हुए पार्टी पर निशाना साधा। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब भाजपा के अपने विधायक ही प्रधानमंत्री की अपील पर सवाल उठा रहे हैं, तो इससे सरकार की नीतियों को लेकर भ्रम की स्थिति साफ दिखाई देती है।

विवाद गहराने के बाद विधायक ने अपनी पोस्ट हटा ली, लेकिन तब तक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो चुके थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जैसे अनुशासित संगठन में इस तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया पार्टी नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।

हिंदू विवाह और मंगलसूत्र का दिया हवाला

श्याम प्रकाश ने अपनी टिप्पणी में हिंदू परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में विवाह के दौरान सोने के गहनों का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर मंगलसूत्र को हिंदू वैवाहिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

विधायक का तर्क था कि यदि लोग सोने की खरीदारी पूरी तरह बंद कर देंगे, तो विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं और ऐसे में इस प्रकार की अपील व्यावहारिक रूप से मुश्किल पैदा कर सकती है।

हालांकि भाजपा की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा लगातार जारी है।

पहले भी विवादित बयानों से चर्चा में रहे हैं श्याम प्रकाश

यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा विधायक श्याम प्रकाश अपने बयान को लेकर सुर्खियों में आए हों। इससे पहले अप्रैल 2026 में अंबेडकर जयंती के एक कार्यक्रम में उन्होंने ऐसा बयान दिया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

उस दौरान उन्होंने कहा था कि पत्थरों की पूजा करने से कुछ हासिल नहीं होगा, यदि पूजा करनी है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ नेता दलित समाज को भ्रमित कर अपनी राजनीति चमकाने का काम करते हैं।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया था और विपक्षी दलों ने भाजपा पर जमकर हमला बोला था। बाद में विधायक को सफाई देनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि अंधविश्वास के खिलाफ संदेश देना था।

कांग्रेस से भाजपा तक का लंबा राजनीतिक सफर

श्याम प्रकाश का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। बाद में वह बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए और 1996 में बसपा के टिकट पर अहिरोरी विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2004 के उपचुनाव में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की। बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। परिसीमन के बाद जब गोपामऊ विधानसभा सीट बनी, तब वह 2012 में सपा के टिकट पर यहां से विधायक चुने गए।

कुछ वर्षों बाद उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली और 2017 तथा 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में गोपामऊ सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2009 में उन्होंने मिश्रिख लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

परिवार की भी राजनीति में मजबूत पकड़

श्याम प्रकाश का परिवार भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय माना जाता है। उनके बेटे रवि प्रकाश टड़ियावां ब्लॉक के प्रमुख हैं और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है। स्थानीय स्तर पर परिवार का प्रभाव लगातार बढ़ता रहा है।

अब विधायक के हालिया बयान के बाद राजनीतिक जानकार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को किस तरह संभालता है। क्योंकि मामला सीधे प्रधानमंत्री की अपील से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे केवल एक सामान्य बयान के तौर पर नहीं देखा जा रहा।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

विपक्षी दलों ने इस विवाद को लेकर भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा नेताओं के भीतर ही सरकार की नीतियों को लेकर भ्रम और असहमति दिखाई देने लगी है। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक की टिप्पणी आम लोगों की सामाजिक और पारिवारिक चिंताओं को भी सामने लाती है।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और विधायक की आगे की सफाई इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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