18 अक्टूबर 2026 12:27 पूर्वाह्न

महिला आरक्षण पर सियासत तेज : सत्ता में भागीदारी को लेकर छिड़ी बहस, विपक्ष पर साधा निशाना

रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह और महिला आरक्षण मुद्दे पर बोलती अदिति सिंह की सांकेतिक तस्वीर

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

रायबरेली:  उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी विधायक अदिति सिंह ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के बजाय उन्हें मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब विधानसभा और संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। अदिति सिंह ने न सिर्फ इस मुद्दे पर अपनी राय रखी, बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिए आरक्षण को जरूरी बताया।

महिला आरक्षण की जरूरत पर जोर

अदिति सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को पर्याप्त अवसर नहीं दिए गए तो लोकतंत्र अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “नारी शक्ति वंदन विधेयक” जैसे प्रयास महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में उनकी हिस्सेदारी अभी भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में आरक्षण के माध्यम से उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में अदिति सिंह ने विपक्षी दलों की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को गिराने के प्रयास यह दर्शाते हैं कि विपक्ष महिलाओं को सशक्त नहीं देखना चाहता।

उनका आरोप था कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष सच में महिलाओं के हित में होता, तो इस बिल का समर्थन करता।

संसद में महिलाओं की कम भागीदारी

अदिति सिंह ने संसद में महिलाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लोकसभा में केवल 74 महिला सांसद हैं, जो कुल प्रतिनिधित्व का लगभग 15.2 प्रतिशत है।

उन्होंने इसे बेहद कम बताते हुए कहा कि यह आंकड़ा देश की आधी आबादी के हिसाब से न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर महिला आरक्षण लागू हो जाता, तो संसद में महिलाओं की संख्या 280 के करीब पहुंच सकती थी।

यूपी विधानसभा का उदाहरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा का उदाहरण देते हुए अदिति सिंह ने कहा कि 403 सीटों वाली विधानसभा में सिर्फ 43 महिला विधायक हैं। उन्होंने कहा कि अगर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता, तो यह संख्या 200 के पार जा सकती थी।

उनका कहना है कि इससे न केवल महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलता, बल्कि नीति निर्माण में भी उनकी भागीदारी बढ़ती। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाएं चुनाव लड़ने की इच्छुक होती हैं, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे हट जाती हैं।

व्यक्तिगत अनुभव साझा किया

अदिति सिंह ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने खुद दो बार चुनाव जीतकर यह साबित किया है कि महिलाएं सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि वे उन महिलाओं का दर्द समझती हैं जो राजनीति में आना चाहती हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि अगर सीटें आरक्षित होंगी, तो ऐसी महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा और वे समाज के लिए बेहतर काम कर सकेंगी।

अंतरराष्ट्रीय तुलना से उठाए सवाल

अदिति सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि महिला प्रतिनिधित्व के मामले में रवांडा पहले स्थान पर है, जहां संसद में महिलाओं की भागीदारी 61 प्रतिशत है।

इसके अलावा बांग्लादेश में 21 प्रतिशत और पाकिस्तान में 20 प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी इन देशों से भी कम होना चिंताजनक है।

उनका कहना है कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद भारत सामाजिक और राजनीतिक समानता के मामले में पीछे है।

योगी सरकार की सराहना

अदिति सिंह ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा में महिलाओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जो एक सकारात्मक कदम है।

उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास महिलाओं को आत्मविश्वास देते हैं और उन्हें राजनीति में सक्रिय होने के लिए प्रेरित करते हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

अदिति सिंह का मानना है कि महिला आरक्षण सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सत्ता में आएंगी, तो समाज में संतुलन और विकास दोनों बेहतर तरीके से संभव होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक प्रभावी नीतियां बनेंगी।

महिला आरक्षण को लेकर देश में बहस लंबे समय से जारी है, लेकिन अब यह मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है। अदिति सिंह के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण का जरूरी कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या यह मुद्दा राजनीति तक ही सीमित रह जाता है।

महिलाओं की बराबरी और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल मिलकर इस दिशा में काम करें, ताकि लोकतंत्र वास्तव में समावेशी बन सके।

 

❓ जरूरी सवाल-जवाब (FAQ)

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?

यह विधेयक महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण देने का प्रावधान करता है, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़े।

अदिति सिंह ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला आरक्षण बिल का विरोध कर महिलाओं को राजनीति में आगे आने से रोकना चाहता है।

वर्तमान में संसद में कितनी महिला सांसद हैं?

वर्तमान में लोकसभा में लगभग 74 महिला सांसद हैं, जो कुल का करीब 15.2% है।

यूपी विधानसभा में महिलाओं की स्थिति कैसी है?

403 सीटों में केवल 43 महिला विधायक हैं, जो महिलाओं की कम भागीदारी को दर्शाता है।

महिला आरक्षण लागू होने से क्या फायदा होगा?

इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, निर्णय लेने में संतुलन आएगा और समाज में सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

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