18 अक्टूबर 2026 4:20 पूर्वाह्न

सिंचाई संकट से जूझ रहे किसान: एक सप्ताह से बंद सरकारी नलकूप, फसलें सूखने की कगार पर

सीतापुर के सिधौली क्षेत्र में बंद पड़े सरकारी नलकूप के कारण सूखती फसलें और चिंतित किसान, साथ में रिपोर्टर सुनील शुक्ला और गौरव मिश्रा की तस्वीर

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सुनील शुक्ला के साथ गौरव मिश्रा की रिपोर्ट

सीतापुर जिले के खैराबाद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत भिमरी इन दिनों गंभीर सिंचाई संकट का सामना कर रही है। क्षेत्र के अमीनाबाद गांव में स्थित सरकारी नलकूप पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से खराब पड़ा हुआ है, जिससे किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। नलकूप की मोटर जल जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है और अब तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है।

भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसान दिन-रात अपनी फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिना सिंचाई के उनके सारे प्रयास बेअसर साबित हो रहे हैं।

फसलों पर मंडरा रहा संकट

ग्राम पंचायत भिमरी के किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय खेतों में गन्ना, उड़द और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसलें खड़ी हैं। इन फसलों को समय पर पानी न मिलने से उनकी वृद्धि रुक गई है और पौधे मुरझाने लगे हैं।

स्थानीय किसान पवन कुमार और सतीश कुमार ने बताया कि गन्ने की फसल को इस समय पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। यदि कुछ ही दिनों में सिंचाई नहीं हो पाई, तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि उत्पादन आधे से भी कम रह सकता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

गन्ना किसानों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह फसल लंबी अवधि की होती है और इसमें पहले से ही काफी लागत लग चुकी होती है। ऐसे में सिंचाई बाधित होने से पूरी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बना हुआ है।

सब्जी उत्पादकों की बढ़ी मुश्किलें

केवल गन्ना ही नहीं, बल्कि सब्जी उत्पादक किसान भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। गांव के मोहन और छोटकन्न ने बताया कि उनके खेतों में भिंडी और लौकी की फसलें लगी हैं, जो पानी की कमी के कारण तेजी से सूख रही हैं।

उन्होंने कहा कि सब्जी की खेती उनकी रोजमर्रा की आय का मुख्य स्रोत है। यदि फसल खराब हो जाती है, तो उनका परिवार आर्थिक संकट में आ जाएगा। बाजार में सब्जियों की आपूर्ति भी प्रभावित होगी, जिससे कीमतों में वृद्धि की संभावना है।

सब्जी किसानों ने बताया कि उन्होंने वैकल्पिक साधनों से पानी देने की कोशिश की, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल

किसानों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की जानकारी सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) महेंद्र पाल सिंह को फोन के माध्यम से दी थी। जेई ने जल्द ही समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इस देरी से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते नलकूप की मरम्मत कर दी जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी तंत्र की सुस्ती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों की आजीविका दांव पर लगी है, तो विभाग इतनी लापरवाही कैसे बरत सकता है।

दो दिन में समाधान की मांग

गांव के किसानों ने एकजुट होकर मांग की है कि अगले दो दिनों के भीतर नलकूप की मोटर को ठीक कराकर उसे चालू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय पर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

किसानों ने जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने सीतापुर के जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और तत्काल राहत सुनिश्चित करें।

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि इस समय फसलें खराब हो गईं, तो पूरे साल की मेहनत और आय पर असर पड़ेगा।

भविष्य के लिए भी उठी मांग

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि नलकूपों के रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएं न उत्पन्न हों। उन्होंने नियमित जांच और समय पर मरम्मत की व्यवस्था लागू करने की बात कही है।

किसानों का मानना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग समय पर ध्यान दें, तो ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है और किसानों को राहत मिल सकती है।

भिमरी ग्राम पंचायत का यह सिंचाई संकट केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में व्याप्त व्यवस्थागत कमियों को उजागर करता है। समय पर समाधान न मिलने से किसानों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति को कितनी जल्दी समझता है और क्या किसानों को समय रहते राहत मिल पाती है या नहीं। फिलहाल, किसान आस लगाए बैठे हैं कि उनकी मेहनत पर संकट के बादल जल्द छंटेंगे।

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