20 अक्टूबर 2026 4:50 अपराह्न

चित्रकूट में विकास की मांगों पर प्रशासन झुका, चार दिन बाद स्थगित हुआ अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन

चित्रकूट के कौबरा में विकास संबंधी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपते आंदोलनकारी, साथ में रिपोर्टर संजय सिंह राणा की तस्वीर और अनशन से जुड़ा फीचर पोस्टर।

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चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र स्थित कौबरा में विकास संबंधी मांगों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया। आंदोलन के दौरान हर घर जल योजना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की नियुक्ति, सड़क निर्माण, पुलों की ऊंचाई बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और शराब के ठेकों को बंद कराने जैसी महत्वपूर्ण मांगें उठाई गईं। प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है, जबकि आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि वादे पूरे नहीं होने पर पुनः आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। विकास कार्यों की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के विरोध में चित्रकूट जिले के मानिकपुर क्षेत्र स्थित कौबरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा विभिन्न मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने चार दिनों से जारी अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में वादों को पूरा नहीं किया गया तो इससे भी बड़ा जनांदोलन और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

20 जून से शुरू हुआ था आंदोलन

पाठा क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पाठा मुक्ति मोर्चा और क्षेत्रीय नागरिकों के संयुक्त तत्वावधान में 20 जून 2026 से कौबरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू किया गया था। आंदोलन का उद्देश्य वर्षों से लंबित बुनियादी सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को गति दिलाना था।

चार दिनों तक चले इस आंदोलन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन किया। लगातार बढ़ते जनसमर्थन और क्षेत्र की समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन सक्रिय हुआ।

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति

जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी मानिकपुर अनशन स्थल पहुंचे और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत वार्ता की। बातचीत के दौरान प्रशासन ने अधिकांश प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिया।

प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल अपना अनशन स्थगित करने का निर्णय लिया।

प्रशासन ने किए कई महत्वपूर्ण वादे

वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से कई अहम घोषणाएं की गईं। इनमें सबसे पहले ग्राम पंचायत कौबरा और उसके सभी मजरों में हर घर जल योजना के अंतर्गत अगले 15 दिनों के भीतर पेयजल व्यवस्था सुचारु करने का भरोसा दिया गया।

इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौबरा में तीन दिनों के भीतर चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई, जिससे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहे ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रशासन ने जुलाई के पहले सप्ताह में मुरली पहाड़ क्षेत्र में विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाने का आश्वासन दिया।

इसी तरह ग्राम पंचायत कौबरा में संचालित देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानों को विभागीय प्रक्रिया पूरी कर एक माह के भीतर बंद कराने की कार्रवाई करने की बात भी कही गई। वहीं अन्य मांगों को संबंधित विभागों को भेजकर आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया गया।

इन प्रमुख मुद्दों को लेकर हुआ था आंदोलन

अनशन के दौरान आंदोलनकारियों ने क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौबरा में नियमित डॉक्टरों की तैनाती तथा उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिए जाने की मांग प्रमुख रही।

इसके साथ ही हर घर जल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, कौबरा गुंता नदी, बराछी नदी और हनुवा क्षेत्र में बने पुलों की ऊंचाई बढ़ाने, चिफुला सड़क निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने, मुरली पहाड़ के पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्र में पुलिस चौकी स्थापित करने, शराब के ठेकों को बंद कराने तथा कौबरा-हनुवा-बंधी संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण जैसी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा थीं।

आंदोलनकारियों का कहना था कि इन समस्याओं के कारण क्षेत्र के लोगों को वर्षों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

जनभागीदारी से मजबूत हुआ आंदोलन

इस आंदोलन का नेतृत्व पाठा मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लवकुश कुमार भारती और संगठन के उपाध्यक्ष नन्दलाल सिंह आजाद ने किया। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी अनशन स्थल पर पहुंचे और अपना समर्थन दर्ज कराया।

समाजसेवी पिंटू भारती, समाजसेवी प्रकाश अंबेडकर, समाजसेवी लवलेश उर्फ पालेश्वर पंडित, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सतीश मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोगों की सक्रिय भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो फिर होगा आंदोलन

अनशन स्थगित होने के बाद पाठा मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लवकुश कुमार भारती ने कहा कि संगठन प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह केवल आंदोलन का स्थगन है, समाप्ति नहीं। यदि प्रशासन अपने वादों पर अमल करने में विफल रहता है तो संगठन और क्षेत्र की जनता दोबारा आंदोलन शुरू करेगी। आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन का रास्ता भी अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों को विकास कार्यों के शीघ्र शुरू होने की उम्मीद

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति के बाद क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन अपने आश्वासनों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से कार्य करता है तो स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, पर्यावरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि घोषित समय सीमा के भीतर विकास कार्य धरातल पर दिखाई देते हैं तो यह पाठा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। वहीं वादों के पूरा न होने की स्थिति में क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन खड़ा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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