लखनऊ

14 बीघा सरकारी जमीन घोटाले का आरोप ; लेखपाल-भूमाफिया गठजोड़ से करोड़ों की भूमि प्लाटिंग कर बेची गई


🖊️ कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

लखनऊ के सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नीवा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बड़े पैमाने पर प्लाटिंग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 14 बीघा की बेस कीमती सरकारी भूमि को भूमाफियाओं और प्रॉपर्टी डीलरों के हवाले कर दिया गया, जहां से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई। इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के लेखपालों पर सांठगांठ और मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और असंतोष का माहौल है।

राजस्व विभाग पर मिलीभगत के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र में लंबे समय से सरकारी भूमि पर कब्जा करने और उसे प्लाटिंग कर बेचने का खेल चल रहा है। इस अवैध गतिविधि में स्थानीय लेखपालों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि सैकड़ों बीघा सरकारी जमीन, जिसमें तालाब, चारागाह, ऊसर बंजर और नवीन परती भूमि शामिल है, भूमाफियाओं के कब्जे में जा चुकी है।

ग्राम पंचायत नीवा के मामले में भी यही आरोप सामने आए हैं कि संबंधित लेखपालों ने मौके का फायदा उठाते हुए लाखों रुपये की अवैध वसूली की और भूमाफियाओं को संरक्षण दिया।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

पीड़ित परिवार द्वारा तहसील समाधान दिवस सरोजिनी नगर से लेकर जिलाधिकारी लखनऊ और मुख्यमंत्री तक शिकायत की गई, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले में एसडीएम अंकित शुक्ला और तहसीलदार के समक्ष लेखपाल द्वारा 21 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का जिक्र किया गया था।

इसके बाद 1 जनवरी 2026 को राजस्व विभाग की टीम गठित कर कब्जा हटाने के आदेश दिए गए। टीम में राजस्व निरीक्षक प्रेम प्रकाश पांडे, दिनेश कुमार सहित कई लेखपालों को शामिल किया गया था। बावजूद इसके अब तक मौके पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

कब्जा हटाने में पुलिस बल का बहाना

जब इस मामले को लेकर पत्रकारों ने राजस्व विभाग से सवाल किया तो अधिकारियों ने बताया कि पर्याप्त पुलिस बल न मिलने के कारण कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं की जा सकी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल बहाना है और प्रशासन जानबूझकर कार्रवाई से बच रहा है।

भूमाफियाओं पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ दबंग भूमाफियाओं की भूमिका प्रमुख है। आरोप है कि लखनऊ निवासी मोहम्मद फरीद सिद्दीकी और थाना बंथरा क्षेत्र के इरशाद अली समेत अन्य लोगों ने इस जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग के माध्यम से बेच दिया।

बताया जा रहा है कि यह सब कार्य स्थानीय दबंगों के संरक्षण में हुआ और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया गया।

पीड़ित परिवार को मिल रहीं धमकियां

सूत्रों के अनुसार, पीड़ित परिवार द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बाद उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं। आरोप है कि दबंगों द्वारा फोन कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है।

इससे स्पष्ट है कि मामला केवल जमीन कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ गया है।

पूरे क्षेत्र में फैला अवैध कब्जे का जाल

यह मामला केवल ग्राम पंचायत नीवा तक सीमित नहीं है। सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में सरकारी जमीनों पर इसी तरह अवैध कब्जे और प्लाटिंग के मामले सामने आ रहे हैं। आरोप है कि तालाब, चकरोड, चारागाह और बंजर भूमि तक को नहीं छोड़ा गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च स्तरीय अधिकारी से कराई जाए, तो राजस्व विभाग के कई अधिकारी, ग्राम प्रधान और भूमाफिया बेनकाब हो सकते हैं।

सरकार और प्रशासन पर उठे सवाल

इस मामले ने प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई करने में प्रशासन विफल रहा है, जिससे भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

निष्कर्ष

सरोजिनी नगर के ग्राम पंचायत नीवा का यह मामला सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है।

📌 FAQ

मामला क्या है?

ग्राम पंचायत नीवा में 14 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और प्लाटिंग कर बेचने का आरोप है।

मुख्य आरोप किस पर हैं?

राजस्व विभाग के लेखपालों और भूमाफियाओं पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।

क्या कार्रवाई हुई?

अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि कब्जा हटाने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं।

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