डीएम की संवेदनशीलता ने जीता दिल : टूटी गुल्लक लेकर पहुंचीं मासूम बहनों को मिला नया सहारा
जनता दर्शन में रो पड़ीं बच्चियां, डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने नए गुल्लक और स्कूल बैग देकर लौटाई मुस्कान
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से इंसानियत और संवेदनशील प्रशासन की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं और लंबी प्रक्रिया से गुजरते हैं, लेकिन कानपुर कलेक्ट्रेट में हुई एक घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर अधिकारी संवेदनशील हों तो छोटी-सी मदद भी किसी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकती है।
कानपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन के दौरान दो मासूम बहनें अपनी मां के साथ डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने पहुंचीं। बच्चियों की आंखों में आंसू थे और हाथों में टूटी उम्मीदों की कहानी। उन्होंने डीएम से कहा कि पारिवारिक विवाद में उनके गुल्लक तोड़ दिए गए हैं। बच्चियां उन गुल्लकों में पैसे जमा कर रही थीं ताकि नया स्कूल बैग खरीद सकें। बच्चियों की मासूम शिकायत सुनते ही डीएम का दिल पसीज गया और उन्होंने तुरंत ऐसा कदम उठाया, जिसकी अब पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है।
जनता दर्शन में भावुक कर देने वाला दृश्य
जानकारी के अनुसार कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र निवासी शन्नो अपनी दो बेटियों इस्वा (12 वर्ष) और परियम फातिमा (8 वर्ष) के साथ जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंची थीं। शन्नो ने डीएम को बताया कि उनके पति लंबे समय से बीमार रहते हैं। पारिवारिक विवाद के चलते ससुराल पक्ष ने उन्हें घर से निकाल दिया और घर का सामान भी बाहर फेंक दिया। इसी दौरान दोनों बच्चियों के गुल्लक भी टूट गए।
मां की बात सुनते-सुनते दोनों बच्चियां रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि वे कई महीनों से अपने गुल्लक में पैसे जमा कर रही थीं ताकि स्कूल के लिए नए बैग खरीद सकें। गुल्लक टूटने के बाद उनका सपना भी टूट गया।
कलेक्ट्रेट में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें भी यह दृश्य देखकर नम हो गईं। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्चियों की परेशानी को गंभीरता से सुना और तुरंत मदद करने का फैसला लिया।
डीएम ने तुरंत मंगवाए नए गुल्लक और स्कूल बैग
बच्चियों की बात सुनने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बिना देर किए दोनों बहनों के लिए नए गुल्लक और स्कूल बैग मंगवाए। इतना ही नहीं, उन्होंने दोनों गुल्लकों में अपनी ओर से 500-500 रुपये भी डाले।
जब बच्चियों को नया गुल्लक और नया स्कूल बैग मिला तो उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई देने लगी। कुछ देर पहले जो बच्चियां रो रही थीं, वही अब मुस्कुराते हुए डीएम को धन्यवाद दे रही थीं।
यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक करने वाला था। कई लोगों ने कहा कि सरकारी पद पर बैठा अधिकारी अगर मानवीय संवेदनाओं को समझे तो आम लोगों की मुश्किलें काफी हद तक आसान हो सकती हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई संवेदनशीलता की तस्वीर
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह की यह पहल अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग उनकी संवेदनशीलता और मानवीय सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि प्रशासनिक अधिकारियों का ऐसा व्यवहार समाज में सकारात्मक संदेश देता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि बच्चों के सपनों की कीमत समझना ही सच्ची प्रशासनिक सेवा है।
आज के दौर में जहां अक्सर सरकारी सिस्टम को लेकर शिकायतें सुनने को मिलती हैं, वहां कानपुर के डीएम का यह कदम लोगों के बीच उम्मीद जगाने वाला माना जा रहा है।
कौन हैं कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह?
कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के निवासी हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1972 को हुआ था। उन्होंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की है।
प्रशासनिक सेवा में उनकी पहचान एक मेहनती और संवेदनशील अधिकारी के रूप में होती रही है। वर्ष 2013 में उनका चयन पीसीएस अधिकारी के रूप में हुआ था। इसके बाद 31 मई 2019 को उन्हें आईएएस पद पर प्रमोट किया गया।
कई महत्वपूर्ण पदों पर दे चुके हैं सेवाएं
जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
- 28 अप्रैल 2017 से 12 जुलाई 2019 तक वे लखनऊ में मंडी परिषद के एडिशनल डायरेक्टर रहे।
- इसके बाद 12 जुलाई 2019 से 2 मार्च 2021 तक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, लखनऊ में डायरेक्टर पद पर कार्य किया।
- बाद में उन्हें कानपुर देहात का जिलाधिकारी बनाया गया, जहां वे 14 अप्रैल 2022 तक तैनात रहे।
- इसके बाद उन्होंने देवरिया के डीएम के रूप में भी कार्यभार संभाला।
- देवरिया से उनका तबादला बागपत किया गया और फिर वहां से उन्हें कानपुर का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया।
प्रशासन का मानवीय चेहरा बना चर्चा का विषय
कानपुर की यह घटना केवल दो बच्चियों की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन के मानवीय चेहरे को भी सामने लाती है। अक्सर लोग सरकारी कार्यालयों को कठोर व्यवस्था का प्रतीक मानते हैं, लेकिन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती है।
बच्चियों के लिए नया गुल्लक केवल एक वस्तु नहीं था, बल्कि उनके टूटे सपनों को फिर से जोड़ने की कोशिश थी। स्कूल बैग देकर डीएम ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा और बच्चों के सपनों को किसी भी हाल में टूटने नहीं देना चाहिए।
समाज को भी मिला बड़ा संदेश
इस घटना ने समाज को भी एक बड़ा संदेश दिया है। बच्चों के छोटे-छोटे सपने उनके भविष्य की नींव होते हैं। अगर परिवार और समाज उन्हें समझे और सहयोग करे तो वे आगे चलकर बड़ी सफलताएं हासिल कर सकते हैं।
डीएम की इस पहल ने यह भी दिखाया कि प्रशासनिक अधिकारी केवल कानून और व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज में संवेदनशील बदलाव लाने की क्षमता भी रखते हैं।
कानपुर कलेक्ट्रेट में हुई यह छोटी-सी घटना आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। दो मासूम बच्चियों की मुस्कान ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत अभी भी जिंदा है और संवेदनशील प्रशासन समाज में विश्वास कायम करने की सबसे बड़ी ताकत है।
कानपुर डीएम की संवेदनशीलता: सवाल-जवाब
कानपुर कलेक्ट्रेट में क्या हुआ?
जनता दर्शन के दौरान दो मासूम बहनें अपनी मां के साथ डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह के पास पहुंचीं और बताया कि पारिवारिक विवाद में उनके गुल्लक टूट गए हैं।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्चियों की कैसे मदद की?
डीएम ने दोनों बहनों के लिए नए गुल्लक और स्कूल बैग मंगवाए। साथ ही दोनों गुल्लकों में 500-500 रुपये डालकर बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
बच्चियां गुल्लक में पैसे क्यों जमा कर रही थीं?
दोनों बहनें स्कूल बैग खरीदने के लिए अपने गुल्लक में पैसे जोड़ रही थीं, लेकिन पारिवारिक विवाद में उनके गुल्लक टूट गए।
यह मामला कहां का है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का है। बच्चियां जाजमऊ क्षेत्र की रहने वाली बताई गई हैं।
इस खबर की रिपोर्ट किसने की है?
यह रिपोर्ट ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित की जा सकती है।











