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रायबरेली जिला अस्पताल में मानसिक रूप से कमजोर युवक से अमानवीय व्यवहार, वीडियो वायरल होने पर सफाईकर्मी निलंबित

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल परिसर में मौजूद कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में एक महिला सफाईकर्मी मानसिक रूप से कमजोर युवक के साथ मारपीट करती और उसे लगातार अपशब्द कहती हुई दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर संबंधित महिला सफाईकर्मी को निलंबित कर दिया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

39 सेकेंड के वीडियो ने खोली अस्पताल की संवेदनहीन तस्वीर

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे लगभग 39 सेकेंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि एक मानसिक रूप से कमजोर युवक जिला अस्पताल परिसर में फर्श पर बैठा हुआ है। इसी दौरान वहां मौजूद महिला सफाईकर्मी युवक को वहां से उठकर जाने के लिए कहती है। जब युवक उसकी बात समझ नहीं पाता और वहीं बैठा रहता है, तो महिला का व्यवहार अचानक आक्रामक हो जाता है।

वीडियो में महिला युवक को लगातार गालियां देती हुई दिखाई देती है। इतना ही नहीं, वह कई बार उसे लात मारती है और उसके चेहरे व पीठ पर भी वार करती है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि युवक अपनी ओर से किसी प्रकार का विरोध नहीं करता, बल्कि चुपचाप मार सहता रहता है। यह दृश्य देखने वालों को झकझोर देने वाला है।

अस्पताल परिसर में मौजूद लोग बने रहे मूकदर्शक

इस पूरी घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि जब महिला सफाईकर्मी युवक के साथ मारपीट कर रही थी, उस समय अस्पताल परिसर में कई अन्य लोग भी मौजूद थे। बावजूद इसके किसी ने आगे बढ़कर महिला को रोकने या पीड़ित युवक की मदद करने की कोशिश नहीं की।

घटना का वीडियो बनाने वाला व्यक्ति भी पूरी घटना को रिकॉर्ड करता रहा, लेकिन तत्काल हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं किया गया। इससे अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की संवेदनहीनता भी चर्चा का विषय बन गई है।

वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मामला तेजी से अधिकारियों तक पहुंच गया। वीडियो को लेकर लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने तत्काल अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की और दोषी महिला सफाईकर्मी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने आरोपी महिला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

रायबरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए संबंधित महिला सफाईकर्मी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। प्रथम दृष्टया उसका व्यवहार पूरी तरह अनुचित और अमानवीय पाया गया है।

उन्होंने कहा कि आरोपी महिला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है तथा पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

संविदा पर कार्यरत है आरोपी सफाईकर्मी

जानकारी के अनुसार आरोपी महिला सफाईकर्मी पिंकी जिला अस्पताल में संविदा के आधार पर सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत है। बताया जा रहा है कि घटना सोमवार शाम की है, जब मानसिक रूप से कमजोर एक युवक किसी तरह अस्पताल परिसर के भीतर पहुंच गया था और फर्श पर बैठा हुआ था।

इसी दौरान सफाई का कार्य कर रही महिला कर्मचारी वहां पहुंची और युवक को हटाने लगी। युवक के नहीं उठ पाने पर उसने अपना आपा खो दिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। पूरी घटना किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

मरीजों और जरूरतमंदों के साथ दुर्व्यवहार नहीं होगा बर्दाश्त

मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज और जरूरतमंद व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना अनिवार्य है। किसी भी कर्मचारी द्वारा मरीज या असहाय व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मानवता और संवेदनशीलता पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक कर्मचारी की अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। मानसिक रूप से कमजोर अथवा असहाय व्यक्तियों के साथ मानवीय व्यवहार करना प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की नैतिक जिम्मेदारी होती है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद लोगों ने मांग की है कि दोषी के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं, बल्कि भविष्य में अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों को मानवीय व्यवहार और संवेदनशीलता का प्रशिक्षण भी दिया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रायबरेली जिला अस्पताल का यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य संस्थानों में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला सफाईकर्मी को निलंबित कर दिया है और जांच शुरू कर दी गई है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो यह भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश साबित हो सकता है।

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