चित्रकूट

मंदाकिनी किनारे आस्था परेशान, घाटों पर नावों और शोरगुल से बिगड़ा माहौल

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट की पवित्र धार्मिक नगरी इन दिनों घाटों पर फैली अव्यवस्था और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर चर्चा में है। भगवान राम की तपोभूमि माने जाने वाले मंदाकिनी नदी के प्रमुख घाटों पर नावों की अनियंत्रित आवाजाही और शोरगुल ने श्रद्धालुओं की आस्था और आध्यात्मिक शांति दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। रामघाट, बालाघाट और भरत घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर बड़ी संख्या में नावें घाट किनारे खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि वे चित्रकूट में मानसिक शांति, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में आते हैं, लेकिन घाटों पर फैली अव्यवस्था उनके अनुभव को खराब कर रही है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक कठिनाई उठानी पड़ रही है। घाटों की सीढ़ियों से बंधी नावों की रस्सियां और स्नान स्थलों तक पहुंचती नावें श्रद्धालुओं के लिए बड़ी बाधा बन गई हैं।

रामघाट से भरत घाट तक नावों का कब्जा

मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित रामघाट चित्रकूट की धार्मिक पहचान माना जाता है। यहां सुबह-शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इन दिनों घाटों पर नावों की भीड़ ने स्थिति को असुविधाजनक बना दिया है। नाविक अपनी नावें सीधे घाट की सीढ़ियों के पास खड़ी कर देते हैं, जिससे लोगों को उतरने-बैठने और स्नान करने में परेशानी होती है।

कई श्रद्धालुओं का आरोप है कि नावों को हटाने के लिए कहने पर भी नाविक ध्यान नहीं देते। कई बार सवारियों से भरी नावें सीधे उन स्थानों तक पहुंच जाती हैं, जहां महिलाएं और परिवार स्नान कर रहे होते हैं। इससे श्रद्धालु असहज महसूस करते हैं और घाटों की पवित्रता भी प्रभावित होती है।

महिलाओं ने जताई नाराजगी

घाटों पर अव्यवस्था को लेकर महिला श्रद्धालुओं में खासा आक्रोश दिखाई दे रहा है। कानपुर से दर्शन के लिए आई श्रद्धालु ममता देवी ने बताया कि घाटों पर नावों की वजह से स्नान करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि कई बार नावों में बैठे लोग लगातार स्नान करने वालों को देखते रहते हैं, जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को नावों के लिए अलग स्थान तय करना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को शांति और सुविधा के साथ स्नान करने का अवसर मिल सके। उनका कहना था कि धार्मिक स्थल पर इस तरह की अव्यवस्था आस्था को ठेस पहुंचाने वाली है।

तेज आवाज में बजते गीतों से बिगड़ रहा धार्मिक माहौल

घाटों पर सिर्फ नावों का अतिक्रमण ही समस्या नहीं है, बल्कि नावों में बजने वाले तेज फिल्मी और भोजपुरी गीत भी श्रद्धालुओं को परेशान कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल पर आध्यात्मिक और शांत वातावरण की अपेक्षा रहती है, लेकिन घाटों पर बजते अभद्र और तेज आवाज वाले गीत माहौल को दूषित कर रहे हैं।

प्रयागराज से आए श्रद्धालु रमेश कुमार ने बताया कि रामघाट पर अब ऐसी जगह मुश्किल से मिलती है, जहां नावें खड़ी न हों। कई बार नावों से बजने वाले गानों की आवाज इतनी तेज होती है कि पूजा-पाठ और ध्यान करना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने प्रशासन से घाटों पर सख्ती से नियम लागू करने की मांग की।

प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

श्रद्धालुओं की लगातार शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा है कि नावों पर फिल्मी गीत बजाने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही नावों के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

प्रशासन घाटों पर विशेष स्टॉल लगाकर नावों का रजिस्ट्रेशन करेगा। साथ ही नावों को खड़ा करने के लिए अलग स्थान भी निर्धारित किया जाएगा, ताकि स्नान घाटों पर भीड़ और अव्यवस्था कम हो सके। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

धार्मिक पर्यटन पर पड़ सकता है असर

चित्रकूट देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों पर बढ़ती अव्यवस्था धार्मिक पर्यटन की छवि पर भी असर डाल सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो श्रद्धालुओं की संख्या पर भी प्रभाव पड़ सकता है। घाटों की स्वच्छता, शांति और व्यवस्थित संचालन ही चित्रकूट की वास्तविक पहचान है। यदि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को असुविधा होगी, तो इसका असर स्थानीय व्यापार और पर्यटन दोनों पर पड़ेगा।

संत समाज ने भी उठाई व्यवस्था सुधार की मांग

स्थानीय संतों और सामाजिक संगठनों ने भी घाटों की व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि चित्रकूट केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शांति और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।

संत समाज का कहना है कि घाटों पर नावों की संख्या नियंत्रित की जानी चाहिए और धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए। साथ ही घाटों पर नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई भी जरूरी है।

चित्रकूट के मंदाकिनी घाटों पर बढ़ती अव्यवस्था अब प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द प्रभावी कदम उठाकर घाटों की व्यवस्था को सुधारेगा, ताकि भगवान राम की इस पवित्र नगरी में आने वाले लोगों को फिर से शांति और श्रद्धा का वास्तविक अनुभव मिल सके।

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