देवरिया

न रात को नींद, न दिन में चैन: उमस और भीषण गर्मी ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

भाटपार रानी, देवरिया। पूर्वांचल के इस इलाके में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ा हुआ है। लगातार बढ़ते तापमान और उमस भरी गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले चार दिनों से हालात ऐसे बने हुए हैं कि न दिन में राहत मिल रही है और न ही रात को सुकून। लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे सूरज चढ़ता है, वैसे-वैसे बेचैनी और घुटन बढ़ती जाती है। वहीं रात में भी गर्म हवाएं और उमस लोगों की नींद उड़ा रही हैं।

बढ़ती गर्मी और उमस ने बढ़ाई परेशानी

भाटपार रानी क्षेत्र में तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसके साथ ही हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से उमस ने हालात को और गंभीर बना दिया है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। जो लोग कामकाज के सिलसिले में बाहर निकल रहे हैं, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, “ऐसा लग रहा है जैसे मछली को पानी से बाहर निकाल दिया गया हो।” यह तुलना इस बात को दर्शाती है कि लोग कितनी बेचैनी और घुटन महसूस कर रहे हैं। दिनभर पसीने से तरबतर रहना और गर्मी से बेहाल होना आम बात हो गई है।

तंग गलियों और छोटे घरों में हालात और खराब

सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो तंग गलियों और छोटे घरों में रहते हैं। ऐसे घरों में हवा का समुचित आवागमन नहीं हो पाता, जिससे गर्मी और उमस का असर कई गुना बढ़ जाता है। खासकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

घरों में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है। रसोई में खड़े होना किसी अग्निकुंड में खड़े होने जैसा महसूस होता है। वहीं बच्चों की हालत भी दयनीय बनी हुई है। वे दिनभर चिड़चिड़े और परेशान नजर आ रहे हैं।

पंखे भी दे रहे गर्म हवा

लोगों का कहना है कि पंखों से भी ठंडी हवा के बजाय गर्म लहरें ही निकल रही हैं। इससे राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ रही है। जिन घरों में कूलर या एयर कंडीशनर की सुविधा नहीं है, वहां के लोगों के लिए स्थिति और भी गंभीर है।

गांव और कस्बों में बिजली की अनियमित आपूर्ति भी समस्या को बढ़ा रही है। कई बार घंटों तक बिजली नहीं रहने से लोग और ज्यादा परेशान हो जाते हैं। ऐसे में गर्मी से बचाव के सारे उपाय बेअसर साबित हो रहे हैं।

पर्यावरण असंतुलन बना बड़ा कारण

मौसम के इस बदलते और बेरुखे मिजाज के पीछे पर्यावरण असंतुलन को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, हरियाली की कमी और लगातार घटती वर्षा ने इस स्थिति को जन्म दिया है।

पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम बारिश हो रही है, जिससे जमीन की नमी कम हो गई है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके अलावा शहरीकरण और भौतिक विकास की अंधी दौड़ ने भी प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ा है।

स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

भीषण गर्मी और उमस का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

स्थानीय अस्पतालों में इन दिनों मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। लोग गर्मी से संबंधित समस्याओं को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

डॉक्टरों की सलाह: सावधानी ही बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस भीषण गर्मी और उमस से बचने के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं—

दिन के समय अनावश्यक यात्रा से बचें।

अगर बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को गमछे या टोपी से ढकें और छाता लेकर निकलें।

अधिक से अधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

हल्के और ढीले कपड़े पहनें, जिससे शरीर को हवा मिल सके।

तबीयत खराब महसूस होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर डॉक्टर से परामर्श लें।

प्रकृति की ओर लौटने की जरूरत

इस स्थिति ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिकता और विकास की दौड़ में कहीं न कहीं हम प्रकृति से दूर हो गए हैं। पेड़ों की कटाई और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

जरूरत इस बात की है कि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाए। तभी आने वाले समय में इस तरह की भीषण गर्मी और उमस से राहत मिल सकती है।

भाटपार रानी और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों गर्मी और उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। न दिन में चैन है और न रात को नींद। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जरूरत है। साथ ही, पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button