हमीरपुर

यमुना की लहरों में बुझ गईं मासूम उम्मीदें : 18 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू, छह शव मिलने से गांव में मातम

लगातार बारिश और तेज बहाव बना काल, शादी की खुशियां पलभर में मातम में बदलीं

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना नदी में नाव पलटने की दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। करीब 18 घंटे तक चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रशासन ने नदी में लापता सभी छह लोगों के शव बरामद कर लिए। हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार और मातम का माहौल है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक शादी की खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

लगातार हो रही बारिश और यमुना नदी के तेज बहाव के बीच एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फ्लड पीएसी की संयुक्त टीमों ने पूरी रात अभियान चलाया। बचाव दल ने नदी में जाल डालकर और कई किलोमीटर तक तलाशी अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और धारा अत्यधिक तेज थी।

शादी की खुशी में गए थे नदी पार, लौटते वक्त हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक बुधवार शाम एक परिवार शादी समारोह के बाद नाव से यमुना नदी पार कर रहा था। बताया जा रहा है कि परिवार के लोग नदी पार तरबूज खाने के लिए गए थे। वापसी के दौरान अचानक नाव असंतुलित होकर पलट गई। नाव में आठ बच्चों समेत कुल नौ लोग सवार थे।

हादसे के समय नाविक ने साहस दिखाते हुए तीन लोगों को किसी तरह बचा लिया, लेकिन एक महिला और छह बच्चे नदी की तेज धारा में बह गए। देखते ही देखते खुशियों का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। नदी किनारे मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन तेज बहाव के सामने किसी की कोशिश काम नहीं आ सकी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंच गया। देर शाम से ही बचाव अभियान शुरू कर दिया गया, लेकिन अंधेरा और तेज धारा राहत कार्य में बड़ी बाधा बनी रही।

18 घंटे तक चला मौत से संघर्ष

रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ की चार टीमें, एसडीआरएफ की दो टीमें और फ्लड पीएसी की एक टीम को लगाया गया था। करीब सौ जवान लगातार नदी में तलाश अभियान चलाते रहे। टीमों ने नावों, रस्सियों और जाल की मदद से नदी के कई हिस्सों में सर्च ऑपरेशन किया।

अधिकारियों के अनुसार करीब आठ किलोमीटर तक नदी क्षेत्र में तलाशी ली गई। कई बार गोताखोरों को तेज धारा के कारण वापस लौटना पड़ा, लेकिन टीमों ने अभियान जारी रखा। आखिरकार गुरुवार को सभी छह शव बरामद कर लिए गए।

रेस्क्यू पूरा होने के बाद घाट किनारे मौजूद परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। जिन आंखों में अपने बच्चों और रिश्तेदारों के सुरक्षित लौट आने की उम्मीद थी, उन्हीं आंखों के सामने अब केवल शव थे।

मासूमों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा

हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें राजू निषाद की 25 वर्षीय मौसी ब्रजरानी, 14 वर्षीय अर्चना, 12 वर्षीय आकांक्षा, मौसेरा भाई लाव्यांश, नौ वर्षीय रानी और आदित्य शामिल हैं। गांव के लोगों का कहना है कि पूरा परिवार बेहद खुश था और शादी समारोह के बाद उत्सव का माहौल था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह खुशी मातम में बदल जाएगी।

घाट किनारे बैठी माताएं अपने बच्चों का नाम लेकर रोती रहीं। कई परिजन देर रात तक नदी की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद कोई चमत्कार हो जाए और बच्चे जिंदा मिल जाएं, लेकिन सुबह होते-होते सभी उम्मीदें टूट गईं।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने ऐसा दर्दनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा। पूरे गांव में चूल्हे नहीं जले और हर घर में शोक का माहौल बना रहा।

साध्वी निरंजन ज्योति ने परिजनों को दी सांत्वना

घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति मौके पर पहुंचीं। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है और सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा भी की। उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भी मौजूद रही।

एडीजी ने लिया हालात का जायजा

वहीं प्रयागराज जोन के एडीजी ज्योति नारायण ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने के निर्देश दिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। साथ ही हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि नाव पर क्षमता से अधिक लोग तो सवार नहीं थे और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

बरसात में बढ़ रहा नदी हादसों का खतरा

लगातार बारिश के कारण प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में नदी पार करने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। छोटी नावों में अधिक लोगों का बैठना और सुरक्षा उपकरणों की कमी अक्सर बड़े हादसों का कारण बन जाती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और नाव संचालन के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

टूट गईं लौट आने की उम्मीदें

घटना के बाद सबसे दर्दनाक दृश्य घाट किनारे देखने को मिला, जहां बच्चों के माता-पिता पूरी रात बैठे रहे। पथराई आंखों से वे बचाव दल की हर गतिविधि को देख रहे थे। उन्हें विश्वास था कि उनके मासूम किसी तरह वापस लौट आएंगे, लेकिन जैसे-जैसे शव निकलते गए, परिवारों की उम्मीदें भी टूटती चली गईं।

यमुना की लहरों ने इस हादसे में केवल छह जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों की खुशियां और भविष्य भी अपने साथ बहा ले गईं। गांव में अब केवल चीखें, आंसू और उस दर्द की गूंज बची है, जिसे शायद वक्त भी पूरी तरह भर नहीं पाएगा।

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