चित्रकूट

नदी कटान से जूझ रहे किसानों के लिए राहत की खबर, सरकार ने दिए त्वरित कार्रवाई के आदेश

संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट

जनप्रतिनिधियों की पहल और समाजसेवी शंकर यादव के सतत प्रयासों का असर

चित्रकूट जनपद की राजापुर तहसील क्षेत्र से बहने वाली पयस्वनी नदी के लगातार बढ़ते कटान को लेकर आखिरकार शासन स्तर पर गंभीरता दिखाई देने लगी है। लंबे समय से किसानों की उपजाऊ जमीन को निगल रही इस समस्या पर अब प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभाग को तत्काल प्रभाव से ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस कदम से क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है कि वर्षों से चली आ रही उनकी पीड़ा का अब समाधान संभव हो सकेगा। 🌾

भाजपा जिलाध्यक्ष के पत्र से तेज हुई प्रशासनिक हलचल

दरअसल, इस पूरे मामले ने उस समय गति पकड़ी जब महेन्द्र कुमार कोटार्य (भाजपा जिलाध्यक्ष, चित्रकूट) ने 5 दिसंबर 2025 को जलशक्ति मंत्री को पत्र भेजकर राजापुर तहसील के विकासखंड पहाड़ी अंतर्गत ग्राम अरछा बरेठी में पयस्वनी नदी के तीव्र कटान की गंभीर स्थिति से अवगत कराया।

पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि नदी का कटान लगातार तेज होता जा रहा है, जिससे गांव की उपजाऊ कृषि भूमि तेजी से नदी में समाती जा रही है। इसके कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। साथ ही यदि समय रहते कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया, तो भविष्य में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 10 फरवरी 2026 को सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश जारी करते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

वर्षों से झेल रहे थे किसान भूमि कटान की मार

पयस्वनी नदी का कटान पिछले कई वर्षों से अरछा बरेठी और आसपास के गांवों के किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। नदी का बहाव लगातार किनारों को काटता हुआ आगे बढ़ रहा है, जिससे खेतों की उपजाऊ मिट्टी नदी में समाती जा रही है।

किसानों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में कटान की रफ्तार और बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप उनकी मेहनत से तैयार की गई फसलें और जमीन दोनों खतरे में पड़ जाती हैं। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है, ऐसे में भूमि कटान उनके लिए जीवन-यापन का संकट बन चुका है। 🚜

ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते कटानरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गांव की आबादी तक इस खतरे की जद में आ सकती है।

समाजसेवी शंकर यादव की मेहनत लाई रंग

ग्राम अरछा बरेठी निवासी वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी शंकर प्रसाद यादव पिछले तीन-चार वर्षों से इस समस्या को लेकर लगातार प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर पयस्वनी नदी के कटान की समस्या से अवगत कराया।

हालांकि प्रारंभिक स्तर पर उनके प्रयासों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हाल ही में उन्होंने पुनः जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और भाजपा जिलाध्यक्ष के जरिए जलशक्ति मंत्री तक अपनी बात पहुंचाई।

उनके इस सतत प्रयास का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। मंत्री स्तर से कार्रवाई के निर्देश जारी होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद

जैसे ही मंत्री के निर्देशों की जानकारी क्षेत्र में पहुंची, ग्रामीणों और किसानों के बीच राहत और उम्मीद का माहौल बन गया। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद पहली बार उन्हें लगा है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया गया है।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही सिंचाई विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर कटान रोकने के लिए आवश्यक कार्य शुरू कराया जाएगा। यदि समय रहते तटबंध निर्माण, पत्थर पिचिंग या अन्य कटानरोधी उपाय किए जाते हैं, तो इससे न केवल कृषि भूमि सुरक्षित होगी बल्कि भविष्य में गांव की आबादी भी सुरक्षित रह सकेगी।

प्रशासनिक सक्रियता से मिल सकती है स्थायी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि पयस्वनी नदी के किनारे कटान रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से तट संरक्षण कार्य कराना आवश्यक है। इसके अंतर्गत मजबूत तटबंध निर्माण, पत्थर पिचिंग, वृक्षारोपण तथा जल प्रवाह की दिशा नियंत्रित करने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

यदि इन उपायों को समय रहते लागू किया जाता है, तो क्षेत्र में भूमि कटान की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जलशक्ति मंत्री के निर्देश के बाद अब सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि वह जल्द से जल्द प्रभावी कार्ययोजना बनाकर जमीन पर कार्रवाई शुरू करे।

जनप्रतिनिधियों और समाज की भागीदारी बनी मिसाल

इस पूरे प्रकरण ने यह भी साबित किया है कि जब जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर किसी जनसमस्या को उठाते हैं, तो उसका समाधान संभव हो जाता है। भाजपा जिलाध्यक्ष महेन्द्र कुमार कोटार्य की पहल और समाजसेवी शंकर यादव के निरंतर प्रयासों ने मिलकर इस मुद्दे को शासन स्तर तक पहुंचाया।

यह पहल क्षेत्र के अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है कि यदि संगठित प्रयास किए जाएं तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान भी संभव है।

अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकीं

फिलहाल क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की निगाहें अब सिंचाई विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों को उम्मीद है कि मंत्री के निर्देशों के बाद विभागीय अधिकारी जल्द ही मौके का निरीक्षण करेंगे और कटान रोकने के लिए ठोस कार्य शुरू कराया जाएगा।

यदि यह कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो न केवल किसानों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा बल्कि भविष्य में इस क्षेत्र की कृषि व्यवस्था भी सुरक्षित हो सकेगी। यही कारण है कि पयस्वनी नदी के कटान को लेकर शुरू हुई यह प्रशासनिक सक्रियता अब पूरे क्षेत्र के लिए राहत और उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। 🌿

महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (क्लिक करें)

नदी कटान की समस्या कितने समय से जारी है?

यह समस्या पिछले कई वर्षों से किसानों की कृषि भूमि को प्रभावित कर रही है।

सरकार ने क्या निर्देश दिए हैं?

कटान रोकने के लिए संबंधित विभाग को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को इससे क्या लाभ होगा?

कटान रुकने से कृषि भूमि सुरक्षित होगी और ग्रामीणों की आजीविका पर संकट कम होगा।

कटान रोकने के लिए कौन-कौन से उपाय संभव हैं?

तटबंध निर्माण, पत्थर पिचिंग, वृक्षारोपण और जल प्रवाह नियंत्रण जैसे उपाय प्रभावी माने जाते हैं।

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