भाजपा का महिला आरक्षण धरना स्थगित : अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन से शोक में डूबा राजनीतिक गलियारा
38 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए प्रतीक यादव, जौनपुर में भाजपा ने रद्द किया पांच दिवसीय प्रदर्शन कार्यक्रम
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर में भारतीय जनता पार्टी द्वारा महिला आरक्षण के समर्थन में आयोजित किया जाने वाला पांच दिवसीय धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम अचानक स्थगित कर दिया गया। पार्टी ने यह निर्णय राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन के बाद लिया। उनके असामयिक निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
भाजपा मीडिया विभाग के जनपद प्रभारी आमोद सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष के खिलाफ प्रस्तावित धरना कार्यक्रम अब फिलहाल आयोजित नहीं किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने शोक की इस घड़ी में कार्यक्रम को रद्द करने का निर्णय लिया है।
11 से 15 मई तक चलना था आंदोलन
भाजपा की ओर से जौनपुर के लोहिया पार्क में 11 मई से 15 मई तक विशेष धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम तय किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरना और महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को लेकर भाजपा की प्रतिबद्धता को जनता के सामने रखना था।
कार्यक्रम में महिला मोर्चा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी प्रस्तावित थी। लेकिन जैसे ही प्रतीक यादव के निधन की सूचना मिली, संगठन स्तर पर तत्काल बैठक हुई और कार्यक्रम स्थगित करने का फैसला लिया गया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह समय राजनीतिक गतिविधियों का नहीं बल्कि संवेदना और शोक प्रकट करने का है। पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे श्रद्धांजलि सभाओं में शामिल होकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
कौन थे प्रतीक यादव?
प्रतीक यादव समाजवादी परिवार से जुड़े एक चर्चित नाम थे, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग की दुनिया में बनाई थी। वे मुलायम सिंह यादव परिवार के सदस्य थे और अपर्णा यादव के पति होने के साथ-साथ अपनी अनुशासित जीवनशैली के लिए भी पहचाने जाते थे।
साल 2012 में उनकी फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली थी। उन्हें एक प्रतिष्ठित फिटनेस मैगजीन में भी स्थान मिला था, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनकी मजबूत कद-काठी और फिटनेस को देखकर लोग उन्हें स्वास्थ्य और अनुशासन का प्रतीक मानते थे।
प्रतीक यादव का व्यक्तित्व केवल जिम और फिटनेस तक सीमित नहीं था। पशुओं के प्रति उनका विशेष लगाव था। वे अक्सर पशु संरक्षण और देखभाल को लेकर सक्रिय दिखाई देते थे। उनके करीबी बताते हैं कि उन्हें खास तौर पर गायों और पालतू पशुओं से बेहद प्रेम था।
फेफड़ों की बीमारी बनी मौत की वजह
प्रतीक यादव के निधन के बाद जो शुरुआती जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार वे फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। हालांकि परिवार की ओर से बीमारी को लेकर अधिकृत रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन करीबी सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी।
उनकी मौत ने एक बड़ा संदेश भी छोड़ दिया है कि केवल बाहरी फिटनेस ही स्वास्थ्य की गारंटी नहीं होती। शरीर चाहे कितना भी मजबूत क्यों न दिखे, गंभीर बीमारियां भीतर से इंसान को कमजोर कर सकती हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग यही चर्चा करते दिखाई दिए कि फिटनेस आइकन माने जाने वाले प्रतीक यादव का इतनी कम उम्र में निधन होना बेहद चौंकाने वाला और दुखद है।
राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
प्रतीक यादव के निधन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की। भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
जौनपुर भाजपा इकाई के कई नेताओं ने कहा कि अपर्णा यादव लंबे समय से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। ऐसे समय में पूरा संगठन उनके साथ खड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा कार्यक्रम स्थगित करना केवल औपचारिक फैसला नहीं बल्कि राजनीतिक संवेदनशीलता का संकेत भी है। विरोध और आंदोलन की राजनीति के बीच मानवीय संवेदना को प्राथमिकता देना संगठनात्मक संस्कृति को भी दर्शाता है।
महिला आरक्षण मुद्दे पर भाजपा की तैयारी
धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम भले ही रद्द हो गया हो, लेकिन भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर लगातार सक्रिय बनी हुई है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है और महिला आरक्षण बिल उसी दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
जौनपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान भाजपा विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाने वाली थी। महिला मोर्चा की कार्यकर्ता भी घर-घर अभियान चलाने की तैयारी में थीं। हालांकि अब यह कार्यक्रम आगे किस तारीख को आयोजित होगा, इसको लेकर पार्टी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
सोशल मीडिया पर उमड़ा भावनाओं का सैलाब
प्रतीक यादव के निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। फिटनेस जगत से जुड़े लोगों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उन्हें याद करते हुए संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कई लोगों ने उनकी पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि इतनी फिट और ऊर्जावान शख्सियत का अचानक चले जाना विश्वास करना मुश्किल है। वहीं कुछ लोगों ने स्वास्थ्य को लेकर नियमित जांच और सतर्कता की जरूरत पर भी चर्चा की।
कम उम्र में निधन ने छोड़े कई सवाल
38 वर्ष की उम्र में प्रतीक यादव का निधन केवल एक परिवार के लिए नहीं बल्कि उन तमाम लोगों के लिए भी बड़ा झटका है जो उन्हें प्रेरणा मानते थे। उनकी फिटनेस, अनुशासन और शांत स्वभाव की चर्चा अक्सर होती थी। लेकिन अब उनका अचानक यूं चले जाना लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य को लेकर केवल बाहरी रूप पर्याप्त नहीं है।
जौनपुर में भाजपा का कार्यक्रम रद्द होना इस बात का भी संकेत है कि राजनीतिक गतिविधियों से ऊपर मानवीय संवेदनाएं आज भी महत्व रखती हैं। फिलहाल पूरा राजनीतिक और सामाजिक वातावरण शोक में डूबा हुआ है और लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।






