माँ के सम्मान में गूंजा विद्यालय परिसर, बच्चों ने कविता-गीत और क्राफ्ट से जीता सबका दिल
बी एन पब्लिक स्कूल में मातृ दिवस समारोह का भव्य आयोजन, नन्हे बच्चों की प्रस्तुतियों ने भावुक किया माहौल
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। स्थानीय उपनगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार बी एन पब्लिक स्कूल में शनिवार को मातृ दिवस के अवसर पर एक भावनात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष समारोह में नर्सरी से लेकर कक्षा 10 तक के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मां के प्रति प्रेम, सम्मान और भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का आयोजन 9 मई 2026 को विद्यालय प्रांगण में किया गया, जहां पूरे वातावरण में मातृत्व के सम्मान और स्नेह की अनूठी झलक देखने को मिली। बच्चों ने शायरी, कविता, गीत, भाषण और क्राफ्ट गतिविधियों के जरिए अपनी मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान कई बार ऐसा भावुक माहौल बना कि उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों की आंखें भी नम हो गईं।
नन्हे बच्चों की मासूम प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और स्वागत गीत के साथ हुई। इसके बाद छोटे-छोटे बच्चों ने रंग-बिरंगे कार्ड, हस्तनिर्मित क्राफ्ट और चित्रों के माध्यम से अपनी मां के प्रति प्रेम को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया। नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की मासूम अभिव्यक्तियों ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने “मां” विषय पर आधारित कविताएं और शायरियां प्रस्तुत कर समारोह को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों में यह बताने का प्रयास किया कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली पहली गुरु होती है।
गीतों और कविताओं से गूंज उठा विद्यालय परिसर
समारोह में प्रमुख रूप से शिवांश पांडेय, शानवी गुप्ता, सौम्या, सुप्रिया, सांची, शगुन, राज, अस्तित्व, आकांक्षा, परी, प्रिया और श्रुति समेत कई विद्यार्थियों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
इन बच्चों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से यह साबित कर दिया कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। किसी ने कविता के जरिए मां की ममता का वर्णन किया तो किसी ने गीतों के माध्यम से उनके त्याग और संघर्ष को शब्द दिए।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब सिद्धि अर्पिता और आयुषी ने “मेरी मां” नामक गीत प्रस्तुत किया। दोनों छात्राओं की मधुर प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
“मां बच्चों की पहली गुरु होती है” : प्रधानाचार्य
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अरविंद प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को मंच मिलता है और उनमें आत्मविश्वास का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि मां संसार की सबसे अनुपम रचना है और हर बच्चे के जीवन की पहली शिक्षक भी वही होती है। मां के संस्कार ही बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
प्रधानाचार्य ने कहा कि मातृ दिवस केवल एक दिन मनाने का विषय नहीं है, बल्कि मां का सम्मान हर दिन और हर पल किया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और उनके त्याग को समझें।
सांस्कृतिक माहौल में दिखी शिक्षा और संस्कार की झलक
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक और पारिवारिक भावनाओं से सराबोर दिखाई दिया। मंच संचालन भी विद्यार्थियों द्वारा ही किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया।
विद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शिक्षकों और अभिभावकों का भी आभार व्यक्त किया। समारोह में मौजूद अभिभावकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से भी जोड़ते हैं।
कार्यक्रम में राजेश यादव, सोनू कुमार, बलराम यादव, तालिब हुसैन, राज पांडेय, नंदिनी गुप्ता, अनिता यादव, प्रतिभा दीक्षित, दिव्या, पूनम, पूजा, अंशु, निकी और संगम समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने का सशक्त माध्यम बने ऐसे आयोजन
शिक्षाविदों का मानना है कि विद्यालयों में आयोजित इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मंच पर प्रस्तुति देने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें सामाजिक मूल्यों के प्रति समझ विकसित होती है।
बी एन पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित मातृ दिवस समारोह ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की गई। पूरे समारोह ने यह साबित कर दिया कि मां के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना आज भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है।










