भरतपुर

बदहाल पड़ा ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग, जलभराव और गड्ढों से श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर संकट

अधिक मास शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी, लेकिन डीग जिले में परिक्रमा मार्ग की व्यवस्थाएं अब भी भगवान भरोसे

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

राजस्थान के Deeg जिले में आगामी अधिक मास 2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खुलती नजर आ रही है। 17 मई 2026, रविवार से अधिक मास की शुरुआत होनी है, लेकिन उससे पहले ब्रज के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले 84 कोस परिक्रमा मार्ग की हालत श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

हर वर्ष अधिक मास के दौरान लाखों श्रद्धालु ब्रज क्षेत्र में पहुंचकर पैदल परिक्रमा करते हैं। डीग जिले में पड़ने वाला लगभग 24 कोस यानी करीब 67 किलोमीटर लंबा परिक्रमा मार्ग इस धार्मिक यात्रा का अहम हिस्सा माना जाता है। मगर इस बार मार्ग की स्थिति ऐसी है कि श्रद्धालुओं को आस्था के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है।

मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, जलभराव, मिट्टी कटाव, अतिक्रमण और अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। हालत यह है कि परिक्रमा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक बड़े स्तर पर सुधार कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।

बरौली धाऊ गांव में जलभराव से सबसे ज्यादा परेशानी

कामवन क्षेत्र के बरौली धाऊ गांव के पास 84 कोस परिक्रमा मार्ग की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। यहां सड़क पर लंबे हिस्से में पानी जमा होने से रास्ता दलदल में बदल गया है। श्रद्धालुओं को पानी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे फिसलने और चोट लगने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के बाद पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या लगातार बनी रहती है। अधिक मास के दौरान जब हजारों श्रद्धालु एक साथ इस मार्ग से गुजरेंगे, तब स्थिति और गंभीर हो सकती है।

गड्ढों और टूटी सड़क ने बढ़ाई मुश्किलें

परिक्रमा मार्ग पर कई जगह सड़कें उखड़ी हुई हैं। कहीं गहरे गड्ढे हैं तो कहीं मिट्टी का कटाव हो चुका है। पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को असमान रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह यात्रा जोखिम भरी साबित हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल अधिक मास से पहले सड़क मरम्मत और सफाई का कार्य कराया जाता था, लेकिन इस बार अभी तक व्यापक स्तर पर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही।

अतिक्रमण और निर्माण सामग्री बनी बाधा

परिक्रमा मार्ग पर अतिक्रमण भी बड़ी समस्या बन चुका है। कई जगह लोगों ने निर्माण सामग्री डाल रखी है, जिससे रास्ता संकरा हो गया है। ईंट, बजरी और पत्थरों के ढेर श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा बन रहे हैं।

इसके अलावा रास्ते के किनारे उगी कंटीली झाड़ियां भी परेशानी का कारण बनी हुई हैं। पैदल परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के कपड़े और पैर इन झाड़ियों से घायल हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई और अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा।

खराब हैंडपंप और पेयजल संकट

अधिक मास के दौरान भीषण गर्मी में हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं। ऐसे में पेयजल व्यवस्था सबसे जरूरी मानी जाती है। लेकिन परिक्रमा मार्ग पर कई हैंडपंप खराब पड़े हैं और कई स्थानों पर पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है।

श्रद्धालुओं और संत समाज का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने प्रशासन से अस्थायी जल टैंकर और पानी के शिविर लगाने की मांग की है।

झुके बिजली के तार भी बने खतरा

परिक्रमा मार्ग पर कई स्थानों पर बिजली के तार नीचे झुके हुए दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति श्रद्धालुओं के लिए हादसे का कारण बन सकती है। विशेषकर बरसात या नमी की स्थिति में यह खतरा और बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत विभाग को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अधिक मास के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए यह लापरवाही गंभीर मानी जा रही है।

डीएम के निरीक्षण के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

डीग के जिलाधिकारी Mayank Manish ने 23 अप्रैल 2026 को स्वयं परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को सड़क मरम्मत, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे। हालांकि, निरीक्षण के कई दिन बाद भी जमीनी स्तर पर हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। इससे प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्देश केवल फाइलों तक सीमित होकर रह गए हैं।

संत समाज ने जताई नाराजगी

आदिबद्री धाम के संत Radhe Shyam Das Badri ने भी परिक्रमा मार्ग की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि आदिबद्री धाम स्थित तृप्ति कुंड की सफाई कर उसे बोरिंग के पानी से भरा जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके। लेकिन उन्होंने कहा कि मुख्य परिक्रमा मार्ग की स्थिति अभी भी बेहद खराब है। संत समाज का मानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन से पहले प्रशासन को युद्धस्तर पर तैयारियां करनी चाहिए थीं।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा आयोजन

ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक मानी जाती है। अधिक मास के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यह आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्मशालाएं, छोटे दुकानदार, परिवहन और स्थानीय व्यापार इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन यदि परिक्रमा मार्ग की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बढ़ सकता है खतरा

अधिक मास शुरू होने में अब बेहद कम समय बचा है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करना है। स्थानीय लोगों और संत समाज ने मांग की है कि सड़क मरम्मत, जल निकासी, पेयजल, सफाई और विद्युत व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए।

यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो अधिक मास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और प्रशासन को गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।

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