जौनपुर

पूर्वांचल विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह : डिजीलॉकर में अपलोड हुईं डिग्रियां, मेधावी विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण पदक

जौनपुर: शिक्षा, तकनीक और सम्मान का संगम बना दीक्षांत समारोह

कीरत यादव की रिपोर्ट

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में सोमवार को आयोजित 30वां दीक्षांत समारोह शिक्षा, उपलब्धि और नवाचार का यादगार आयोजन बन गया। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की डिग्रियों को डिजीलॉकर पर अपलोड कर डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती दी। इसके साथ ही विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए यह अवसर लंबे समय तक यादगार रहने वाला साबित हुआ।

आईपैड के जरिए पूरी हुई डिजिटल डिग्री प्रक्रिया

दीक्षांत समारोह का सबसे प्रमुख आकर्षण डिजिटल डिग्री वितरण प्रक्रिया रही। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आईपैड के माध्यम से एक क्लिक कर विद्यार्थियों की डिग्रियों को डिजीलॉकर में अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी की।

इस पहल से विद्यार्थियों को भविष्य में अपनी डिग्री सुरक्षित रखने और किसी भी सरकारी या निजी संस्थान में ऑनलाइन सत्यापन के लिए उपलब्ध कराने में काफी सुविधा मिलेगी। डिजिटल डिग्री व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी बल्कि दस्तावेजों के खोने या क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाएगी।

मेधावी छात्र-छात्राओं को मिला स्वर्ण पदक

समारोह में विभिन्न संकायों के उन विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। राज्यपाल ने इन प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान कर उनकी मेहनत, लगन और शैक्षणिक उत्कृष्टता की सराहना की।

स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। सम्मान मिलने के बाद विद्यार्थियों ने इसे अपने परिवार, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के सहयोग का परिणाम बताया।

आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराई गई आवश्यक किट

दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सरोकारों की भी झलक देखने को मिली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जौनपुर और गाजीपुर जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवश्यक किट उपलब्ध कराईं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के समग्र विकास की शुरुआत प्रारंभिक शिक्षा और बेहतर पोषण से होती है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों को संसाधनों से सशक्त बनाना सरकार और समाज दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

विश्वविद्यालय की पत्रिका और पुस्तकों का हुआ विमोचन

दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘गतिमान’ सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रस्तुत करने वाली विभिन्न प्रकाशनों को सार्वजनिक किया गया।

इसके अलावा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान बताया।

गोद लिए गए गांवों के विद्यार्थियों को भी मिला मंच

विश्वविद्यालय की सामाजिक पहल के अंतर्गत गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को भी दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया गया।

इन बच्चों को पुरस्कार देकर उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया गया। विश्वविद्यालय का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उचित अवसर और मंच मिलने पर वे भी शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। इस पहल की समारोह में उपस्थित लोगों ने सराहना की।

विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र निर्माण का संदेश

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के विकास, देश की प्रगति और मानवता की सेवा के लिए करें। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता तभी सार्थक होगी जब शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी ईमानदारी से निर्वहन किया जाए।

मुख्य अतिथियों ने साझा किए प्रेरणादायक विचार

समारोह में मुख्य अतिथि मेजर जनरल गौरव गौतम ने विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए मेहनत, ईमानदारी और सकारात्मक सोच सबसे बड़ी पूंजी होती है।

उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सुधारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवाओं से नवाचार और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने अपने संबोधन में संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक के उपयोग और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आग्रह किया।

गणमान्य लोगों की मौजूदगी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ आयोजन

30वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मेजर जनरल गौरव गौतम, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. वंदना सिंह, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने अतिथियों के साथ स्मृति तस्वीरें खिंचवाईं। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में उल्लास, सम्मान और उपलब्धि का वातावरण बना रहा।

शिक्षा के साथ डिजिटल बदलाव का संदेश

पूर्वांचल विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का आयोजन नहीं रहा, बल्कि डिजिटल शिक्षा, प्रतिभा सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रभावी संदेश भी लेकर आया। डिजीलॉकर में डिग्रियों का अपलोड, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, आंगनबाड़ी केंद्रों को सहयोग तथा ग्रामीण बच्चों को प्रोत्साहन जैसी पहलें इस समारोह की विशेष पहचान बनकर सामने आईं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

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