मामूली बारिश में डूबने लगा शहर, ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली ने बढ़ाई लोगों की चिंता
बरसात से पहले ही बिगड़े हालात, लोगों ने जताई बड़े खतरे की आशंका
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट शहर में हर साल बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है, लेकिन इस बार तो मई महीने की मामूली बारिश ने ही नगर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सात और आठ मई को हुई हल्की बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख मार्गों और बाजारों में पानी भर गया। जगह-जगह सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यदि जून और जुलाई में तेज बारिश हुई तो हालात और अधिक भयावह हो सकते हैं।
शहर के बेड़ी पुलिया, गैस एजेंसी मार्ग, शंकर बाजार, पटेल तिराहा-देवांगना मार्ग और एलआईसी-धुस मैदान मार्ग समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण और नालों की ऊंचाई में तकनीकी खामियों के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। नाले सड़क से ऊंचे बनाए गए हैं, जिससे बरसाती पानी सड़कों पर ही जमा हो जाता है।
बेड़ी पुलिया और गैस एजेंसी मार्ग बना तालाब
बारिश के बाद सबसे ज्यादा समस्या बेड़ी पुलिया और गैस एजेंसी के आसपास देखने को मिली। यहां सड़क पर पानी भरने से लोगों को गंदे पानी के बीच होकर गुजरना पड़ा। पैदल चलने वाले राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि दोपहिया वाहन चालक भी फिसलन और कीचड़ से परेशान दिखाई दिए।
स्थानीय निवासी पंकज सिंह ने बताया कि गैस एजेंसी तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। फुटपाथ और सड़क दोनों पर पानी जमा होने से ग्राहकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
शंकर बाजार समेत कई इलाकों में बिगड़ी स्थिति
चित्रकूट का व्यस्त इलाका शंकर बाजार भी जलभराव की समस्या से अछूता नहीं रहा। बाजार में पानी भरने से दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को परेशानी हुई। कई दुकानों के सामने कीचड़ जमा हो गया, जिससे व्यापार भी प्रभावित हुआ।
स्थानीय निवासी रामप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सड़क और नालों का निर्माण बिना उचित योजना के किया गया है। नाले सड़क से ऊंचे होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
पटेल तिराहा और एलआईसी मार्ग पर बढ़ा खतरा
पटेल तिराहा-देवांगना मार्ग और एलआईसी-धुस मैदान मार्ग पर भी बारिश के बाद लंबे समय तक पानी जमा रहा। इन मार्गों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। जलभराव के कारण सड़कें दलदल जैसी दिखाई देने लगीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगामी मानसून में हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। कई इलाकों में मकानों और दुकानों में पानी घुसने की आशंका भी जताई जा रही है।
खराब ड्रेनेज सिस्टम बना बड़ी समस्या
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर में ड्रेनेज सिस्टम की उचित योजना नहीं बनाई गई। कई स्थानों पर नाले संकरे हैं, जबकि कुछ जगहों पर उनकी ऊंचाई सड़क से अधिक हो गई है। इससे पानी का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है और सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नगर के पुराने इलाकों में सीवर और नालों की नियमित सफाई भी नहीं हो रही है। नालियों में जमा कचरा और मिट्टी पानी के बहाव को रोक देते हैं। परिणामस्वरूप मामूली बारिश भी लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है।
बरसात से पहले प्रशासनिक तैयारी पर उठे सवाल
मई महीने में हुई हल्की बारिश ने ही नगर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि यदि अभी से हालात इतने खराब हैं तो भारी बारिश के दौरान शहर में गंभीर जलभराव और सड़क धंसने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। कई नागरिकों ने नगर पालिका से तत्काल स्थायी समाधान की मांग की है।
क्या बोले नगर पालिका अध्यक्ष
इस मामले में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि जिन स्थानों पर नाला निर्माण कार्य कराया जा रहा है, वहां लोक निर्माण विभाग द्वारा भी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या को दिखवाया जाएगा और संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
जनता पूछ रही — आखिर जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की मूलभूत सुविधाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं। सड़क निर्माण और नाला निर्माण में समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। शहरवासियों का सवाल है कि आखिर हर साल बरसात से पहले दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही शहर पानी में क्यों डूबने लगता है? यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं।










