शिक्षा और समाजवादी राजनीति के पुरोधा रुद्र प्रताप सिंह का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
पूर्व विधायक, शिक्षाविद और समाजवादी चिंतक को आज राजकीय सम्मान के साथ दी जाएगी अंतिम विदाई
रिपोर्ट: इरफान अली लारी
देवरिया जनपद ने शिक्षा, समाजवादी राजनीति और वैचारिक नेतृत्व की दुनिया का एक ऐसा नाम खो दिया है, जिसकी पहचान केवल एक जनप्रतिनिधि तक सीमित नहीं थी। देवरिया सदर से पूर्व विधायक, वरिष्ठ शिक्षाविद, समाजवादी चिंतक और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के विचारों के प्रखर समर्थक रुद्र प्रताप सिंह का मंगलवार को गोरखपुर के एक निजी चिकित्सालय में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इसे जनपद की अपूरणीय क्षति बताया।
बुधवार को उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव पकड़ी बाबू से सुबह 9 बजे निकलेगी, जबकि अंतिम संस्कार छोटी गंडक नदी स्थित सवरेजी पुल के निकट सुबह 11 बजे संपन्न होगा।
शिक्षा और समाजवाद को समर्पित रहा पूरा जीवन
रुद्र प्रताप सिंह का जीवन शिक्षा और समाजवादी विचारधारा के प्रति पूर्ण समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों को अपनाया और समाज में समानता, सामाजिक न्याय तथा शिक्षा के प्रसार को अपनी प्राथमिकता बनाया।
वे देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और विधायक के रूप में जनता के बीच अपनी सरलता, वैचारिक स्पष्टता और जनसरोकारों के कारण विशेष पहचान रखते थे। उन्हें समाजवादी आंदोलन की बौद्धिक आवाज के रूप में भी सम्मान प्राप्त था। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर उनके विचारों को गंभीरता से सुना जाता था।
शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी अमिट पहचान
राजनीति के साथ-साथ रुद्र प्रताप सिंह ने शिक्षा जगत में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वे रामपुर अवस्थी के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रहे और भाटपार रानी स्थित मदन मोहन मालवीय इंटरमीडिएट कॉलेज में लंबे समय तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं।
उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। इसी सोच के साथ उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया शिक्षण संस्थान, पकड़ी बाबू की स्थापना की, जिसने क्षेत्र के अनेक विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराया। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में अनेक छात्र जीवन में आगे बढ़े और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित की।
उनके सहकर्मी और छात्र आज भी उन्हें अनुशासनप्रिय, सरल, विद्वान और प्रेरणादायी शिक्षक के रूप में याद करते हैं।
सार्वजनिक जीवन में रही मजबूत वैचारिक पहचान
रुद्र प्रताप सिंह केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक गंभीर चिंतक भी थे। सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर वे लगातार सक्रिय रहते थे। विभिन्न मंचों पर आयोजित बहसों, संगोष्ठियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रहती थी, जहां वे अपने स्पष्ट और तार्किक विचारों से लोगों को प्रभावित करते थे।
समाजवादी विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यही कारण है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी दलों के नेता उनका सम्मान करते थे।
अंतिम यात्रा का कार्यक्रम
परिजनों के अनुसार रुद्र प्रताप सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह उनके पैतृक गांव पकड़ी बाबू लाया जाएगा। वहां अंतिम दर्शन के बाद सुबह 9 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी। इसके बाद छोटी गंडक नदी के किनारे सवरेजी पुल के निकट राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना है।
राजनीतिक और शैक्षणिक जगत ने जताया गहरा शोक
रुद्र प्रताप सिंह के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। सभी ने उनके निधन को जनपद के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
शोक व्यक्त करने वालों में जिला पंचायत अध्यक्ष पंडित गिरीश चंद्र तिवारी, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं शिक्षण संस्थान प्रबंधक राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह, विधायक सभा कुंवर कुशवाहा, सांसद रमाशंकर विद्यार्थी, पूर्व सांसद रविंद्र कुशवाहा, पूर्व विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय, समाजवादी पार्टी के प्रांतीय उपाध्यक्ष अशोक सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक सुभाष लाल श्रीवास्तव, पूर्व सांसद कनकलता सिंह, सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव, शिक्षक नेता अवधेश सिंह, हरिश्चंद्र मौर्य, डॉ. अरविंद सहाय, राजकुमार शाही, डॉ. तेज प्रताप सिंह, डॉ. भानु प्रताप सिंह, हरिचरण कुशवाहा, बिंदा सिंह कुशवाहा, डॉ. विनय कुमार पांडेय सहित अनेक गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनपद के लिए अपूरणीय क्षति
रुद्र प्रताप सिंह के निधन के साथ देवरिया ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करना और शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को सशक्त बनाना भी है।
उनके जाने से समाजवादी विचारधारा, शिक्षा जगत और जनपद की राजनीति में एक ऐसा रिक्त स्थान उत्पन्न हुआ है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं मानी जा रही। उनके कार्य, विचार और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।









