19 अक्टूबर 2026 7:18 पूर्वाह्न

लघु फिल्म से बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जागरूकता : मऊ में मिशन शक्ति फेज-6.0 की पहल

मऊ के उमापुर में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत बाल विवाह रोकथाम जागरूकता कार्यक्रम में शपथ लेते बच्चे, ग्रामीण, महिला पुलिसकर्मी और अधिकारी।

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रिपोर्टर: जगदंबा उपाध्याय

मऊ। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से मऊ जिले की ग्राम पंचायत उमापुर में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लघु फिल्म के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों, बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों तथा उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और आपातकालीन सहायता सेवाओं के हेल्पलाइन नंबरों के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल विवाह के नुकसान बताना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदाय को इस सामाजिक बुराई की रोकथाम के लिए अपनी जिम्मेदारी समझाना भी रहा। आयोजकों ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे बाल विवाह को सामान्य सामाजिक परंपरा मानने के बजाय बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़े गंभीर विषय के रूप में देखें तथा ऐसी किसी भी घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत जागरूकता अभियान

ग्राम पंचायत उमापुर में आयोजित इस कार्यक्रम में एएचटी थाना प्रभारी अजीत चौधरी और जिला मिशन समन्वयक, हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वूमेन श्रीमती अर्चना राय की अध्यक्षता रही। अपराजिता सामाजिक समिति के प्रिंस कुमार ने कार्यक्रम के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मिशन शक्ति टीम, पुलिस विभाग और महिला सशक्तीकरण से जुड़े सदस्यों ने सहभागिता करते हुए ग्रामीणों को बाल विवाह की रोकथाम और महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि बाल विवाह की समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए परिवारों, ग्राम पंचायतों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को भी आगे आना होगा। यदि समाज समय रहते बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील हो जाए, तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में प्रभावी भूमिका निभाई जा सकती है।

लघु फिल्म के माध्यम से समझाए बाल विवाह के दुष्परिणाम

जागरूकता कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बाल विवाह पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन रहा। बच्चों और कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों को फिल्म दिखाकर यह समझाने का प्रयास किया गया कि कम उम्र में विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है।

फिल्म के माध्यम से बताया गया कि बाल विवाह के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित होने, कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ने और बेहतर भविष्य के अवसर सीमित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित जीवन पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। कम उम्र में विवाह बच्चों को अपने सपनों और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसरों से भी वंचित कर सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को समझाया गया कि बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने, अपने व्यक्तित्व का विकास करने और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। बाल विवाह को रोकना केवल कानून का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सम्मान, अधिकारों और बेहतर भविष्य की रक्षा करने से भी जुड़ा हुआ है।

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, बालिकाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को योजनाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें उपलब्ध सहायता का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना था।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के प्रमुख उद्देश्यों तथा लाभों के बारे में बताया गया।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से पात्र परिवारों की बालिकाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। योजना का उद्देश्य बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और उनकी शिक्षा एवं विकास को प्रोत्साहित करना है।

निराश्रित महिला पेंशन योजना के संबंध में जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को मिलने वाली सहायता के बारे में बताया गया। वहीं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपलब्ध निर्धारित लाभों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से पात्र बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला गया।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि पात्र जोड़ों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार विवाह संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उपस्थित लोगों को योजनाओं की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देकर पात्र लाभार्थियों को संबंधित विभागों से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।

महिला पुलिसकर्मियों ने बताए सुरक्षा और सहायता के हेल्पलाइन नंबर

कार्यक्रम में उप निरीक्षक अंशी शुक्ला ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 1090, वन स्टॉप सेंटर 181, आपातकालीन पुलिस सेवा 112 और एंबुलेंस सेवाओं 108 एवं 102 के बारे में बताया गया। उपस्थित लोगों को इन सेवाओं का उद्देश्य समझाते हुए जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता सेवा से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।

महिला पुलिसकर्मी ज्योति चौहान और प्रिया यादव ने भी बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को प्रभावित करता है। इसे रोकने के लिए परिवार और समाज के प्रत्येक सदस्य को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी बच्चे के विवाह की कम उम्र में तैयारी होने की जानकारी मिले, तो चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से इसकी सूचना दें।

बाल विवाह रोकने में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की भूमिका अहम

जागरूकता कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह की रोकथाम में ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों और समाज के प्रभावशाली लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाकर इस कुप्रथा पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता जैसे स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों की सहभागिता से बाल विवाह से जुड़े मामलों की पहचान करने और जरूरतमंद परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। बच्चों की शिक्षा जारी रखने, बालिकाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने और परिवारों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने से भी सामाजिक जागरूकता को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों को यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह की रोकथाम किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, प्रशासन, ग्राम पंचायत, सामाजिक संगठन और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।

बाल विवाह समाप्त करने की दिलाई गई शपथ

कार्यक्रम में तृप्ति राय, जेंडर स्पेशलिस्ट, महिला कांस्टेबल वंदना, विपिन यादव, अभिषेक सिंह, मिशन शक्ति टीम के सदस्य, एएचटी थाना के कर्मचारी, ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों को बाल विवाह समाप्त करने की शपथ दिलाई गई। सभी से अपील की गई कि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को इस सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूक करें तथा बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं।

आयोजकों ने विशेष रूप से कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 अथवा आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना दें, ताकि समय रहते संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिल सके।

मऊ की ग्राम पंचायत उमापुर में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम बाल विवाह की रोकथाम, महिला सशक्तीकरण और बाल अधिकारों के प्रति ग्रामीणों को संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है और जागरूकता, शिक्षा तथा सामूहिक सहभागिता से ही बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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