रिपोर्ट : ठाकुर बख्श सिंह
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा से पति-पत्नी के रिश्ते और पारिवारिक विवाद को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति की कथित हत्या के मामले में उसकी पत्नी, नाबालिग बेटी और बेटी के 22 वर्षीय प्रेमी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पति अपनी नाबालिग बेटी के प्रेम संबंध का विरोध करता था। इसी विरोध को लेकर घर में लगातार विवाद चल रहा था और कथित तौर पर इसी नाराजगी ने एक खौफनाक साजिश का रूप ले लिया।
पुलिस के अनुसार, 42 वर्षीय मनोज सोनी 18 अप्रैल को अचानक लापता हो गए थे। काफी समय तक उनका कोई पता नहीं चला। बाद में पूछताछ और जांच के दौरान उनकी पत्नी नैना, नाबालिग बेटी और बेटी के प्रेमी विमल चौधरी की भूमिका सामने आई। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस पूरे मामले की सबसे बड़ी पहेली अभी भी मनोज के शव या उनके अवशेषों की बरामदगी बनी हुई है।
18 अप्रैल को अचानक लापता हुए थे मनोज सोनी
मामला मथुरा के गोविंदा नगर थाना क्षेत्र की गणेश धाम कॉलोनी से जुड़ा है। यहां रहने वाले मनोज सोनी 18 अप्रैल से अचानक घर से गायब हो गए। शुरुआती दौर में परिवार की ओर से उनकी तलाश की गई, लेकिन लंबे समय तक उनका कोई सुराग नहीं मिला।
मनोज के अचानक गायब होने के बाद परिवार और परिचितों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे। बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच आगे बढ़ने के साथ घटनाक्रम की ऐसी कड़ियां सामने आईं, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया।
पुलिस के मुताबिक, मनोज की पत्नी नैना, उनकी नाबालिग बेटी और बेटी का प्रेमी विमल चौधरी इस मामले में संदिग्ध पाए गए। विमल चौधरी डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करता है।
बेटी के प्रेम संबंध को लेकर घर में होता था विवाद
पुलिस की पूछताछ में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, मनोज को अपनी बेटी और विमल चौधरी के बीच चल रहे प्रेम संबंध की जानकारी हो गई थी। वह इस रिश्ते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे और इसका लगातार विरोध कर रहे थे।
बताया गया है कि बेटी के प्रेम संबंध को लेकर परिवार में कई बार विवाद की स्थिति बनती थी। मनोज का विरोध पत्नी और बेटी को पसंद नहीं था। इसी पारिवारिक तनाव के बीच कथित तौर पर मनोज को रास्ते से हटाने की योजना तैयार की गई।
पुलिस जांच के अनुसार, इस साजिश में मनोज की पत्नी, उनकी नाबालिग बेटी और बेटी का प्रेमी शामिल हुए। जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
दूध में नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 18 अप्रैल की रात कथित तौर पर मनोज को दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया। नशीला पदार्थ लेने के बाद जब वह गहरी नींद में चले गए, तब उन पर हमला किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि हमले के दौरान भारी वस्तु से वार किए गए। पुलिस का दावा है कि इसी हमले में मनोज की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर शव को कंबल में लपेटा और उसे स्कूटर के जरिए यमुना नदी के आसपास के इलाके में ले गए।
पुलिस के मुताबिक, शव को ठिकाने लगाने के लिए अक्रूर गांव के पास जंगल क्षेत्र में ले जाया गया था। वहां शव को जलाने का प्रयास किए जाने और बाद में अवशेषों को जमीन में दबाए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, पुलिस के लिए अभी इस दावे की पूरी तरह पुष्टि करना बाकी है, क्योंकि मृतक के शव या उसके अवशेष अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं।
सबूत मिटाने की भी कोशिश का आरोप
मामले की जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि कथित हत्या के बाद आरोपियों ने घटना से जुड़े सबूत नष्ट करने का प्रयास किया। बताया गया है कि मनोज के कपड़े और कुछ दस्तावेजों को घर के बाहर जलाया गया।
पुलिस ने जांच के दौरान कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किया गया स्कूटर, कंबल और जली हुई वस्तुओं को बरामद किया है। इन वस्तुओं को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस अब बरामद सामान और आरोपियों के बयानों को आपस में मिलाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर वापस ले ली
मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ उस समय आया, जब मनोज के लापता होने के बाद उनकी पत्नी नैना ने 21 अप्रैल को थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन अगले ही दिन उसने बिना स्पष्ट कारण बताए यह रिपोर्ट वापस ले ली।
इसके बाद नैना अपनी बेटी के साथ अपने मायके हाथरस चली गई। मनोज का लंबे समय तक कोई पता नहीं चलने पर उनके बड़े भाई रामबाबू को संदेह हुआ। उन्होंने मामले को गंभीरता से उठाना शुरू किया और मनोज की तलाश के लिए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
इसी दौरान नैना के पिता ब्रजमोहन ने भी अपनी बेटी से सख्ती से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान नैना ने कथित तौर पर घटना से जुड़ी जानकारी अपने पिता को दी। इसके बाद ब्रजमोहन ने मामले की जानकारी मनोज के बड़े भाई रामबाबू और पुलिस को दी।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की गई शिकायत
मृतक के भाई रामबाबू ने मामले में कार्रवाई के लिए पुलिस से संपर्क करने के साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज की।
जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की। इसी क्रम में मनोज की पत्नी नैना, उनकी नाबालिग बेटी और विमल चौधरी की भूमिका पुलिस की जांच के दायरे में आई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 अगस्त को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद नैना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि नाबालिग बेटी को बाल सुधार गृह भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
शव की बरामदगी बनी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अब भी मनोज सोनी के शव को लेकर है। पुलिस को आरोपियों से पूछताछ के दौरान शव को ठिकाने लगाने की जगह के बारे में जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक वहां से शव या उसके अवशेष बरामद नहीं किए जा सके हैं।
पुलिस के सामने एक बड़ी परेशानी मौसम और यमुना के बढ़ते जलस्तर की भी है। लगातार बारिश के कारण नदी किनारे और जंगल क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाना मुश्किल हो रहा है। जमीन की खुदाई और संभावित स्थानों पर खोजबीन के दौरान भी पुलिस को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस अब आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर संभावित स्थानों की तलाश कर रही है। शव या अवशेष मिलने के बाद जांच को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बरामदगी के बाद बदल सकता है मुकदमे का स्वरूप
पुलिस की ओर से फिलहाल मामले में अपहरण और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। चूंकि मृतक का शव या उसके अवशेष अभी तक बरामद नहीं हुए हैं, इसलिए पुलिस के लिए मामले में हत्या के आरोप से संबंधित कानूनी कार्रवाई को अंतिम रूप देना बाकी है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि शव अथवा महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य मिलने के बाद मामले में हत्या से जुड़ी धाराओं को जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि की जाएगी।
पारिवारिक विवाद से शुरू हुई कहानी ने लिया खौफनाक मोड़
यह मामला केवल एक व्यक्ति के लापता होने का नहीं, बल्कि पारिवारिक विवाद के कथित तौर पर बेहद गंभीर अपराध में बदल जाने का मामला बन गया है। एक तरफ बेटी के प्रेम संबंध को लेकर पिता का विरोध था, तो दूसरी तरफ पत्नी और बेटी की नाराजगी बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इसी पारिवारिक तनाव के बीच कथित तौर पर पति की हत्या की साजिश रची गई।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता मनोज सोनी के शव या अवशेषों की बरामदगी, घटनास्थल की पहचान, फोरेंसिक साक्ष्यों का परीक्षण और आरोपियों के बयानों का सत्यापन करना है। शव मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों द्वारा बताए गए घटनाक्रम में कितनी सच्चाई है।
इस सनसनीखेज मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि परिवार के भीतर बढ़ते विवाद और संवादहीनता किस तरह गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है। पुलिस की जांच पूरी होने और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।













