रूस-यूक्रेन युद्ध : मालवाहक जहाज पर रूसी हमले में भारतीय सी-मैन की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
देवरिया के युवक अभिषेक निषाद की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास हुए हमले में गई जान, शिपिंग कंपनी ने परिजनों को दी सूचना; शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध का असर अब भारत के परिवारों तक भी पहुंच रहा है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक युवक की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास हुए रूसी हमले में मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ, जब वह एक मालवाहक जहाज पर सी-मैन के रूप में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। शिपिंग कंपनी की ओर से परिजनों को घटना की जानकारी मिलने के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
ओडेसा बंदरगाह के पास रूसी हमले का शिकार हुआ मालवाहक जहाज
मिली जानकारी के अनुसार, देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव निवासी अभिषेक निषाद, कौशल निषाद के पुत्र थे। वह पेशे से सी-मैन थे और एक विदेशी मालवाहक जहाज ‘गोल्डेन लिओ’ पर कार्यरत थे। बीते 10 जून को वह मुंबई से अपनी ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे।
बताया जा रहा है कि मालवाहक जहाज यूक्रेन से सामान लेकर सीरिया की ओर जा रहा था। इसी दौरान जब जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास पहुंचा, तब वह रूसी हमले की चपेट में आ गया। हमले के बाद जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और उस पर सवार कई लोग लापता हो गए।
शिपिंग कंपनी ने की मौत की पुष्टि
हमले के बाद कई घंटों तक अभिषेक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद शिपिंग कंपनी की ओर से खोजबीन और स्थिति की समीक्षा की गई। सोमवार शाम कंपनी के एजेंट ने फोन पर अभिषेक के परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी।
यह खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। माता-पिता बेसुध हो गए, जबकि रिश्तेदार और ग्रामीण बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचने लगे। पूरे गांव में मातम का माहौल है।
परिवार का इकलौता बेटा था अभिषेक
अभिषेक निषाद अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। परिवार में उनकी दो बहनें साधना और आराधना हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ उन्होंने समुद्री जहाज पर नौकरी शुरू की थी।
परिजनों का कहना है कि अभिषेक मेहनती और जिम्मेदार स्वभाव के थे। विदेश में नौकरी मिलने के बाद पूरे परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अचानक आई इस दुखद खबर ने परिवार की खुशियां छीन लीं।
प्रशासन हुआ सक्रिय, शव भारत लाने की कोशिशें तेज
घटना की जानकारी मिलते ही देवरिया जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से संपर्क कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। वहीं परिवार भारतीय दूतावास, शिपिंग कंपनी और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि अभिषेक का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जा सके।
परिजनों की इच्छा है कि बेटे का अंतिम संस्कार अपने गांव में पूरे सम्मान के साथ किया जाए। इसके लिए आवश्यक कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
युद्ध के कारण समुद्री मार्ग भी बन रहे खतरनाक
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर और ओडेसा बंदरगाह के आसपास का समुद्री क्षेत्र लगातार संवेदनशील बना हुआ है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के संचालन में अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब बड़ी चुनौती बन चुका है।
इससे पहले भी हमले में जा चुकी है एक और युवक की जान
देवरिया जिले के लिए यह पहली ऐसी दुखद घटना नहीं है। इससे पहले सुरौली थाना क्षेत्र के रहने वाले शिवानंद चौरसिया की भी समुद्री हमले में मौत हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, शिवानंद एक जहाज पर इंजन फिटर के पद पर कार्यरत थे। करीब छह महीने पहले वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से लगभग छह लाख रुपये का कर्ज लेकर नौकरी के लिए मुंबई से सिंगापुर गए थे। वापसी के दौरान ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में उनका जहाज हमले की चपेट में आ गया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने भी एक किसान परिवार का सहारा छीन लिया था। अब अभिषेक निषाद की मौत ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है।
विदेशों में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में भारतीय युवा रोजगार के लिए समुद्री जहाजों पर काम करते हैं। युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शिपिंग कंपनियों और संबंधित देशों की बड़ी जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में जहाजों के संचालन के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
परिवार को सरकार से मदद की उम्मीद
अभिषेक निषाद की मौत के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों की मांग है कि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द से जल्द उनका पार्थिव शरीर भारत लाने की व्यवस्था करें। साथ ही परिवार को हरसंभव आर्थिक और प्रशासनिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।
रूस-यूक्रेन युद्ध की आग में एक और भारतीय परिवार की खुशियां राख हो गईं। रोजगार की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में काम कर रहे अभिषेक निषाद अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगे। उनकी मौत ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत पहुंचे, ताकि परिजन अपने बेटे को अंतिम विदाई दे सकें।








