सड़क नहीं तो धान ही सही : ग्रामीणों ने अनोखे प्रदर्शन से उठाई विकास की आवाज

देवरिया के बलुआं गांव में ग्रामीण जर्जर सड़क पर धान की रोपाई कर बलुआं-छेरिहां मार्ग के पक्कीकरण की मांग करते हुए, साथ में संवाददाता इरफान अली लारी का फोटो।

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उज़लाह अली लारी की रिपोर्ट

संस्था। विकास के विशेषज्ञों के बीच जीएम जिले के ग्रामीण क्षेत्र से एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसमें प्रशासन और विकास की कार्यशैली पर सवाल कर दिए गए हैं। वर्षों से खंडहर और कच्चे पड़े मार्ग के पक्केकरण की मांग को लेकर अनावरण ने अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। सड़क पर धान की खेती कर रहे लोगों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जब सड़क पर धान की जगह जैसी स्थिति हो जाए, तो उसका उपयोग भी खेती के लिए कर दिया जाए।

पुनर्मूल्यांकन का यह विरोध सोशल मीडिया और स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और सार्वभौम एकमात्र पासपोर्ट अपनी जिम्मेदारी से सुरक्षित रह रहे हैं। अब जबरन फिल्मों को इस तरह का प्रदर्शन करना पड़ा।

सड़क की दुश्मन बनी लोगों की सबसे बड़ी परेशानी

राष्ट्रीय के अनुसार यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग राजमार्ग (एनएनएच-727ए) से शुरू हुआ बलुआं गांव से गांव हुए चेरिहां के पक्के मार्ग से जुड़ता है। करीब दो किलोमीटर की दूरी वाले इस दूरस्थ क्षेत्र के लिए जीवन रेखा मानी जाती है। प्रतिदिन इसी मार्ग से आसपास के कई क्षेत्र के बाजार, स्कूल, लोग अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य आवश्यक नौकरियों के लिए निकलते हैं।

इन दिनों जूतों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। सड़क पूरी तरह से रंगीन और पानी से भरी होती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। डोपहिया वाहन कंपनी का खतरा बना हुआ है, जबकि चारपाहिया एसोसिएशन का प्रदर्शन लगभग असंभव है। ऐसे में लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करके दूसरे दर्जे का सहारा लिया जाता है।

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बिहार से आने-जाने वालों को भी होती है भारी परेशानी

यह सड़क केवल स्थानीय क्षेत्रीय तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार सीमा से जुड़े कई राज्यों के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग एक ही रास्ते से रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सोसायटी के लिए आते-जाते हैं।

रिवोल्यूशन का कहना है कि खराब सड़कें होने से दोनों राज्यों के लोगों को आदिवासियों का समय और धन की बर्बादी झेलनी पड़ती है। कई बार स्थिति अस्पताल में भर्ती को भी खराब होती है, जिससे गंभीर उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।

रेलवे स्टेशन तक पहुँचने का मुख्य रास्ता

स्थानीय लोगों ने बताया कि बनकटा रेलवे स्टेशन तक पहुँचने के लिए यह सबसे सुविधाजनक और छोटा मार्ग माना जाता है। लेकिन सड़क की खराबी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान लोगों को स्टेशन पर पहुंचने का समय नहीं मिलता, जिससे कई बार ट्रेन पर भी छूट मिलती है।

स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्रों को भी इसी मार्ग से देखें। डायनासोर और डायनासोर के कारण बच्चों को दैनिक जोखिम यात्रा पर जाना पड़ता है। भूत का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति शिक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

धान की रोटी कर दिया अनोखा संदेश

रीटेल ने विरोध का ऐसा तरीका बताया जो पूरी तरह से मेक्सिको के साथ-साथ प्रशासन को भी विचार करने के लिए मजबूर करता है। लोगों ने सड़क पर धान का पौध रोककर यह संदेश दिया कि अगर सड़क की समस्या वाला खेत बना दिया गया है, तो खेती ही कर ली जाए।

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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का अपमान पैदा करना नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यकर्ताओं का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सड़क का निर्माण नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

हर चुनाव में केवल स्वतंत्रता है

नवीनीकरण का आरोप है कि हर चुनाव में सड़क निर्माण का लाभ उठाया जाता है। चुनावी प्रचार के दौरान विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के हित के वादे होते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने पर ही सभी वादे पूरे हो जाते हैं।

लोगों का कहना है कि आजादी के बाद अब तक कई स्मारक बदले, लेकिन इस सड़क की तस्वीर नहीं बदली। विकास योजनाओं की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन शिखर पर उनका लाभ तक नहीं पहुंच पाता।

क्षेत्र के विकास में बाधा आ रही है

रीटेल का कहना है कि रोड केवल सलाह का माध्यम नहीं है, बल्कि किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की सूची है। सड़क खराब होने के कारण किसानों को अपनी उपज बाजार तक में बेचनी पड़ती है। आदिवासियों से प्रभावित हैं और रोजगार के अवसर भी सीमित हो गए हैं।

यदि इस मार्ग का करकन पक्का सामान जाए तो क्षेत्र के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी, समय और जंगल की बचत होगी और शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी रेलवे कंपनियों तक लोगों की पहुंच आसान होगी।

पुनः प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की

प्रदर्शन कर रहे आतिथ्य ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि रोड की तकनीकी जांच जल्द ही पक्कीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाए। उनका कहना है कि अब केवल पासपोर्ट पर काम करना जरूरी नहीं है।

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रिव्यूल ने उम्मीद जताई कि उनकी यह प्रतिष्ठित भूमिकाएं जिम्मेदार अधिकारियों और पोर्टफोलियो तक के नामांकन और वर्षों से एनिमेटेड स्ट्रीट निर्माण की मांग को लेकर चुनी जाएंगी। लोगों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

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Author: यायावर

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