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रहस्यमयी मौत या महज संयोग? प्रतीक यादव की मौत ने खड़े किए कई सवाल

शरीर पर नीले निशान, कमरा सील, मोबाइल-लैपटॉप जब्त; पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजनीति और देश की सबसे चर्चित राजनीतिक परिवारों में शुमार यादव परिवार एक बार फिर अचानक आई एक दुखद घटना के कारण सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे, सपा प्रमुख Akhilesh Yadav के सौतेले भाई और भाजपा नेता Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर दिया है।

38 वर्षीय प्रतीक यादव बुधवार सुबह लखनऊ स्थित अपने आवास पर बेहोशी की हालत में पाए गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती तौर पर सामने आई जानकारी और बाद में मिले कई संकेतों ने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और रहस्यमयी बना दिया है। अब पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक टीमें इस मौत के हर पहलू की गहन जांच में जुट गई हैं। घटनास्थल को सील कर दिया गया है और प्रतीक यादव के निजी सामान को कब्जे में लेकर डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस और मजिस्ट्रेट की टीम ने की गहन पड़ताल

प्रतीक यादव की मौत की खबर मिलते ही लखनऊ पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया। विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर पुलिस अधिकारियों, फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट ने पहुंचकर पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने लगभग दस मिनट तक कमरे और आसपास की परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया। शुरुआती जांच के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले, जिनके बाद अधिकारियों ने एहतियातन प्रतीक यादव का कमरा सील कर दिया।

जांच एजेंसियों ने उनका मोबाइल फोन, लैपटॉप, निजी डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। अब डिजिटल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और निजी नोट्स के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि मौत से पहले प्रतीक यादव किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे।

घटना के समय घर में अकेले थे प्रतीक यादव

पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना वाली रात प्रतीक यादव घर में अकेले थे। उनकी पत्नी और भाजपा नेता Aparna Yadav उस समय असम दौरे पर थीं।

बताया जा रहा है कि सुबह जब घर के लोगों को उनकी स्थिति का पता चला तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। यही तथ्य अब जांच का सबसे अहम बिंदु बन गया है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि रात के दौरान प्रतीक यादव से आखिरी बार किसने संपर्क किया था और उनके फोन या डिजिटल गतिविधियों में क्या कुछ दर्ज है।

शरीर पर मिले चोट और नीले निशानों ने बढ़ाया शक

प्रतीक यादव की मौत को लेकर संदेह तब और गहरा गया जब उनके शरीर पर चोट और नीले निशान मिलने की बात सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, उनके हाथ और सीने के आसपास नीले निशान पाए गए हैं। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि चोट लगने के कुछ समय बाद त्वचा पर नीले निशान उभर आते हैं। यही कारण है कि पुलिस और डॉक्टर दोनों इस पहलू को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।

कुछ चिकित्सकों ने शुरुआती तौर पर पॉइजनिंग यानी जहर की आशंका भी जताई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि शरीर पर मिले निशान किसी चोट, मेडिकल प्रक्रिया या अन्य किसी कारण से बने थे।

KGMU में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में हुआ पोस्टमार्टम

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम लखनऊ के King George’s Medical University में कराया गया। पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड की निगरानी में चार डॉक्टरों की टीम ने किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।

सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम से पहले उनके सीने का एक्सरे भी कराया गया। अब पुलिस और परिवार दोनों को मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है, क्योंकि उसी के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

विधायक रविदास मेहरोत्रा ने उठाए गंभीर सवाल

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक Ravidas Mehrotra भी घटना की जानकारी मिलते ही परिवार से मिलने पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामला सामान्य नहीं लग रहा और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि यदि यह सामान्य मौत होती तो पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग भी उठाई। उनके बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

दोस्तों ने बीमारी के दावों पर उठाए सवाल

प्रतीक यादव के करीबी दोस्तों और जिम साथियों ने भी उनकी कथित गंभीर बीमारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनके मित्र अंकित साहू ने कहा कि प्रतीक यादव बेहद फिटनेस प्रेमी थे और नियमित जिम जाते थे। उन्होंने दावा किया कि कोई व्यक्ति यदि गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहा हो तो वह भारी वजन नहीं उठा सकता। दोस्तों का कहना है कि प्रतीक यादव 80 किलो से लेकर लगभग एक क्विंटल तक वजन उठाने की क्षमता रखते थे और नियमित वर्कआउट करते थे।

उनके करीबी दोस्त सुमित ने भी कहा कि उन्हें कभी प्रतीक यादव की किसी गंभीर बीमारी की जानकारी नहीं मिली। ऐसे में अचानक मौत की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।

पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके थे प्रतीक यादव

हालांकि दूसरी ओर कुछ सूत्रों का कहना है कि प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि 30 अप्रैल को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे करीब तीन दिन तक उपचाराधीन रहे। कुछ रिपोर्ट्स में फेफड़ों से जुड़ी बीमारी का जिक्र किया गया है।

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने मोटापा कम करने के लिए एक सर्जरी कराई थी। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं किसी मेडिकल जटिलता का इस मौत से संबंध तो नहीं है।

अपर्णा यादव के करीबी ने दी सफाई

इस पूरे मामले में कई तरह की चर्चाओं के बीच Aparna Yadav के करीबी मुकेश बहादुर सिंह ने मीडिया के सामने सफाई दी।

उन्होंने कहा कि प्रतीक यादव का कुछ समय पहले फैट रिमूवल ऑपरेशन हुआ था। इसी प्रक्रिया के दौरान पैरों में खून जमा होने की समस्या हुई थी, जिसके कारण शरीर पर नीले निशान दिखाई दे रहे थे। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना तथ्यों के अफवाहें न फैलाएं। हालांकि पुलिस ने साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के दायरे में

प्रतीक यादव की मौत के बाद उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आ गए हैं। कुछ समय पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर पत्नी Aparna Yadav को लेकर भावुक और विवादित पोस्ट साझा किए थे। एक पोस्ट में उन्होंने निजी जीवन को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर कहा था कि पति-पत्नी के बीच सब सामान्य है और गलतफहमियां दूर हो चुकी हैं।

अब पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं मानसिक तनाव, निजी विवाद या भावनात्मक दबाव जैसी परिस्थितियों का इस घटना से कोई संबंध तो नहीं था।

परिवार के बीच पहुंचे अखिलेश यादव

भाई के निधन की खबर मिलते ही Akhilesh Yadav तुरंत अस्पताल और बाद में परिवार के आवास पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रतीक यादव मेहनती और महत्वाकांक्षी व्यक्ति थे, जो अपने दम पर आगे बढ़ना चाहते थे।

अखिलेश यादव ने इसे परिवार के लिए बेहद दुखद समय बताते हुए कहा कि कानून और जांच एजेंसियां जो उचित समझेंगी, उसी दिशा में कार्रवाई होगी। उनके इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि परिवार भी जांच प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज

प्रतीक यादव की अचानक मौत ने राजनीतिक हलकों में कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों खेमों के नेताओं की नजर इस मामले पर बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन लगातार लोगों से संयम बरतने और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करने की अपील कर रहा है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल डेटा और मेडिकल रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतीक यादव की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े इस मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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