सरकारी सिस्टम में सेंध : ईमेल हैक कर बनाए गए सैकड़ों फर्जी दस्तावेज, कई राज्यों की पुलिस जांच में जुटी
रिपोर्ट ; रामकीर्ति यादव
देश के विभिन्न हिस्सों में फैले एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर से शुरू हुए इस मामले ने अब अंतरराज्यीय रूप ले लिया है, जिसमें महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार की पुलिस भी सक्रिय हो गई है। यह मामला सिर्फ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी सिस्टम की सुरक्षा में गंभीर खामियों की भी पोल खुली है।
दरअसल, जौनपुर में पुलिस ने पिछले वर्ष 4 दिसंबर को एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जो पंचायत, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के ईमेल आईडी और पासवर्ड हैक कर सरकारी पोर्टल तक पहुंच बना लेता था। इसके बाद ये लोग सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
जांच के दौरान यह सामने आया कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के नाम पर भी 500 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पहचान और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए किया जा सकता था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता था। फिलहाल इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार की पुलिस ने भी जौनपुर पुलिस से संपर्क साधा है। इन राज्यों में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जौनपुर पुलिस ने संबंधित राज्यों को इस गिरोह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है, ताकि वहां भी इस नेटवर्क को खत्म किया जा सके।
एएसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव के अनुसार, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। इसका मास्टरमाइंड लखनऊ के प्रेम बिहारी कॉलोनी का रहने वाला अभिषेक गुप्ता बताया गया है। वह सरकारी पोर्टल के लॉगिन और पासवर्ड को एक दिन के लिए 20 से 25 हजार रुपये में किराए पर देता था। इसके जरिए अन्य सदस्य पोर्टल में लॉगिन कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते थे।
इस पूरे नेटवर्क में विभिन्न जिलों और राज्यों के लोग शामिल थे। बिहार के मधुबनी जिले के खैरीबाकर निवासी राशिद, उत्तर प्रदेश के अमरोहा के डगरौली निवासी राजीव कुमार, गौतमबुद्ध नगर के हैबतपुर निवासी राजकुमार उर्फ विक्की और मऊ जिले के टेकई निवासी अंकित यादव उर्फ शुभम यादव भी इस गिरोह के सक्रिय सदस्य थे। सभी आरोपी मिलकर इस अवैध धंधे को चला रहे थे।
गिरोह का काम करने का तरीका भी बेहद चौंकाने वाला था। वे व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते थे और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए 700 से 1000 रुपये तक वसूलते थे। इस राशि में से एक हिस्सा मास्टरमाइंड को दिया जाता था, जबकि बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी। इस तरह यह गिरोह कम समय में मोटी कमाई कर रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है। यदि समय रहते साइबर सुरक्षा को मजबूत नहीं किया गया, तो इस तरह के गिरोह सरकारी डाटा का दुरुपयोग कर आम जनता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
फिलहाल जौनपुर पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रैकेट: क्लिकेबल सवाल-जवाब
यह मामला किससे जुड़ा है?
यह मामला सरकारी अधिकारियों के ईमेल और पासवर्ड हैक कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा है।
जांच में कौन-कौन से राज्य शामिल हुए हैं?
जांच में अब महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार पुलिस भी शामिल हो गई है। इन राज्यों ने जौनपुर पुलिस से गिरोह से जुड़ी जानकारी मांगी है।
गिरोह कैसे काम करता था?
गिरोह सरकारी पोर्टल के लॉगिन और पासवर्ड का दुरुपयोग कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करता था और उन्हें 700 से 1000 रुपये में बेचता था।
मास्टरमाइंड कौन बताया गया है?
जांच में लखनऊ के प्रेम बिहारी कॉलोनी निवासी अभिषेक गुप्ता को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है।
कितने फर्जी प्रमाण पत्र बरामद हुए?
पुलिस ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र से जुड़े 500 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बरामद किए हैं। इन्हें निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है।










