18 अक्टूबर 2026 4:51 पूर्वाह्न

झांसी–जालौन में अवैध खनन का जाल: ओवरलोडिंग गाड़ियों को खुली छूट, कार्रवाई नदारद

झांसी क्षेत्र में ओवरलोडेड गिट्टी ट्रक और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीर के साथ अवैध खनन पर आधारित फीचर इमेज

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रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी

उत्तर प्रदेश के जालौन से लेकर झांसी तक अवैध खनन का कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। बीते वर्षों (2024-25-26) में यह समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है। कदौरा, आटा, कुरारा, डकोर और हमीरपुर जैसे इलाकों में बालू और मौरंग का अवैध खनन खुलेआम जारी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय बड़े पैमाने पर मशीनों के जरिए नदियों से बालू निकाला जाता है और भारी संख्या में डंपरों में ओवरलोडिंग कर सड़कों पर दौड़ाया जाता है। हैरानी की बात यह है कि ये गाड़ियां कई बार पुलिस थानों के सामने से गुजरती हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं होती।

नदियों का हो रहा दोहन, मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल

क्षेत्र से गुजरने वाली नदियों की हालत बेहद चिंताजनक हो चुकी है। खनन माफिया बड़ी संख्या में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों का उपयोग कर रातों-रात हजारों टन बालू निकाल रहे हैं।

इस अवैध खनन के चलते नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति आने वाले समय में जल संकट को और बढ़ा सकती है।

किसानों की जमीन तक नहीं सुरक्षित

अवैध खनन का दायरा अब सिर्फ नदियों तक सीमित नहीं रहा। नदी किनारे बसे किसानों की जमीनों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया रात के अंधेरे में खेतों को खोदकर गहरे गड्ढों में बदल देते हैं, जिससे उपजाऊ भूमि बर्बाद हो रही है। विरोध करने पर लोगों को धमकाया जाता है और कई मामलों में मारपीट तक की नौबत आ जाती है।

शिकायतों पर नहीं होती सुनवाई

पीड़ितों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। थानों में शिकायतें दबा दी जाती हैं, जिससे लोगों में डर और निराशा का माहौल है।

कई ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरी में उन्हें चुप रहना पड़ रहा है क्योंकि माफिया का प्रभाव काफी मजबूत है।

अधिकारियों और माफियाओं की मिलीभगत के आरोप

स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि अवैध खनन माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सांठगांठ है।

कहा जा रहा है कि नियमित रूप से “सुविधा शुल्क” के जरिए माफियाओं को संरक्षण दिया जाता है, जिसके कारण ओवरलोडिंग गाड़ियों पर कोई रोक नहीं लग पाती। यही वजह है कि जिम्मेदार विभाग—खनन और परिवहन—भी प्रभावी कार्रवाई करने में असफल नजर आ रहे हैं।

झांसी में गिट्टी प्लांट और ओवरलोडिंग का नेटवर्क

झांसी के बड़ा गांव क्षेत्र में सैकड़ों गिट्टी प्लांट संचालित हो रहे हैं। यहां से हजारों डंपरों के जरिए ओवरलोड गिट्टी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों, खासकर लखनऊ तक पहुंचाई जा रही है।

ट्रांसपोर्टरों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि कई जिलों से गुजरने के बावजूद इन गाड़ियों को कहीं नहीं रोका जाता। इससे साफ जाहिर होता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामी या मिलीभगत मौजूद है।

जिम्मेदार विभाग बेअसर

खनन विभाग और आरटीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नियमों के बावजूद न तो ओवरलोडिंग पर अंकुश लग पा रहा है और न ही अवैध खनन पर रोक लग रही है। यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

निष्कर्ष: कब रुकेगा अवैध खनन?

जालौन से झांसी तक फैले इस अवैध खनन नेटवर्क ने पर्यावरण, किसानों और कानून व्यवस्था—तीनों को प्रभावित किया है।

यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जरूरत है पारदर्शी जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और अवैध खनन माफियाओं पर कड़ी कानूनी शिकंजे की।

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