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यूपी में मौसम का प्रकोप: आंधी-बारिश ने मचाई तबाही, 24 लोगों की दर्दनाक मौत

✍️ कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने व्यापक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। बीते 24 घंटों के दौरान तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने प्रदेशभर में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। जहां एक ओर इस बदलाव ने भीषण गर्मी से कुछ राहत दी, वहीं दूसरी ओर यह राहत कई परिवारों के लिए भारी त्रासदी में बदल गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग जिलों में कुल 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल भी हुए हैं।

दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण हुआ, जिसने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। तेज हवाओं, गरज-चमक और ओलावृष्टि ने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया।

सबसे ज्यादा तबाही पूर्वांचल में, कई जिलों में मौत का तांडव

प्रदेश के पूर्वी हिस्से, विशेष रूप से गोरखपुर-बस्ती मंडल में इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर देखा गया। यहां तेज बारिश, बिजली गिरने और पेड़ गिरने की घटनाओं ने कई जिंदगियां लील लीं।

गोरखपुर और गोंडा में बिजली गिरने से तीन-तीन लोगों की जान चली गई, जबकि सिद्धार्थनगर और गाजीपुर में दो-दो लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा बलरामपुर, अंबेडकर नगर, बहराइच, बागपत और संभल जैसे जिलों में भी एक-एक व्यक्ति की मौत हुई।

सिद्धार्थनगर में एक व्यक्ति की मौत पेड़ गिरने से हुई, जो इस बात का संकेत है कि आंधी की तीव्रता कितनी खतरनाक थी। वहीं कुशीनगर में एक किशोरी की मौत सिर्फ बिजली की कड़क से डरकर भागने के दौरान नाली में गिरने से हो गई, जो इस त्रासदी का बेहद दर्दनाक पहलू है।

दर्दनाक हादसे: कहीं दीवार गिरी, कहीं छत से गिरकर मौत

कई जिलों में हादसे इतने भयावह रहे कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कासगंज में तेज आंधी के कारण एक वृद्ध महिला और मासूम बच्चों की मौत हो गई। संभल में एक दृष्टिबाधित महिला छत से गिरकर जान गंवा बैठी, जबकि गाजीपुर में एक बुजुर्ग व्यक्ति की दीवार गिरने से मौत हो गई।

औरैया में भी स्थिति भयावह रही, जहां आंधी के चलते एक दीवार गिरने से दादी और उनकी नातिन की दबकर मौत हो गई। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि कमजोर संरचनाएं और असावधानी ऐसे मौसम में जानलेवा साबित हो सकती हैं।

बरेली में टूटा 25 साल का रिकॉर्ड, तेज हवाओं ने मचाई तबाही

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मौसम ने बीते 25 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहां 24 घंटों में 54.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो मई महीने में वर्ष 2000 के बाद सबसे अधिक है।

साथ ही, यहां हवाओं की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिसने भारी नुकसान पहुंचाया। भमोरा क्षेत्र में पांच महीने पहले बनी पानी की टंकी तेज आंधी के चलते ढह गई, जिससे पांच लोग घायल हो गए।

इसके अलावा संभल के गुन्नौर क्षेत्र में सबसे अधिक 130 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो इस पूरे मौसमीय बदलाव की गंभीरता को दर्शाता है।

बिजली व्यवस्था चरमराई, एक्सप्रेस-वे निर्माण पर उठे सवाल

मुजफ्फरनगर में तेज आंधी ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यहां 65 से अधिक बिजली के खंभे गिर गए और 135 स्थानों पर तार टूट गए, जिससे व्यापक स्तर पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई।

बागपत जिले के करीब 200 गांवों में अंधेरा छा गया, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे पर बिजरौल के पास मिट्टी धंसने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिद्धार्थनगर में जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी भी क्षतिग्रस्त होकर लटक गई, जो सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ाता है।

21 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

मौसम विभाग ने प्रदेश के 21 जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। इनमें बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकर नगर प्रमुख हैं।

इसके अलावा कई अन्य जिलों में तेज आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है, जिससे प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन अलर्ट मोड पर, लोगों से सतर्क रहने की अपील

लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखें और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य शुरू करें।

लोगों से भी अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे शरण न लें, और बिजली कड़कने के समय विशेष सावधानी बरतें।

राहत और तबाही के बीच झूलता यूपी

उत्तर प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ स्वरूप दोहरी तस्वीर पेश कर रहा है। एक ओर जहां गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर इसने जनजीवन को भारी नुकसान पहुंचाया है। 24 लोगों की मौत इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक आपदाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं, खासकर तब जब तैयारी और सतर्कता में कमी हो।

आने वाले दिनों में मौसम और बिगड़ सकता है, ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन और आम नागरिक दोनों ही सतर्क रहें, ताकि इस तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

❓ जरूरी सवाल-जवाब

यूपी में आंधी-बारिश से कितनी मौतें हुई हैं?

प्रदेश में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है।

किन जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है?

21 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर सहित कई जिले शामिल हैं।

सबसे ज्यादा नुकसान किन क्षेत्रों में हुआ?

गोरखपुर-बस्ती मंडल में सबसे अधिक नुकसान हुआ, जहां कई लोगों की जान गई और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ।

बरेली में मौसम का क्या असर रहा?

बरेली में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा, 54.6 मिमी बारिश दर्ज हुई और तेज हवाओं से भारी नुकसान हुआ।

प्रशासन ने क्या सलाह दी है?

लोगों को घरों में रहने, पेड़ों के नीचे न खड़े होने और खराब मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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