आखिर दर्ज हुई रिपोर्ट, 52 दिनों से भटक रहे पीड़ित की सुनी पुलिस महानिदेशक ने, पढ़िए पूरी खबर👇
अधिवक्ता को बाइक से गिराकर किया गया गंभीर घायल
एक पक्ष पर सक्रिय कार्रवाई, दूसरे पर न्याय के लिए भारी इंतजार किया जा रहा है
🟧 रिपोर्ट: रामकीर्ति यादव
इस्माइला गांव के अंतर्गत जिले के मछलीशहर क्षेत्र में बंधक के साथ हुई हवेली और गंभीर चोट के मामले में आखिरकार 52 दिन बाद टिप्पणी दर्ज की गई। यह कार्रवाई तब संभव हो सकती है जब केस पुलिस रीच तक पहुंच जाए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर लगातार अनदेखी के कारण उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकाना पड़ा।
नहर के पास की ओर, बगल की सड़क पर जंक्शन
जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी की सुबह करीब आठ बजे प्रसिद्ध वास्तुशिल्पी पिरामिडों से ज़ुल्मिश आश्रम जा रहे थे। इस दौरान इस्माइला गांव स्थित नहर के पास स्थित गांव के ही अजय कुमार और उनके एक दोस्त ने उन पर रोक लगा दी। आरोप है कि दोनों ने बाइक गिराकर उन्हें धक्का दे दिया, जिससे वे सड़क पर बाइक गिराकर गिर पड़े। इस दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और उनका निधन हो गया।
इलाज के दौरान दैहिक मानसिक स्थिति, शरीर का प्रभावित होना
चतुर्थ का कहना है कि चोट लगने के बाद भी उपाध्याय का इलाज लगातार जारी रहा, लेकिन इस दौरान उनकी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ा। बताया जा रहा है कि उनके शरीर का दाहिना भाग धूप में डूब गया, जिससे उनकी स्थिति और अभिलेख नष्ट हो गए।
फर्जी फैक्ट्री में फर्जीवाड़े की धमकियां, पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें फार्च्यून एससीएसटी-स्टॉइटली में फांकने की धमकिया दी जाने वाली जगह मिली। इसके लिए पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय अधिकारी और स्थानीय थानेदार मनगढ़ंत बाजार में दबाव बनाने की कोशिश की गई। प्रेमी के पिता नायडू ने कई बार स्थानीय स्तर पर चैंपियनशिप हासिल की, लेकिन कहीं भी पढ़ाई नहीं की।
फ़्रांसीसी पक्ष के संयंत्र फ़्लोरिडा का प्रवेश द्वार हुआ
मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। अजय गौतम की दुकान के अनुसार, उन्होंने गांव में प्रदीप कुमार के घर के निर्माण का ठेका लिया था। मूर्ति का भुगतान न होने पर उसने काम बंद करा दिया। आरोप है कि इसके बाद प्रदीप कुमार, उनके बेटे उत्कर्ष और मिस्त्री गब्बर रीडर्स ने दूसरा मिस्त्री रोजगार निर्माण कार्य शुरू किया।
अजय गौतम का कहना है कि उनके साथ अभद्रता की गई, धमकियां दी गईं और हमला करने की कोशिश की गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससीएसटी एक्ट के तहत पीड़ित पक्ष के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, एक मामले में तेजी तो दूसरे में देरी
इस पूरे मामले में पुलिस की आपत्तिजनक टिप्पणी पर गंभीर सवाल नीचे दिए गए हैं। एक ओर जहां स्थायी निर्माण के लिए एक पक्ष की अर्जी दाखिल की गई, वहीं दूसरे पक्ष को न्याय मिलने के लिए 52 दिन तक इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर अमल किया जाए तो घटना इतनी बड़ी नहीं होती।
दोनों लक्षण के अभिलेख, जांच जारी
एनोवर्ट ऑब्जर्वर ने बताया कि नॉच के निर्देशकों की दोनों सितारों की तस्वीरें सामने आई हैं और मामले की जांच चल रही है। वहीं एसकेएस रूरल ने भी इस बात की पुष्टि की है कि एस्टीमेट की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में चर्चा, पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद
इस मामले को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पुलिस की सलाह पर सवाल उठा रहे हैं और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखिए कि जांच के बाद सच्चाई सामने आई, प्रशासन ने क्या कदम उठाया।











