आंबेडकर जयंती जुलूस में एसडीएम की मौजूदगी से उठे सवाल
प्रशासनिक पद और राजनीतिक सक्रियता के बीच संतुलन पर छिड़ी बहस
उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। चुनावी मौसम हो या सामाजिक आयोजन, कई बार अधिकारी ऐसे मंचों पर नजर आते हैं जहां उनकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। ताजा मामला आजमगढ़ जिले से सामने आया है, जहां लालगंज तहसील में तैनात एसडीएम राजकुमार बैठा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह आंबेडकर जयंती के अवसर पर निकाले गए जुलूस का नेतृत्व करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
वायरल वीडियो से बढ़ी हलचल
वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एसडीएम राजकुमार बैठा जुलूस के अग्रिम पंक्ति में मौजूद हैं और पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व करते नजर आ रहे हैं। यह जुलूस क्राइस्ट इंटर कॉलेज, मेहनाजपुर बाजार से इटैली बाजार तक निकाला गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में इसको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस जुलूस का आयोजन भीम आर्मी द्वारा किया गया था। जुलूस में शामिल कई कार्यकर्ता एसडीएम के समर्थन में नारे लगाते नजर आए, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
भीम आर्मी के आयोजन में भागीदारी
14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर लालगंज क्षेत्र में भीम आर्मी द्वारा एक भव्य जुलूस निकाला गया था। इस आयोजन में एसडीएम राजकुमार बैठा की सक्रिय भागीदारी देखी गई। उन्होंने गले में भीम आर्मी का पट्टा पहन रखा था और जुलूस के दौरान ‘जय भीम’ तथा ‘बाबा साहब अमर रहें’ जैसे नारे लगाते दिखाई दिए।
इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘एसडीएम साहब जिंदाबाद’ और ‘एसडीएम साहब संघर्ष करो, हम आपके साथ हैं’ जैसे नारे भी लगाए, जिससे यह संकेत मिलने लगा कि प्रशासनिक अधिकारी के प्रति राजनीतिक समर्थन जैसा माहौल बन रहा है।

राजनीतिक जुड़ाव की अटकलें
एसडीएम राजकुमार बैठा को लेकर यह भी चर्चा है कि वह आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद के करीबी माने जाते हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कोई प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक रूप से किसी सामाजिक या राजनीतिक संगठन के साथ सक्रिय नजर आता है, तो इससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
पहले भी रहे हैं विवादों में
यह पहला मौका नहीं है जब एसडीएम राजकुमार बैठा का नाम विवादों में आया हो। इससे पहले भी स्थानीय वकीलों ने उन पर पद की गरिमा के विपरीत कार्य करने और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगाए थे। उस समय भी प्रशासनिक हलकों में इसको लेकर चर्चा हुई थी।
अब एक बार फिर जुलूस में उनकी सक्रिय भूमिका ने इन आरोपों को नया आधार दे दिया है और उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन की चुप्पी और बढ़ते सवाल
इस पूरे मामले पर अब तक एसडीएम राजकुमार बैठा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक स्तर पर भी फिलहाल चुप्पी बनी हुई है, जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में स्पष्ट और पारदर्शी प्रतिक्रिया जरूरी होती है, ताकि स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर बहस
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरह के आयोजनों में भाग लेना चाहिए? यदि वे भाग लेते भी हैं, तो उनकी भूमिका कितनी सीमित होनी चाहिए?
कई पूर्व अधिकारियों का मानना है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार की राजनीतिक या पक्षीय गतिविधियों से दूरी बनाए रखना ही पद की गरिमा के अनुरूप होता है। वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सामाजिक आयोजनों में भाग लेना गलत नहीं है, लेकिन उसमें संतुलन और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
जनता और राजनीति के बीच प्रशासन
आजमगढ़ का यह मामला केवल एक अधिकारी की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, राजनीति और समाज के बीच संबंधों को भी उजागर करता है। जिस तरह से जुलूस में एसडीएम के समर्थन में नारे लगे, उसने प्रशासनिक तटस्थता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, तो इससे प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
आजमगढ़ के लालगंज में एसडीएम की जुलूस में सक्रिय भागीदारी ने एक नई बहस को जन्म दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है। फिलहाल यह मामला चर्चा और सवालों के केंद्र में बना हुआ है, जो आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
📌 FAQ
मामला क्या है?
आजमगढ़ में एसडीएम राजकुमार बैठा का आंबेडकर जयंती जुलूस में नेतृत्व करते वीडियो वायरल हुआ है।
विवाद क्यों हुआ?
जुलूस में राजनीतिक नारे और भीम आर्मी से जुड़ाव की वजह से प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
क्या एसडीएम ने कोई बयान दिया?
अब तक इस मामले पर एसडीएम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।











