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सपा प्रमुख को प्रसाद खिलाने का असर? छावनी परिषद की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में छावनी परिषद प्रशासन की एक कार्रवाई इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सफाई सुपरवाइजर के रूप में कार्य कर रहे उमेश कुमार को अचानक उनके पद से हटाकर सफाईकर्मी के रूप में कार्य करने का आदेश जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उमेश कुमार और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी द्वारा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav को भंडारे का प्रसाद खिलाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। वहीं छावनी परिषद प्रशासन का कहना है कि यह कदम सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन के कारण उठाया गया है।

बाबा साहब जयंती के भंडारे से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला 14 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर छावनी परिषद गेट के पास अंजली मैसी द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया था। उसी दिन बैसाखी पर्व के अवसर पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सदर गुरुद्वारा पहुंचे थे। गुरुद्वारे से लौटते समय अंजली मैसी ने अखिलेश यादव से भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।

बताया जाता है कि अखिलेश यादव वाहन से उतरकर भंडारे तक पहुंचे और प्रसाद के रूप में सब्जी-पूड़ी खाई। इस दौरान मौजूद लोगों ने वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया।

दो दिन बाद जारी हुआ आदेश

घटना के दो दिन बाद यानी 16 अप्रैल को छावनी परिषद प्रशासन की ओर से आदेश जारी कर उमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सफाई कार्य में लगाने का निर्देश दिया गया। इससे पहले उमेश कुमार सफाई सुपरवाइजर के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे और विभागीय समन्वय से जुड़े कार्य भी देख रहे थे।

जानकारी के मुताबिक 16 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन सफाई अधीक्षक ने आदेश जारी कर उमेश कुमार को विभिन्न प्रतिष्ठानों में तैनात चौकीदारों और सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी से संबंधित सूचनाएं सफाई विभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। यह दायित्व आमतौर पर सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारियों को सौंपा जाता है।

उमेश कुमार ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

उमेश कुमार का कहना है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया है। उनका आरोप है कि उनकी बेटी द्वारा अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने के बाद परिषद प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।

उन्होंने कहा कि भंडारे के आयोजन को लेकर संबंधित अधिकारियों को विधिवत सूचना और अनुमति के लिए पत्र भेजा गया था। उमेश कुमार के अनुसार मध्य कमान सेनाध्यक्ष, मुख्य अधिशासी अधिकारी, प्रधान निदेशक रक्षा संपदा, थाना कैंट, मध्य यूपी सब एरिया मुख्यालय के डिप्टी जीओसी और रक्षा संपदा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी।

उनका दावा है कि पत्र केवल निमंत्रण नहीं था, बल्कि कार्यक्रम की अनुमति लेने की प्रक्रिया का हिस्सा था। ऐसे में उन पर सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाना अनुचित है।

परिषद प्रशासन ने दी सफाई

छावनी परिषद प्रशासन ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के आरोपों को खारिज किया है। परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिषेक राठौर ने स्पष्ट कहा कि उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने के कारण नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि बिना विभागीय अनुमति के रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारियों को सीधे पत्र भेजना सेवा आचरण नियमावली के विरुद्ध है। इसी कारण प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उमेश कुमार को उनके मूल कार्य पर वापस भेजा गया है।

अभिषेक राठौर ने कहा कि परिषद प्रशासन नियमों के अनुरूप कार्य कर रहा है और किसी प्रकार की राजनीतिक भावना से प्रेरित होकर कार्रवाई नहीं की गई है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सेवा नियमों का पालन हर कर्मचारी के लिए आवश्यक है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का आम लोगों के बीच जाकर प्रसाद ग्रहण करना पहले ही चर्चा का विषय बन चुका था। ऐसे में उससे जुड़े कर्मचारी के खिलाफ हुई कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

कर्मचारी संगठनों में भी चर्चा

छावनी परिषद के कर्मचारियों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी ने कार्यक्रम की अनुमति के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा था तो पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी। वहीं कुछ कर्मचारी इसे सेवा नियमों से जुड़ा मामला बता रहे हैं।

राजनीतिक माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे घटनाक्रम भी बड़े राजनीतिक संदेश देने लगते हैं। ऐसे में यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस प्रकरण में जांच या पुनर्विचार होता है तो यह मामला और अधिक चर्चा में आ सकता है।

फिलहाल उमेश कुमार खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं, जबकि परिषद प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमसम्मत बता रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।

 
❓ पूरा विवाद क्या है?

लखनऊ छावनी परिषद में सफाई सुपरवाइजर उमेश कुमार को सफाईकर्मी के पद पर भेजे जाने के बाद विवाद शुरू हुआ। परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी द्वारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद खिलाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

❓ अखिलेश यादव कब और कैसे भंडारे में पहुंचे?

14 अप्रैल को बाबा साहब आंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित भंडारे में बैसाखी पर्व के दौरान सदर गुरुद्वारा से लौटते समय अखिलेश यादव पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया।

❓ उमेश कुमार ने क्या आरोप लगाए हैं?

उमेश कुमार का कहना है कि उनकी बेटी द्वारा अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने के बाद परिषद प्रशासन ने उन्हें निशाना बनाते हुए पदावनत किया है।

❓ छावनी परिषद प्रशासन ने क्या सफाई दी?

परिषद प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारियों को सीधे निमंत्रण भेजना सेवा आचरण नियमावली के खिलाफ था, इसलिए कार्रवाई की गई।

❓ सोशल मीडिया पर यह मामला क्यों चर्चा में है?

अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई का आदेश सामने आया, जिसके कारण लोग इसे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।

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