देवरिया

जी एम एकेडमी का गौरव : आयुष और दीक्षा की सफलता ने बढ़ाया सलेमपुर का मान

ब्यूरो रिपोर्ट

सलेमपुर जैसे छोटे नगर से जब बड़ी उपलब्धियों की खबर निकलती है, तो वह केवल एक विद्यालय या कुछ परिवारों की खुशी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी इस बार सामने आई है जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की, जहां के दो मेधावी छात्रों—आयुष कुशवाहा और दीक्षा शर्मा—ने जेईई-मेन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे नगर का नाम रोशन किया है।

आयुष कुशवाहा, जो सलेमपुर के निवासी अनूप कुमार के पुत्र हैं, ने जेईई-मेन में 97.5 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर एक शानदार उपलब्धि दर्ज की। यह केवल एक उच्च स्कोर भर नहीं है, बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने अपने निर्धारित कट-ऑफ से 16.62 परसेंटाइल अधिक अंक हासिल किए। यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। आयुष की यह सफलता इस बात को भी दर्शाती है कि यदि लगन और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो किसी भी छोटे शहर का छात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।

दूसरी ओर, दीक्षा शर्मा ने भी अपनी मेहनत और समर्पण से 83.21 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि सफलता केवल अंकों की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और निरंतरता की कहानी होती है। दीक्षा, जो श्यामसुंदर शर्मा की पुत्री हैं, ने अपने प्रदर्शन के बल पर जेईई-एडवांस के लिए मजबूत दावेदारी पेश की है। उनके इस परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे आने वाले समय में और भी बड़ी उपलब्धियों के लिए तैयार हैं।

इन दोनों छात्रों की सफलता ने सलेमपुर में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है। यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। विद्यालय परिसर में भी इस सफलता का जश्न देखने को मिला, जहां शिक्षकों और विद्यार्थियों के चेहरे गर्व और खुशी से दमक उठे।

अपनी सफलता के पीछे के कारणों पर बात करते हुए आयुष और दीक्षा दोनों ने विनम्रता के साथ अपने माता-पिता और शिक्षकों को इसका श्रेय दिया। उनका मानना है कि परिवार का समर्थन और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही वह मजबूत आधार है, जिस पर किसी भी छात्र का भविष्य खड़ा होता है। यह भावना न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।

विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए दोनों छात्रों को सम्मानित किया। उन्होंने माला पहनाकर और मिष्ठान खिलाकर उनकी उपलब्धि का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आयुष और दीक्षा दोनों ही विद्यालय के अत्यंत होनहार, अनुशासित और मेहनती छात्र रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये दोनों छात्र न केवल जेईई-एडवांस में भी सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि भविष्य में देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां विद्यालय के लिए गर्व का विषय होती हैं और यह अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। उन्होंने दोनों छात्रों को आगे की तैयारी में पूरी लगन और मनोयोग के साथ जुट जाने की सलाह दी, ताकि वे अपने अगले लक्ष्य को भी सफलतापूर्वक हासिल कर सकें।

इस अवसर पर जी एम एकेडमी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. श्री प्रकाश मिश्र ने भी अपनी बधाई संदेश के माध्यम से दोनों छात्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्हें इन छात्रों पर गर्व है, जिन्होंने विद्यालय की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने परिवार और शिक्षकों का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों का भी आभार व्यक्त किया, जिनके संयुक्त प्रयासों से यह सफलता संभव हो पाई है।

डॉ. मिश्र ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की असली पहचान उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। जी एम एकेडमी ने लगातार अपने उत्कृष्ट परिणामों के माध्यम से यह साबित किया है कि यहां की शिक्षा व्यवस्था मजबूत और प्रभावी है।

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण उत्सव जैसा बना रहा। शिक्षकगण और अन्य स्टाफ सदस्यों ने भी दोनों छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर दिलीप कुमार सिंह, सीमा पांडेय, राकेश मिश्र, आदित्य, अमुल्य सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह सफलता केवल दो छात्रों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उस सामूहिक प्रयास का परिणाम है, जिसमें विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और स्वयं छात्र—सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आयुष और दीक्षा की कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और मार्गदर्शन सही हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

सलेमपुर जैसे नगर में इस तरह की उपलब्धियां यह भी साबित करती हैं कि प्रतिभा किसी स्थान या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सही दिशा और मेहनत के बल पर कोई भी छात्र अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है। आयुष और दीक्षा ने न केवल अपने परिवार और विद्यालय का नाम रोशन किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श भी प्रस्तुत किया है।

अब सबकी निगाहें इन दोनों छात्रों के अगले पड़ाव—जेईई-एडवांस—पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये दोनों छात्र वहां भी अपनी मेहनत और प्रतिभा का परचम लहराएंगे और एक नई सफलता की कहानी लिखेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आयुष कुशवाहा ने कितने परसेंटाइल प्राप्त किए?

आयुष कुशवाहा ने जेईई-मेन में 97.5 परसेंटाइल अंक प्राप्त किए।

दीक्षा शर्मा का परिणाम क्या रहा?

दीक्षा शर्मा ने 83.21 परसेंटाइल अंक प्राप्त किए और जेईई-एडवांस के लिए मजबूत दावेदारी पेश की।

इस सफलता का श्रेय किसे दिया गया?

दोनों छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।

विद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?

प्रधानाचार्य और चेयरमैन ने छात्रों की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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