सीतापुर

लोगों ने रूप पर ताने दिए, प्राची ने 10वीं टॉपर से 12वीं रिजल्ट तक बेरोक सफलता हासिल की

रीतेश कुमार गुप्ता के साथ सुनील शुक्ला की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की प्राची निगम की कहानी सिर्फ एक छात्रा के परीक्षा परिणाम की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और आत्मविश्वास की दास्तान है, जिससे गुजरकर उन्होंने खुद को फिर से स्थापित किया। दो साल पहले जब प्राची ने यूपी बोर्ड की 10वीं परीक्षा में टॉप किया था, तब उनकी उपलब्धि से ज्यादा चर्चा उनके चेहरे और लुक्स को लेकर हो रही थी। लेकिन आज, 12वीं के परिणाम के साथ वह फिर चर्चा में हैं—इस बार उनकी मेहनत, स्थिरता और मानसिक मजबूती के कारण।

10वीं में टॉप, लेकिन खुशी पर भारी पड़ी ट्रोलिंग

साल 2024 में जब प्राची निगम ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में टॉप किया, तब पूरे देश में उनका नाम गूंजा। लाखों छात्रों के बीच पहला स्थान हासिल करना आसान नहीं होता, और यह उपलब्धि अपने आप में प्रेरणादायक थी। लेकिन इस सफलता के साथ एक कड़वा अनुभव भी जुड़ा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके चेहरे पर उगे बालों को लेकर उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। उनकी तस्वीरों को एडिट कर, मजाक बनाकर, और अपमानजनक टिप्पणियों के साथ वायरल किया गया। स्थिति ऐसी हो गई कि उनकी मेहनत और उपलब्धि पीछे छूट गई, और चर्चा का केंद्र उनका लुक बन गया।

प्राची ने उस समय कहा था कि उन्हें पहली बार अपने चेहरे के बालों का एहसास ही तब हुआ, जब लोगों ने उसे ट्रोल करना शुरू किया। यह अनुभव उनके लिए बेहद असहज और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण था।

ट्रोलिंग से टूटी नहीं, बल्कि और मजबूत बनीं

जहां कई लोग इस तरह की ट्रोलिंग से टूट जाते हैं, वहीं प्राची ने इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने इसे एक चुनौती की तरह लिया और खुद को संभालने की कोशिश की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया।

प्राची बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें बहुत अजीब लगा, लेकिन समय के साथ उन्होंने यह समझ लिया कि लोगों की सोच को बदलना उनके हाथ में नहीं है, लेकिन खुद को मजबूत बनाना उनके हाथ में जरूर है।

हार्मोनल समस्या और इलाज का फैसला

प्राची के चेहरे पर बालों की समस्या कोई सामान्य बात नहीं थी। डॉक्टरों के अनुसार यह हार्मोनल असंतुलन का परिणाम था, जो नौवीं कक्षा से ही बढ़ने लगा था। लेकिन उन्होंने इस पर कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।

ट्रोलिंग के बाद उन्होंने इलाज कराने का निर्णय लिया। रिजल्ट आने के कुछ महीनों बाद उन्होंने लखनऊ में ट्रीटमेंट शुरू किया। शुरुआती दौर में एक डॉक्टर ने उन्हें मुफ्त में कई सत्र दिए, जिससे उन्हें काफी राहत मिली।

हालांकि, बाद में इलाज महंगा साबित हुआ। एक बार के सेशन में करीब 10,000 रुपये खर्च होते हैं, और अब तक वह लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने इलाज जारी रखा, क्योंकि यह सिर्फ बाहरी बदलाव नहीं था, बल्कि उनके आत्मविश्वास से जुड़ा हुआ था।

12वीं में 91.20% अंक, फिर भी संतोष अधूरा

साल 2026 में जब 12वीं का रिजल्ट आया, तो प्राची ने 500 में से 456 अंक हासिल किए। यह लगभग 91.20 प्रतिशत है, जो एक बेहतरीन प्रदर्शन माना जाता है।

उनके विषयवार अंक इस प्रकार रहे: गणित: 99, रसायन विज्ञान: 95, हिंदी: 96, भौतिकी: 93, अंग्रेजी: 73

हालांकि यह परिणाम शानदार है, लेकिन प्राची खुद मानती हैं कि यह उनके अपेक्षाओं से थोड़ा कम है। खासकर अंग्रेजी में कम अंक आने से उन्हें निराशा हुई। वह टॉप टेन में जगह नहीं बना पाईं, जिसका उन्हें मलाल भी है।

इस बार घर में नहीं दिखी पहले जैसी हलचल

 26 अप्रैल को प्राची के घर माहौल पहले जैसा उत्सव वाला नहीं था। न तो लोगों की भीड़ थी, न ही बधाइयों का सिलसिला। इसका कारण साफ था—इस बार वह टॉपर नहीं थीं। लेकिन इस शांत माहौल के पीछे एक गहरी सच्चाई भी छिपी है—समाज अक्सर केवल शीर्ष स्थान को ही महत्व देता है, जबकि बाकी उत्कृष्ट प्रदर्शन को नजरअंदाज कर देता है।

सोशल मीडिया पर फिर वायरल, लेकिन वजह अलग

हालांकि इस बार प्राची टॉप नहीं कर पाईं, फिर भी सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा जारी है। लेकिन अब लोग उनके नंबरों के साथ-साथ उनकी पुरानी तस्वीरों को भी शेयर कर रहे हैं।

प्राची का कहना है कि लोग व्यूज और लाइक्स के लिए उनकी पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि वह अब सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं हैं। नई तस्वीरें उपलब्ध न होने के कारण लोग पुरानी तस्वीरों को ही बार-बार वायरल कर रहे हैं।

भद्दे कमेंट्स से आज भी नहीं मिली राहत

प्राची बताती हैं कि इस बार ट्रोलिंग पहले जितनी नहीं है, लेकिन जो कमेंट्स आ रहे हैं, वे बेहद भद्दे और असहज करने वाले हैं। वह कहती हैं कि लोग क्या-क्या लिखते हैं, यह बताया भी नहीं जा सकता। यह स्थिति यह दिखाती है कि सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता की कमी आज भी बनी हुई है, और लोग बिना सोचे-समझे किसी के बारे में कुछ भी लिख देते हैं।

मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स पर भी जताई नाराजगी

प्राची ने मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर्स सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए एक ही तरह के सवाल बार-बार पूछते हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने उस दौर को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन बार-बार वही बातें पूछकर उन्हें फिर से उस स्थिति में ला दिया जाता है। यह उनके निजी जीवन में दखल जैसा महसूस होता है।

ट्रोलिंग का असर और उससे मिली सीख

जब उनसे पूछा गया कि ट्रोलिंग का उन पर क्या असर पड़ा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। बल्कि उन्हें इस वजह से पहचान मिली, सम्मान मिला और नए अनुभव भी मिले।

हालांकि, वह यह भी मानती हैं कि हर व्यक्ति इतना मजबूत नहीं होता। कई लोग ट्रोलिंग को दिल पर ले लेते हैं और गंभीर कदम उठा लेते हैं। इसलिए वह सभी से अपील करती हैं कि किसी को भी ट्रोल न करें।

परिवार का मिला पूरा साथ

प्राची के परिवार ने इस पूरे सफर में उनका पूरा साथ दिया। वह दो बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता नगर निगम में काम करते हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार का सहयोग और समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। यही कारण है कि वह इस कठिन दौर से बाहर निकल पाईं।

सफलता सिर्फ नंबरों से नहीं मापी जाती

प्राची निगम की कहानी यह सिखाती है कि सफलता केवल नंबरों से नहीं मापी जाती, बल्कि यह उस मानसिक मजबूती, संघर्ष और आत्मविश्वास से तय होती है, जिससे कोई व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों का सामना करता है। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ट्रोलिंग, आलोचना और सामाजिक दबाव भी रास्ता नहीं रोक सकते।

सीतापुर की प्राची निगम आज उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा हैं, जो किसी न किसी रूप में सामाजिक दबाव या आलोचना का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दिखा दिया कि अगर आप खुद पर विश्वास रखते हैं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

लोगों ने उनके रूप पर ताने दिए, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से हर सवाल का जवाब दिया। 10वीं में टॉप से लेकर 12वीं में शानदार प्रदर्शन तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि असली जीत वही है, जो अंदर से हासिल होती है।


 

📌 महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

❓ प्राची निगम कौन हैं?

प्राची निगम उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की छात्रा हैं, जिन्होंने 10वीं में यूपी बोर्ड में टॉप किया था और 12वीं में भी 91.20% अंक हासिल किए हैं।

❓ प्राची निगम को ट्रोल क्यों किया गया था?

10वीं में टॉप करने के बाद सोशल मीडिया पर उनके चेहरे के लुक को लेकर लोगों ने अनुचित टिप्पणियां की थीं, जिससे उनकी उपलब्धि के बजाय उनका रूप चर्चा में आ गया।

❓ 12वीं में प्राची निगम का रिजल्ट कैसा रहा?

प्राची निगम ने 12वीं में 500 में से 456 अंक प्राप्त किए, जो 91.20% है। उन्होंने गणित में 99 और अन्य विषयों में भी अच्छे अंक हासिल किए।

❓ ट्रोलिंग का प्राची पर क्या असर पड़ा?

प्राची के अनुसार, शुरुआत में यह अनुभव कठिन था, लेकिन उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और ट्रोलिंग को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

❓ प्राची निगम ने ट्रोलिंग से क्या सीख दी?

उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी को भी ट्रोल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका मानसिक असर बहुत गहरा हो सकता है।

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