भीषण गर्मी में चार दिनों से बिजली गुल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा — पावर हाउस पर प्रदर्शन, विभाग पर लापरवाही के आरोप
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
बक्शा (जौनपुर) — भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती ने ग्रामीणों की परेशानी को चरम पर पहुंचा दिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि बुधवार को क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने विद्युत पावर हाउस पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
जानकारी के अनुसार, शंभूगंज फीडर से जुड़े उमरपुर, चकपटैला, शिवगुलामगंज और दुबेचक गांवों में बीते चार दिनों से बिजली पूरी तरह ठप है। तेज गर्मी के बीच बिजली न होने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पेयजल संकट, बच्चों की पढ़ाई में बाधा और रात के समय उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि 400 केवीए के मुख्य ट्रांसफार्मर के जल जाने और अंडरग्राउंड केबल में फॉल्ट आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है, लेकिन संबंधित विद्युत विभाग इसे ठीक करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्राम प्रधान विजय बहादुर यादव ने विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) सुरेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जेई न तो फोन कॉल का जवाब देते हैं और न ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के कर्मचारी ट्रांसफार्मर में तेल चोरी का बहाना बनाकर नया ट्रांसफार्मर लगाने में देरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रांसफार्मर में समय पर तेल नहीं डाला गया, जिससे वह जल गया। जबकि विभाग इसे चोरी की घटना बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री और बिजली विभाग के खिलाफ भी नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे सड़क जाम और बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
हालांकि, मौके पर मौजूद विद्युत कर्मियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि बिजली आपूर्ति को दुरुस्त करने का कार्य किया जा चुका है और जल्द ही आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें नियमित और निर्बाध बिजली नहीं मिलती, तब तक वे विभाग के आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे।
इस प्रदर्शन में प्रधान धर्मेंद्र मौर्या, शुभम यादव, सोनू अग्रहरि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गर्मी में बिजली संकट बना बड़ी समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही ट्रांसफार्मर पर दबाव बढ़ जाता है। यदि समय-समय पर रखरखाव नहीं किया जाए, तो इस तरह की समस्याएं उत्पन्न होना स्वाभाविक है। यह घटना भी कहीं न कहीं विभागीय लापरवाही और रखरखाव की कमी को उजागर करती है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए। बिजली संकट ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह जनाक्रोश और भी बड़ा रूप ले सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और विद्युत विभाग इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करते हैं।











