पिंकी चौधरी, दक्ष चौधरी, गौरव राजपूत का गला काटने की तैयारी, ग्रेनेड अटैक की प्लानिंग—ATS जांच में बड़ा खुलासा
रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी
लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश में एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। नोएडा से गिरफ्तार किए गए दो संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ के दौरान यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि आरोपी देश में दहशत फैलाने के लिए कई हिंदूवादी नेताओं की हत्या और ग्रेनेड हमले की योजना बना रहे थे।
एटीएस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बागपत निवासी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान और एटा निवासी समीर शामिल हैं। दोनों को 23 अप्रैल को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल एटीएस उन्हें कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
टारगेट पर थे प्रमुख हिंदूवादी नेता
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों के निशाने पर कई प्रमुख हिंदूवादी नेता थे। इनमें खास तौर पर पिंकी चौधरी, दक्ष चौधरी और गौरव राजपूत के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा अभिषेक ठाकुर और युद्धि राणा को भी टारगेट बनाया गया था।
सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं की गला काटकर हत्या करने की साजिश रची गई थी, जिससे समाज में भय और अस्थिरता फैल सके। इतना ही नहीं, आरोपियों ने इन नेताओं के घरों पर ग्रेनेड से हमला करने की भी योजना बनाई थी, ताकि अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके।
पाकिस्तान और आईएसआई से जुड़े तार
एटीएस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई के एजेंटों के संपर्क में थे। इन एजेंटों में मेजर हमीद, मेजर इकबाल, मेजर अनवर, मोहम्मद हमाद बरकाती और आबिद जट जैसे नाम सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि ये विदेशी हैंडलर्स सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भारत में बैठे अपने संपर्कों को निर्देश देते थे। इसी माध्यम से तुषार और समीर को टारगेट, समय और हमले की रणनीति बताई जाती थी।
पैसों और विदेश भेजने का लालच
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को इस आतंकी साजिश के बदले तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। साथ ही, उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश भेजने की भी योजना बनाई गई थी। इस लालच में आकर दोनों आरोपी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए।
सोशल मीडिया के जरिए चल रहा नेटवर्क
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका बेहद अहम पाई गई है। आरोपी व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपने पाकिस्तानी आकाओं से जुड़े हुए थे। इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्हें निर्देश, लोकेशन और टारगेट की जानकारी दी जाती थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आज के समय में आतंकियों के लिए एक मजबूत हथियार बन चुका है, जिसके जरिए वे युवाओं को आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के कई राज्यों से ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। यह गैंगस्टर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करता था और फिर उनसे देश विरोधी काम करवाता था।
कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि आरोपी सोलर पावर से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाकर संवेदनशील स्थानों की निगरानी करते थे और उसकी फुटेज पाकिस्तान भेजते थे।
एटीएस की बढ़ी चौकसी
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद यूपी एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता और बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी को भी तेज कर दिया गया है, ताकि इस तरह की साजिशों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
नोएडा से गिरफ्तार इन दो संदिग्ध आतंकियों का मामला यह दिखाता है कि देश के अंदर आतंकी नेटवर्क किस तरह सक्रिय हैं और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, एटीएस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है।
यह घटना एक चेतावनी भी है कि देश की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर जागरूकता जरूरी है—चाहे वह सुरक्षा एजेंसियां हों या आम नागरिक।











