प्रेम जाल से सौदेबाजी तक : किशोरी को बेचकर दरिंदगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार
कौशांबी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अंतरजनपदीय गैंग का पर्दाफाश
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से मानव तस्करी और किशोरियों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रेम जाल में फंसाकर एक नाबालिग किशोरी को घर से दूर ले जाया गया, फिर उसे 70 हजार रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद उसके साथ जो कुछ हुआ, उसने पुलिस अधिकारियों तक को झकझोर कर रख दिया।
कौशांबी पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कानपुर से एक अंतरजनपदीय गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने गैंग के चंगुल से एक किशोरी को भी सुरक्षित मुक्त कराया है।
पुलिस के अनुसार यह गैंग अलग-अलग जिलों में सक्रिय होकर लड़कियों को प्रेम, शादी और नौकरी का झांसा देकर फंसाता था, फिर उनकी सौदेबाजी कर उन्हें दूसरे लोगों के हवाले कर देता था।
लापता किशोरी की तलाश से खुला पूरा राज
पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि कोखराज थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 25 मार्च 2026 को अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों ने आशंका जताई थी कि बेटी घर से नाराज होकर कहीं चली गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल स्पेशल टीम गठित की। सर्विलांस सेल, स्थानीय पुलिस और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया। कई जिलों में लगातार जांच और मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने के बाद पुलिस को अहम सुराग मिले।
करीब एक महीने तक चली तलाश के बाद 22 अप्रैल 2026 को पुलिस ने किशोरी को कानपुर से बरामद कर लिया। मेडिकल परीक्षण और पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने पूरे मामले को मानव तस्करी और यौन शोषण के बड़े नेटवर्क से जोड़ दिया।
रेलवे स्टेशन पर हुई दोस्ती, फिर शुरू हुआ धोखे का खेल
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात कानपुर रेलवे स्टेशन पर मैनपुरी जिले के घिरोर थाना क्षेत्र के नगल बगिया गांव निवासी अंशु जाटव से हुई थी।
अंशु ने पहले दोस्ती की, फिर भरोसा जीतकर उसे अपने साथ चलने के लिए तैयार कर लिया। किशोरी को यह एहसास तक नहीं हुआ कि वह एक खतरनाक जाल में फंस चुकी है।
पुलिस के अनुसार अंशु किशोरी को अपने दोस्त शाहरुख हुसैन के घर लेकर गया। शाहरुख एटा जिले के सराय थाना क्षेत्र के नया गांव अलीपुर का रहने वाला बताया गया है। वहीं से किशोरी की जिंदगी का सबसे भयावह दौर शुरू हुआ।
70 हजार रुपये में बेच दी गई किशोरी
जांच में सामने आया कि आरोपी अंशु और शाहरुख ने मिलकर किशोरी की सौदेबाजी की।
उन्होंने हाथरस जिले के सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र के उमरायपुर गांव निवासी अनुराधा नामक महिला के सहयोग से किशोरी को कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र के गौसगंज गांव निवासी मंजू देवी को 70 हजार रुपये में बेच दिया।
पुलिस के मुताबिक मंजू देवी ने किशोरी पर अपने देवर सुमित कुमार से जबरन शादी करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे कमरे में बंद कर दिया गया।
कमरे में कैद कर कई बार किया गया दुष्कर्म
पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शादी के नाम पर उसे एक कमरे में बंद रखा गया। वहां उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया।
किशोरी का आरोप है कि अंशु और शाहरुख ने भी उसके साथ कई बार रेप किया। जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और धमकाया गया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसे जान से मार दिया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता मानसिक रूप से बेहद डरी हुई थी। उसे सुरक्षा और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है।
पांच आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल और नकदी बरामद
कौशांबी पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
- सुमित कुमार
- अनुराधा
- मंजू देवी
- शाहरुख हुसैन
- अंशु जाटव
ये आरोपी कासगंज, हाथरस, एटा और मैनपुरी जिलों के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस ने इनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन और 13,150 रुपये नकद भी बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गैंग का नेटवर्क कितने जिलों तक फैला हुआ है और क्या इससे पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया है।
मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क की आशंका
पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि संगठित मानव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
जांच एजेंसियां अब आरोपियों के कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और सोशल नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गैंग ने पहले भी लड़कियों को इसी तरह प्रेम जाल में फंसाकर बेचा है।
सूत्रों के मुताबिक कई जिलों में पुलिस टीमों को अलर्ट कर दिया गया है और अन्य संदिग्ध लोगों की तलाश जारी है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा गंभीर सवाल भी है। सोशल मीडिया, मोबाइल संपर्क और झूठे प्रेम संबंधों के जरिए किशोरियों को फंसाने वाले गिरोह तेजी से सक्रिय हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों को बच्चों के व्यवहार, ऑनलाइन संपर्क और अचानक बदलती गतिविधियों पर सतर्क नजर रखनी चाहिए। वहीं प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
पुलिस का दावा — आरोपियों को मिलेगी कड़ी सजा
कौशांबी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की तेजी से विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाएगी ताकि उन्हें अदालत से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
फिलहाल पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उसके परिजनों को भी सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।
सवाल-जवाब : कौशांबी मानव तस्करी मामला
कौशांबी पुलिस ने किस गैंग का भंडाफोड़ किया?
कौशांबी पुलिस ने लड़कियों की सौदेबाजी करने वाले अंतरजनपदीय गैंग का भंडाफोड़ किया है।
मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं।
पीड़िता को कहां से बरामद किया गया?
पुलिस की स्पेशल टीम ने किशोरी को कानपुर से बरामद किया।
किशोरी को कितने रुपये में बेचे जाने का आरोप है?
जांच में सामने आया कि किशोरी को 70 हजार रुपये में बेचे जाने का आरोप है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन और 13,150 रुपये नकद बरामद किए हैं।










