ग्रामीण समाज
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गोंडा
“चमरौटी” से “चौपाल” तक गूंजत: गरीबन की पीर और “अदम” की ग़ज़ल
🎤चुन्नीलाल प्रधान की खास रिपोर्ट समाज का वास्तविक आधार केवल कानून, संस्थाएँ और विकास योजनाएँ नहीं होते, बल्कि वह सूक्ष्म…
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बदतमीजी दिल की
“राजा रंगबाज़ हमरा लाज लागे” : भोजपुरी लोकभावना में प्रेम, संकोच और आकर्षण की अनकही कथा
🖊️ अनिल अनूप भोजपुरी लोकसंगीत की परंपरा में एक छोटी-सी पंक्ति भी भावनाओं, संस्कृति और सामाजिक मनोविज्ञान का विराट संसार…
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