देवरिया

गोरखपुर की ‘अम्मा जी’ : बधाई की कमाई से रच दी सेवा, श्रद्धा और समरसता की अनोखी मिसाल

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट

श्रद्धा और समरसता की अनोखी मिसाल

भक्ति, सेवा और संघर्ष की जीवंत कहानी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का एक शांत सा मोहल्ला इन दिनों अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। वजह कोई राजनीतिक घटना या प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक ऐसी इंसानी कहानी है जो समाज की परंपराओं से परे जाकर संवेदनशीलता, सेवा और आस्था की नई परिभाषा गढ़ती है। इस कहानी के केंद्र में हैं—प्रेमा किन्नर, जिन्हें लोग प्यार से “अम्मा जी” कहकर पुकारते हैं। करीब 80 वर्ष की आयु पार कर चुकी प्रेमा किन्नर ने अपने जीवन के 60 से अधिक वर्ष उसी मोहल्ले में बिताए हैं। लेकिन इन वर्षों में उन्होंने जो किया, वह उन्हें साधारण से असाधारण बना देता है।

किन्नर समाज की परंपरा से परोपकार तक का सफर

भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को अक्सर सीमित नजरिए से देखा जाता है—शुभ अवसरों पर “बधाई” देने वाले या तालियां बजाकर अपनी आजीविका चलाने वाले। लेकिन प्रेमा किन्नर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने अपने जीवनभर “बधाई” और “सोहर गीत” गाकर जो भी कमाई की, उसे निजी सुख-सुविधाओं में खर्च करने के बजाय समाज के हित में लगा दिया। यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि उनका जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। किन्नर समुदाय में गुरु-शिष्य परंपरा होती है, जिसमें एक वरिष्ठ किन्नर अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करता है। प्रेमा किन्नर भी इस परंपरा का पालन करती हैं और उनके कई शिष्य हैं, जो उन्हें परिवार की तरह मानते हैं।

85 लाख का भव्य शिव मंदिर: एक अधूरी इच्छा का पूर्ण होना

प्रेमा किन्नर की सबसे बड़ी इच्छा थी कि उनके जीवनकाल में भगवान शिव का एक भव्य मंदिर बने। यह सपना उन्होंने वर्षों तक अपने मन में संजोकर रखा। आखिरकार, उनकी मेहनत और संकल्प ने इस इच्छा को साकार कर दिया। लगभग 85 लाख रुपये की लागत से एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसे “विशेश्वर नाथ मंदिर” नाम दिया गया है। यह मंदिर न सिर्फ वास्तुशिल्प की दृष्टि से सुंदर है, बल्कि उसमें प्रेमा की आस्था और समर्पण की गहराई भी झलकती है। मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 24 अप्रैल को होने जा रही है, जिसमें शहर के कई गणमान्य लोग और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

सिर्फ मंदिर ही नहीं, विकास और समाजसेवा में भी योगदान

प्रेमा किन्नर का योगदान केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, उन्होंने इससे पहले अपनी कमाई से एक सड़क का निर्माण भी करवाया था, जिससे इलाके के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिली। इसके अलावा, उन्होंने अब तक तीन गरीब लड़कियों की शादी भी करवाई है। यह कार्य न केवल आर्थिक सहायता का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी प्रतीक है।

धर्म से ऊपर इंसानियत : सबकी ‘अम्मा जी’

प्रेमा किन्नर की सबसे बड़ी पहचान उनका सर्वसमावेशी दृष्टिकोण है। जिस मोहल्ले में वे रहती हैं, वहां हिंदू, मुस्लिम और दलित समाज के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। लेकिन इन सबके बीच कोई भेदभाव नहीं है—कम से कम प्रेमा किन्नर के व्यवहार में। वे सभी के लिए समान हैं, और यही वजह है कि हर धर्म और वर्ग के लोग उन्हें “अम्मा जी” कहकर सम्मान देते हैं। उनका कहना है कि यह मंदिर किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। यहां कोई भेदभाव नहीं होगा और हर कोई आकर पूजा-अर्चना कर सकता है।

किन्नर समुदाय की सकारात्मक छवि का उदाहरण

भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को अक्सर हाशिए पर रखा जाता है। लेकिन प्रेमा किन्नर ने अपने कार्यों से यह साबित कर दिया कि अवसर और दृष्टिकोण मिलने पर यह समुदाय भी समाज के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। उनकी कहानी उन सभी रूढ़ियों को तोड़ती है, जो किन्नरों को केवल सीमित भूमिकाओं में बांधकर देखती हैं।

प्रेरणा का स्रोत: नई पीढ़ी के लिए संदेश

प्रेमा किन्नर की जीवन यात्रा केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। यह हमें सिखाती है कि संसाधनों की कमी के बावजूद, अगर इरादे मजबूत हों, तो बड़े से बड़ा काम भी किया जा सकता है। आज के समय में, जब लोग अपने व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देते हैं, प्रेमा किन्नर का यह त्याग और समर्पण समाज के लिए एक आईना है।

समाज में बढ़ती सराहना और सम्मान

जैसे-जैसे प्रेमा किन्नर की कहानी लोगों तक पहुंच रही है, वैसे-वैसे उनकी सराहना भी बढ़ती जा रही है। लोग दूर-दूर से उनके बनाए मंदिर को देखने आ रहे हैं और उनके कार्यों की प्रशंसा कर रहे हैं। स्थानीय लोग भी गर्व महसूस कर रहे हैं कि उनके मोहल्ले में ऐसी शख्सियत रहती हैं, जिन्होंने न केवल अपने जीवन को सार्थक बनाया, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया।

अंत में: एक मिसाल जो याद रखी जाएगी

प्रेमा किन्नर की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि असली पहचान हमारे कर्मों से बनती है, न कि हमारी परिस्थितियों से। उन्होंने अपने जीवन को सेवा, श्रद्धा और समर्पण के रास्ते पर चलाकर यह साबित कर दिया कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल की जरूरत होती है। गोरखपुर की यह “अम्मा जी” आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी—एक ऐसी मिसाल, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

प्रेमा किन्नर कौन हैं?

प्रेमा किन्नर गोरखपुर की एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें लोग अम्मा जी के नाम से जानते हैं।

मंदिर का नाम क्या है?

उन्होंने “विशेश्वर नाथ मंदिर” का निर्माण कराया है।

मंदिर की लागत कितनी है?

इस मंदिर के निर्माण में लगभग 85 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

प्रेमा किन्नर ने समाज के लिए और क्या किया?

उन्होंने सड़क बनवाई और गरीब लड़कियों की शादी भी करवाई है।

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