अनिल अनूप
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इतिहास
तवायफ़, जासूस और क्रांतिकारी : स्वतंत्रता संग्राम की वह नायिका, जिसने घुंघरुओं को हथियार बना दिया
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की चर्चा होते ही रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब और तात्या टोपे जैसे नाम सामने…
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गुस्ताख दिल
दर्द में राहत, स्मृतियों का सहारा और समय का ध्रुव सत्य
(यह कोई कहानी नहीं है। यह कोई उपदेश भी नहीं है। यह किसी दर्शनशास्त्री का व्याख्यान या किसी मनोवैज्ञानिक का…
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शख्शियत
संघर्ष ने गढ़ी सोच, शिक्षा ने दिलाया सम्मान ; लेखनी ने जगाई चेतना, यही है केवल कृष्ण पनगोत्रा की पहचान
अनिल अनूप की प्रस्तुति भारत की लोकतांत्रिक और बौद्धिक परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां विचारों…
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संपादकीय
जब घर जला तो शेर अमर हो गया : बशीर बद्र, दंगे और हमारी सामूहिक विफलता
अनिल अनूप, संपादक भारतीय उपमहाद्वीप की साहित्यिक परंपरा में कुछ शायर ऐसे होते हैं जिनकी रचनाएं केवल कागज पर लिखे…
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विचार
शब्दों के महल में रहने वाला सबसे गरीब आदमी ; आखिर लेखक और साहित्यकार आर्थिक विपन्न क्यों रहता है?
-अनिल अनूप सभ्यता का इतिहास उठाकर देखिए। जिस समाज ने अपने कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को सबसे अधिक सम्मान दिया,…
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यात्रा वृत्तांत
कचौड़ी गली : एक जमाना, जो स्मृतियों की गलियों में आज भी सांस लेता है
अनिल अनूप, संपादक कोक स्टूडियो में रेखा भारद्वाज की आवाज में गूंजती भोजपुरी की ऐतिहासिक कजरी “पिया चल गईला रंगून…
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समीक्षा
“कवितांजलि” : संवेदनाओं, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का सजग काव्य-दर्पण
समीक्षक : अनिल अनूप हिंदी साहित्य की समकालीन काव्यधारा में जब संवेदनाओं का क्षरण, सामाजिक विघटन और मानवीय मूल्यों का…
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विचार
मन अटकने का सूफियाना रहस्य : “नदियों पार सजन का थां ना…” और आधुनिक जीवन का आध्यात्मिक सच
लेख : अनिल अनूप प्रस्तुति : रश्मिका शर्मा इंदौरी सूफी संगीत केवल सुरों का संसार नहीं है, बल्कि वह मनुष्य…
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संपादकीय
शब्दों के आईने में समाज, संस्कार और सियासत : बदलते भारत की एक जीवंत शाब्दिक यात्रा
-अनिल अनूप समाज कभी एक जगह खड़ा नहीं रहता। वह हर दिन बदलता है, हर पीढ़ी के साथ अपना रंग…
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विचार
गालों की लाली, आंखों की मस्ती और चाल की लय : नारी-सौंदर्य का गहरा दर्शन
– अनिल अनूप मानव सभ्यता के आरंभ से ही नारी-सौंदर्य केवल आकर्षण का विषय नहीं रहा, बल्कि वह संवेदना, संस्कृति,…
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